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पर्यावरण को दूषित कर रहा खुले में डाला जा रहा कचरा
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सहारनपुर। एक ओर नगर निगम महानगर में पर्यावरण संरक्षण का दावा कर रहा है, जिसके लिए महानगर में पौधरोपण अभियान चला रहा है। वहीं दूसरी ओर अधिकारी नगर निगम की स्थापना के 13 साल बाद भी कचरा प्रबंधन की ठोस व्यवस्था नहीं कर सके हैं। बीते तीन साल से डंपिंग ग्राउंड तैयार करने का कार्य चल रहा है, जो आज तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में नगर निगम खुले में कचरा डालकर पर्यावरण को दूषित भी कर रहा है।
महानगर से प्रति दिन करीब 125 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसमें से करीब 10 से 15 फीसदी ही कचरे का निस्तारण एमआरएफ (मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटरों के माध्यम से किया जा रहा है। महानगर में दस एमआरएफ सेंटर बनाए गए हैं, जहां कचरे को अलग-अलग किया जाता है, लेकिन शेष कचरे के नियमानुसार निस्तारण की नगर निगम के पास कोई व्यवस्था नहीं है। नगर निगम जनता रोड पर कचरा डाल रहा है। खास बात यह है कि नगर निगम ने तीन साल पहले बेहट रोड पर डंपिंग ग्राउंड के लिए भूमि खरीदी थी, जिस पर तभी से काम चल रहा है, जो अभी तक पूर्ण नहीं हो सका है।
जलाया जा रहा कचरा
नगर क्षेत्र में कई जगहों पर कचरा जलाया भी जा रहा है। शकलापुरी मार्ग पर कुछ प्राइवेट सफाईकर्मी सड़क पर कचरा डाल रहे हैं, जिसमें हर सप्ताह आग लगा दी जाती है। कुटिया का मंदिर के पीछे भी भारी मात्रा में कचरा डाला जा रहा है। यहां भी कूड़ा डालने वाले लोग कचरे में आग लगाते आ रहे हैं। कईं दुकानदार भी रात में दुकान बंद करने से पहले दुकानों का कचरा बाहर कर आग लगा देते हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है।
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निगम का दावा, खत्म कर दिए 107 डलावघर
महानगर में तीन साल पहले तक 142 डलावघर थे। नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि इनमें से 107 डलावघर खत्म कर दिए गए हैं, अब केवल 35 डलावघर बचे हैं। जो डलावघर बचे हैं उनको भी कवर्ड कर शटर लगाए गए हैं, जिससे कचरा नजर ना आए।
डंपिंग ग्राउंड का कार्य अंतिम दौर में है। नगरायुक्त ने अधिकारियों को जितना जल्दी हो सके डंपिंग ग्राउंड को शुरू करने के निर्देश दिए हैं। रही बात शहर के कचरे की तो निगम भारी मात्रा में कचरे को एमआरएफ सेंटरों के माध्यम से निस्तारित कर रहा है। जो कचरा जनता रोड पर डाला जा रहा है उसे भी नियमानुसार डंप किया जा रहा है।
डॉ. कुनाल जैन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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महानगर से प्रति दिन करीब 125 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसमें से करीब 10 से 15 फीसदी ही कचरे का निस्तारण एमआरएफ (मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटरों के माध्यम से किया जा रहा है। महानगर में दस एमआरएफ सेंटर बनाए गए हैं, जहां कचरे को अलग-अलग किया जाता है, लेकिन शेष कचरे के नियमानुसार निस्तारण की नगर निगम के पास कोई व्यवस्था नहीं है। नगर निगम जनता रोड पर कचरा डाल रहा है। खास बात यह है कि नगर निगम ने तीन साल पहले बेहट रोड पर डंपिंग ग्राउंड के लिए भूमि खरीदी थी, जिस पर तभी से काम चल रहा है, जो अभी तक पूर्ण नहीं हो सका है।
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जलाया जा रहा कचरा
नगर क्षेत्र में कई जगहों पर कचरा जलाया भी जा रहा है। शकलापुरी मार्ग पर कुछ प्राइवेट सफाईकर्मी सड़क पर कचरा डाल रहे हैं, जिसमें हर सप्ताह आग लगा दी जाती है। कुटिया का मंदिर के पीछे भी भारी मात्रा में कचरा डाला जा रहा है। यहां भी कूड़ा डालने वाले लोग कचरे में आग लगाते आ रहे हैं। कईं दुकानदार भी रात में दुकान बंद करने से पहले दुकानों का कचरा बाहर कर आग लगा देते हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है।
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निगम का दावा, खत्म कर दिए 107 डलावघर
महानगर में तीन साल पहले तक 142 डलावघर थे। नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि इनमें से 107 डलावघर खत्म कर दिए गए हैं, अब केवल 35 डलावघर बचे हैं। जो डलावघर बचे हैं उनको भी कवर्ड कर शटर लगाए गए हैं, जिससे कचरा नजर ना आए।
डंपिंग ग्राउंड का कार्य अंतिम दौर में है। नगरायुक्त ने अधिकारियों को जितना जल्दी हो सके डंपिंग ग्राउंड को शुरू करने के निर्देश दिए हैं। रही बात शहर के कचरे की तो निगम भारी मात्रा में कचरे को एमआरएफ सेंटरों के माध्यम से निस्तारित कर रहा है। जो कचरा जनता रोड पर डाला जा रहा है उसे भी नियमानुसार डंप किया जा रहा है।
डॉ. कुनाल जैन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।