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कारोबार पटरी पर लाने को चाहिए मदद -- कपड़ा कारोबार
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सहारनपुर। कोरोना कर्फ्यू के बाद बाजार तो खुल चुके हैं, लेकिन अभी कारोबार धीमा है। सहारनपुर के मशहूर कपड़ा कारोबार पर आर्थिक तंगी है। ऐसे में कपड़ा कारोबारियों को सरकार से मदद की दरकार है। व्यापारियों की मांग है कि आर्थिक संकट से उबारने के लिए व्यापारियों को टैक्स में छूट दी जाए तो, जीएसटी रिटर्न भरने के समय में राहत मिले। साथ ही बिजली बिल आदि में भी छूट दी जाए।
यह कर्फ्यू करीब सवा महीने का रहा। यही वह समय था जब कारोबारियों को ईद और अन्य त्योहार के अलावा शादी समारोहों के सीजन को लेकर बेहतर कारोबार की उम्मीद रहती हैं, लेकिन इस बार सारे अरमान बह गए। ऊपर से व्यापारियों पर बैंक ऋण की किस्त, बिजली बिल और अन्य खर्चे पहले की तरह बने हुए हैं। इन्हें पूरा करने के लिए कारोबार में तेजी आनी जरूरी है, लेकिन अभी व्यापार ठंडा है।
उत्तराखंड और हिमाचल तक है सप्लाई
जनपद में बडे़ पैमाने पर कपडे़ का थोक एवं रिटेल कारोबार होता है। थोक एवं रिटेल का अनुमानित कारोबार 15 से 16 करोड़ रुपये प्रतिदिन से अधिक का है। यहां से उत्तराखंड, वेस्ट यूपी, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब तक कपड़े की सप्लाई होती है।
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फीका निकल गया त्यौहारी सीजन
- शादी विवाह का सीजन और ईद का त्यौहार निकल गया। व्यापारी घाटे में आ गया है। इसलिए सरकार को बैंक ऋण की मासिक किस्त, जीएसटी रिटर्न भरने के समय और नगर निगम के टैक्स आदि में छूट देनी चाहिए। -- किशोर मानकटाला, कपडा व्यापारी।
आर्थिक पैकेज दे सरकार
बाजार को रफ्तार पकड़ने में अभी भी समय लगेगा। संकट से उबारने के लिए सरकार को आर्थिक पैकेज देना चाहिए। दुकानदारों ने अपने कर्मचारियों को लॉकडाउन की अवधि का वेतन भी दिया है। -- रमेश अरोडा, कपडा व्यापारी।
बैंक ऋणों के ब्याज एवं बिजली के बिल में छूट
कोरोना कर्फ्यू के चलते कपडा व्यापार पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। कारोबार का बढ़िया सीजन निकल गया। व्यापारियों के सामने बैंक ऋण की किश्तें जमा करने सहित अन्य टैक्स जमा करने की टेंशन हैं। लॉकडाउन अवधि का ब्याज और बिजली के बिल माफ होने चाहिएं। -- गुलशन धींगडा, कपडा व्यापारी।
आर्थिक मदद से सुधरेगी व्यापार की हालत
लॉकडाउन के चलते कपड़ा व्यापारी आर्थिक संकट में हैं। सरकार को व्यापारियों की स्थिति को देखते हुए आर्थिक पैकेज घोषित करना चाहिए। ताकि कपड़ा व्यापार दोबारा पटरी पर लौट सके। -- सार्थक नारंग, कपड़ा व्यापारी।
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यह कर्फ्यू करीब सवा महीने का रहा। यही वह समय था जब कारोबारियों को ईद और अन्य त्योहार के अलावा शादी समारोहों के सीजन को लेकर बेहतर कारोबार की उम्मीद रहती हैं, लेकिन इस बार सारे अरमान बह गए। ऊपर से व्यापारियों पर बैंक ऋण की किस्त, बिजली बिल और अन्य खर्चे पहले की तरह बने हुए हैं। इन्हें पूरा करने के लिए कारोबार में तेजी आनी जरूरी है, लेकिन अभी व्यापार ठंडा है।
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उत्तराखंड और हिमाचल तक है सप्लाई
जनपद में बडे़ पैमाने पर कपडे़ का थोक एवं रिटेल कारोबार होता है। थोक एवं रिटेल का अनुमानित कारोबार 15 से 16 करोड़ रुपये प्रतिदिन से अधिक का है। यहां से उत्तराखंड, वेस्ट यूपी, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब तक कपड़े की सप्लाई होती है।
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फीका निकल गया त्यौहारी सीजन
- शादी विवाह का सीजन और ईद का त्यौहार निकल गया। व्यापारी घाटे में आ गया है। इसलिए सरकार को बैंक ऋण की मासिक किस्त, जीएसटी रिटर्न भरने के समय और नगर निगम के टैक्स आदि में छूट देनी चाहिए। -- किशोर मानकटाला, कपडा व्यापारी।
आर्थिक पैकेज दे सरकार
बाजार को रफ्तार पकड़ने में अभी भी समय लगेगा। संकट से उबारने के लिए सरकार को आर्थिक पैकेज देना चाहिए। दुकानदारों ने अपने कर्मचारियों को लॉकडाउन की अवधि का वेतन भी दिया है। -- रमेश अरोडा, कपडा व्यापारी।
बैंक ऋणों के ब्याज एवं बिजली के बिल में छूट
कोरोना कर्फ्यू के चलते कपडा व्यापार पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। कारोबार का बढ़िया सीजन निकल गया। व्यापारियों के सामने बैंक ऋण की किश्तें जमा करने सहित अन्य टैक्स जमा करने की टेंशन हैं। लॉकडाउन अवधि का ब्याज और बिजली के बिल माफ होने चाहिएं। -- गुलशन धींगडा, कपडा व्यापारी।
आर्थिक मदद से सुधरेगी व्यापार की हालत
लॉकडाउन के चलते कपड़ा व्यापारी आर्थिक संकट में हैं। सरकार को व्यापारियों की स्थिति को देखते हुए आर्थिक पैकेज घोषित करना चाहिए। ताकि कपड़ा व्यापार दोबारा पटरी पर लौट सके। -- सार्थक नारंग, कपड़ा व्यापारी।