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बागवानों को फायदा पहुंचा रही फ्रूट कवर बैग तकनीक
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सहारनपुर। कृषि वैज्ञानिक आम को विभिन्न रोग और कीटों से बचाने के लिए फ्रूट बैग कवर लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इससे न सिर्फ कीटों और रोगों से फलों का बचाव होगा बल्कि क्वालिटी वाले फल तैयार होंगे। निर्यात करने के लिए भी जनपद में उच्च क्वालिटी का आम तैयार होगा।
जनपद से बड़ी मात्रा में आम का निर्यात होता है। मंडी समिति परिसर स्थित मैंगो पैक हाउस में आम को प्रोसेस किया जाता है। निर्यात के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त आम की आवश्यकता होती है। बारिश होते ही आम में फंगस के कारण कालापन, फल मक्खी आम की क्वालिटी को खराब कर देती है। जिससे आम की फसल खराब हो जाती है। इसलिए कृषि वैज्ञानिक बागवानों को फ्रूट कवर बैग लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। जिले के कई बागवानों ने अपने बागों में इस तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं।
बागवानों की राय --
जनपद के बडे बागवान करुण कुुुमार गुरेजा का कहना है कि वे फ्रूट कवर बैग का प्रयोग कर रहे हैं। इससे फलों का न सिर्फ रोगों से बचाव होता है बल्कि क्वालिटी भी बढ़िया होती है। कलर और क्वालिटी बढ़िया होने से निर्यात के लिए भी इस आम की काफी डिमांड रहती है। अच्छा भाव मिलता है।
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- बेहट के तरूण सिंघल कहते हैं कि फ्रूट बैग का प्रयोग करने से कीटनाशक पर होने वाले खर्च में बेहद कमी आती है। यह एक बैग 2.80 रुपये का पड़ता है। इसको लंगड़ा और चौंसा आम पर लगाया गया है। इस तकनीक से तैयार किए गए आम का बाजार भाव 100 से 120 रुपये किलो तक रहता है।
--वर्जन--
रोगों से बचाव के साथ ही क्वालिटी भी बेहतर
फ्रूट कवर बैग तकनीक काफी सस्ती है। इसमें आम के फल को छोटी अवस्था से ही एक बैग से कवर किया जाता है। जिससे न सिर्फ आम फल मक्खी, फंगस आदि के प्रकोप से बचता है बल्कि फल अच्छा होने से बाजार में इसका भाव डेढ़ गुना ज्यादा मिलता है। यह तकनीक अन्य फलों पर भी अपनायी जा सकती है। बागवानों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। जिले में कई बागवान इस तकनीकी का प्रयोग कर रहे हैं। -- डॉक्टर आईके कुशवाहा, प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर, कृषि विज्ञान केंद्र।
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जनपद से बड़ी मात्रा में आम का निर्यात होता है। मंडी समिति परिसर स्थित मैंगो पैक हाउस में आम को प्रोसेस किया जाता है। निर्यात के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त आम की आवश्यकता होती है। बारिश होते ही आम में फंगस के कारण कालापन, फल मक्खी आम की क्वालिटी को खराब कर देती है। जिससे आम की फसल खराब हो जाती है। इसलिए कृषि वैज्ञानिक बागवानों को फ्रूट कवर बैग लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। जिले के कई बागवानों ने अपने बागों में इस तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं।
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बागवानों की राय --
जनपद के बडे बागवान करुण कुुुमार गुरेजा का कहना है कि वे फ्रूट कवर बैग का प्रयोग कर रहे हैं। इससे फलों का न सिर्फ रोगों से बचाव होता है बल्कि क्वालिटी भी बढ़िया होती है। कलर और क्वालिटी बढ़िया होने से निर्यात के लिए भी इस आम की काफी डिमांड रहती है। अच्छा भाव मिलता है।
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- बेहट के तरूण सिंघल कहते हैं कि फ्रूट बैग का प्रयोग करने से कीटनाशक पर होने वाले खर्च में बेहद कमी आती है। यह एक बैग 2.80 रुपये का पड़ता है। इसको लंगड़ा और चौंसा आम पर लगाया गया है। इस तकनीक से तैयार किए गए आम का बाजार भाव 100 से 120 रुपये किलो तक रहता है।
--वर्जन--
रोगों से बचाव के साथ ही क्वालिटी भी बेहतर
फ्रूट कवर बैग तकनीक काफी सस्ती है। इसमें आम के फल को छोटी अवस्था से ही एक बैग से कवर किया जाता है। जिससे न सिर्फ आम फल मक्खी, फंगस आदि के प्रकोप से बचता है बल्कि फल अच्छा होने से बाजार में इसका भाव डेढ़ गुना ज्यादा मिलता है। यह तकनीक अन्य फलों पर भी अपनायी जा सकती है। बागवानों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। जिले में कई बागवान इस तकनीकी का प्रयोग कर रहे हैं। -- डॉक्टर आईके कुशवाहा, प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर, कृषि विज्ञान केंद्र।