बंद रही दवा की दुकानें, भटकते रहे तीमारदार

ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर Updated Wed, 14 Oct 2015 11:41 PM IST
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Getting off drug stores, wandered Timardar

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ऑनलाइन बिजनेस की नीति के विरोध में देशव्यापी हड़ताल के तहत जिले में भी दवा की दुकानें बंद रही। इसके चलते शहर से लेकर कस्बों और देहाती इलाकों में मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। जनपद में थोक और रिटेल की 2700 दुकानें बंद रहने से करीब तीन करोड़ रुपये के दवा कारोबार के नुकसान की संभावना जताई गई है। शहर में हड़ताल का सबसे अधिक असर किशनपुरा, नेहरू मार्केट, बाजोरिया रोड, कोर्ट और लिंक रोड क्षेत्र में नजर आया। यहां थोक से रिटेल की दुकानों के शटर बंद मिले।
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शहर के दवा कारोबारियों ने प्रतिष्ठान बंद कर श्रीराम चौक पर सरकार की नीतियों के खिलाफ धरना दिया। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप लूथरा की अगुवाई में किए गए प्रदर्शन में कारोबारियों ने कहा कि ऑनलाइन बिजनेस या ई-फार्मेसी की नीतियां बिल्कुल स्वीकार नहीं की जाएंगी। यदि इस तैयारी को रोका नहीं गया तो अनिश्चितकालीन बंद के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने बताया कि जिले से दो बसों में दवा कारोबारी दिल्ली के जंतर मंतर पर भी विरोध दर्ज कराने पहुंचे।
दवा कारोबारी अखिलेश मित्तल, जेबी सिंह, विनोद सैनी,  सरदार हरजीत सिंह रंगूला, विजय मलिक सहित अन्य ने भी इन नीतियों का विरोध किया। धरने की अध्यक्षता विजय मलिक और संचालन महेश सेठ ने किया। प्रदर्शन करने वालों में प्रवीन गुप्ता, प्रेम सागर अरोड़ा, हरीश रेलन, रवींद्र सिंह, सरदार  सर्वजीत सिंह, ठाकुर एसपी सिंह, संदीप कुमार, ललित कुमार, नवीन उतरेजा, राजेश तायल, मनोज खुराना, नीरज बंसल, संजीव गोयल, राजेश विरमानी, ललित कुमार, संजय खुराना, विनोद खुराना, मनोज सचदेवा, संकेत गोयल, विवेक चौहान, आशू मक्कड़, कमल, संदीप गुंबर आदि शामिल रहे।
विधायक बोले, केंद्र तक पहुंचाएंगे बात
श्रीराम चौक पर प्रदर्शन के दौरान पहुंचे नगर विधायक राजीव गुंबर को दवा कारोबारियों ने अपनी समस्याएं सुनाई। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बिजनेस से ऑनलाइन शापिंग कंपनियों की मनमानी बढ़ेगी। प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी और मनमानी बिक्री पर अंकुश लगाना मुश्किल होगा। हजारों लोगों से रोजगार छिनेगा। उन्होंने रिटेल में फार्मेसिस्टों की अनिवार्यता समाप्त करने की भी मांग की। विधायक ने कारोबारियों को आश्वस्त किया कि सांसद के साथ वार्ता कर इस मामले को केंद्र तक पहुंचाया जाएगा। सरकार कारोबारियों के अहित में कोई कदम नहीं उठाएगी।

चिकित्सकों ने भी दी केवल इमरजेंसी सेवाएं
दवाओं की दुकानें बंद रखने के कारण अधिकतर निजी चिकित्सकों ने भी केवल पहले से भर्ती मरीजों को ही इमरजेंसी सेवाएं दी। अस्पतालों के अंदर कुछ मेडिकल स्टोरों पर दवाएं देने की सूचनाएं मिलती रहीं।

प्रतिष्ठान खुलने की उम्मीद में भटकते रहे
दवा कारोबारियों की हड़ताल की जानकारी होने के बाद भी काफी संख्या में मरीज और तीमारदार बाजोरिया रोड और किशनपुरा में पहुंचे। वे यहां इस उम्मीद में भटकते रहे कि शायद दोपहर बाद प्रतिष्ठान खुल जाएं और दवाएं ली जा सके। बाजोरिया रोड पर मानकमऊ से आए जफर, बांदूखेडी के इलम सिंह,  दाबकी के सोनू, गंगोह रोड की सरबती आदि ने बताया कि वे यहां दवाएं लेने पहुंचे थे। मगर मेडिकल स्टोर नहीं खुलने से परेशानी रही।
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