{"_id":"5f3ac8888ebc3e41114e1b3e","slug":"four-thousand-bicycles-are-parked-with-token-number-saharanpur-news-mrt496647282","type":"story","status":"publish","title_hn":"टोकन नंबर के साथ खड़ी हैं चार हजार साइकिलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टोकन नंबर के साथ खड़ी हैं चार हजार साइकिलें
विज्ञापन
पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग व्यास के मेजर सेंटर में खड़ीं प्रवासी मजदूरों की साइकिलें।
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कोरोना काल में अपने घरों को लौटते समय काफी संख्या में प्रवासी श्रमिक यहां बनाए गए आश्रय स्थल पर साइकिलें छोड़कर गए थे। कुछ जिलों में लौट रहे प्रवासी श्रमिकों की साइकिलें गायब होने की सूचनाएं मिल रहीं हैं। मगर सहारनपुर में अभी तक ऐसी स्थिति सामने नहीं आई है।
जिले में प्रवासी श्रमिकों के लिए सहारनपुर अंबाला हाईवे पर पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग व्यास के मेजर सेंटर को आश्रय स्थल बनाया गया था। यहां के सेवादार विपिन बजाज ने बताया कि किसी प्रवासी श्रमिक की साइकिल गुम नहीं हुई है। साइकिल जमा कराते समय ही प्रशासन की टीमों ने टोकन नंबर जारी किए थे। टोकन श्रमिकों को दिए गए थे और साइकिलों पर भी पेंट से टोकन नंबर लिख दिया गया था। अब जो श्रमिक अपनी साइकिल लेने पहुंच रहे हैं, उसी टोकन को देखने के बाद साइकिल श्रमिकों को सुपुर्द की जाती है। उन्होंने बताया कि रोजाना ही चार से पांच श्रमिक अपनी साइकिल लेने के लिए सत्संग सेंटर पर पहुंच रहे हैं। इस समय भी करीब चार हजार साइकिलें मौजूद हैं। यहां अभी तक कोई साइकिल गुम नहीं हुई है।
कई राज्यों से आश्रय स्थल पहुंचे थे श्रमिक
सहारनपुर। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश से लेकर अन्य राज्यों के प्रवासी श्रमिकों ने इस आश्रम स्थल में आकर आश्रय लिया था। क्वारंटीन समय और लॉकडाउन के समय प्रवासी श्रमिकों के परिवार यहीं पर रहे थे। बाद में शासन प्रशासन के निर्देश पर रोडवेज बसों से उन्हें उनके गंतव्यों के लिए भिजवाया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में प्रवासी श्रमिकों के लिए सहारनपुर अंबाला हाईवे पर पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग व्यास के मेजर सेंटर को आश्रय स्थल बनाया गया था। यहां के सेवादार विपिन बजाज ने बताया कि किसी प्रवासी श्रमिक की साइकिल गुम नहीं हुई है। साइकिल जमा कराते समय ही प्रशासन की टीमों ने टोकन नंबर जारी किए थे। टोकन श्रमिकों को दिए गए थे और साइकिलों पर भी पेंट से टोकन नंबर लिख दिया गया था। अब जो श्रमिक अपनी साइकिल लेने पहुंच रहे हैं, उसी टोकन को देखने के बाद साइकिल श्रमिकों को सुपुर्द की जाती है। उन्होंने बताया कि रोजाना ही चार से पांच श्रमिक अपनी साइकिल लेने के लिए सत्संग सेंटर पर पहुंच रहे हैं। इस समय भी करीब चार हजार साइकिलें मौजूद हैं। यहां अभी तक कोई साइकिल गुम नहीं हुई है।
विज्ञापन
कई राज्यों से आश्रय स्थल पहुंचे थे श्रमिक
सहारनपुर। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश से लेकर अन्य राज्यों के प्रवासी श्रमिकों ने इस आश्रम स्थल में आकर आश्रय लिया था। क्वारंटीन समय और लॉकडाउन के समय प्रवासी श्रमिकों के परिवार यहीं पर रहे थे। बाद में शासन प्रशासन के निर्देश पर रोडवेज बसों से उन्हें उनके गंतव्यों के लिए भिजवाया गया था।
विज्ञापन