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कर्नाटक में भाजपा नेताओं पर एफआईआर: मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का आरोप; कई जिलों में मामले दर्ज
Sat, 03 Oct 2026 02:20 AM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, बेलगाम (कर्नाटक)
पीटीआई, बेलगाम (कर्नाटक)
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 03 Oct 2026 02:20 AM IST
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भाजपा नेता रवि पाटिल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता रवि पाटिल और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने बेलगावी जिले में 198 मुसलमान मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
आरोप है कि यह कोशिश जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 के जरिये की गई। इसके अलावा, कम से कम तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इनमें एक मामला मैसूर में भाजपा के स्थानीय नेता और अन्य लोगों के खिलाफ है।
एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके, उसके परिवार और मुस्लिम समुदाय के दूसरे लोगों के मतदाता सूची से हटाने की साजिश की गई। इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश की गई।
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बेलगावी में 198 नामों को लेकर क्या आरोप है?
रवि पाटिल के खिलाफ मामला बेलगावी मार्केट थाने में दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, यह प्राथमिकी 30 सितंबर को मीरासाब सनदी की शिकायत के बाद दर्ज हुई। सनदी बेलगावी उत्तर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 12 में भाजपा के बूथ लेवल एजेंट (बीएलओ) के तौर पर काम कर रहे थे।
प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने बताया कि वह 22 सितंबर को बीएलओ की मदद कर रहे थे। इसी दौरान आरोपी रवि पाटिल, शंकर बीरप्पा नाइक और प्रशांत दीपक मुंडिनमणि 20-25 अन्य लोगों के साथ वहां आए। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इन लोगों की खराब मंशा थी। उन्होंने केवल मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाने की साजिश की।
ये भी पढ़ें: शिवाजी पार्क में सीजेपी प्रदर्शन का विरोध: स्थानीय लोगों ने जताई आपत्ति; जावेद अख्तर ने क्यों किया व्यंग्य?
आरोप है कि 198 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इन्हें बीएलओ के पास जमा किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन दस्तावेजों को यह कहकर पेश किया गया कि वे असली हैं और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने जारी किए हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के साथ लाए गए फॉर्म-7 में शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों के नाम भी थे।
फॉर्म-7 क्या होता है?
फॉर्म-7 मौजूदा मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने या हटाने पर आपत्ति दर्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
प्राथमिकी के अनुसार, आरोपियों ने बीएलओ पर दबाव बनाया। उन्होंने एक दूसरे व्यक्ति से फोन पर बात भी कराई। उस व्यक्ति ने खुद को ईआरओ बताया। इसके बाद बीएलओ से हस्ताक्षर कराए गए। शिकायतकर्ता और मतदाताओं के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने बताया कि प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
बीदर में 3,244 मतदाताओं का क्या मामला है?
बीदर में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। भालकी के 40 वर्षीय कारोबारी और मतदाता मोहम्मद अतीक अहमद ने शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान फॉर्म-7 के जरिये 3,244 मतदाताओं को गलत तरीके से 'स्थानांतरित/अनुपस्थित' दिखाया गया। इनमें उनका नाम भी शामिल था। उनकी शिकायत के बाद 1 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज की गई। इसमें कथित अनियमितताओं के मामले में 32 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
मैसूर में क्या आरोप लगाया गया?
मैसूर में सामाजिक कार्यकर्ता सैयद हसरत उल्ला ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 में दावा किया गया कि वह और उनके परिवार के सदस्य अपने दर्ज पते पर नहीं रहते हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह और उनका परिवार कई वर्षों से इसी पते पर रह रहे हैं।
शिकायत के बाद नरसिम्हाराजा थाने में मामला दर्ज किया गया। इसमें हरीश कुमार सी, राघवेंद्र एम और भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अनिल थॉमस समेत अन्य लोगों के नाम हैं। आरोप है कि इन लोगों ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता, उसके परिवार और मुस्लिम समुदाय के अन्य लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की। शिकायत में कहा गया कि इससे समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची और समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश हुई।
बल्लारी में 7,561 फॉर्म-7 का मामला क्या है?
बल्लारी में भी एक प्राथमिकी दर्ज हुई है। यह मामला 1 अक्तूबर को ब्रूसपेट थाने में दर्ज किया गया। कांग्रेस के वार्ड नंबर 23 के बीएलए गौतम एस ने शिकायत की थी। उन्होंने चार लोगों के खिलाफ शिकायत की। इनमें भाजपा के बीएलए और बल्लारी नगर निगम के पार्षद श्रीनिवास मोटकर, बल्लारी सिटी कॉरपोरेशन के सहायक आयुक्त नंदीश, बीएलओ सुमलता और शरणबसवा शामिल हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि इन लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 7,561 फॉर्म-7 आवेदन जमा करने की साजिश की। यह आवेदन जारी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान दिए जाने का आरोप है।
दक्षिण कन्नड़ में भी सामने आई शिकायत
दक्षिण कन्नड़ जिले से भी ऐसी ही अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। कांग्रेस नेता रक्षित शिवराम ने आरोप लगाया कि बेलथंगडी विधानसभा क्षेत्र के 16 मतदान केंद्रों पर 279 फॉर्म-7 आवेदन जमा किए गए।
इन आवेदनों में मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी। इनमें उजिरे में मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाकर दिए गए 82 आवेदन भी शामिल थे। हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है।
कांग्रेस विधायक ने क्या आरोप लगाया?
इस बीच, कर्नाटक कांग्रेस के विधायक तनवीर सैत ने शुक्रवार को एक और आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जारी प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन जमा किए गए हैं। इन आवेदनों के जरिये उनके नरसिम्हाराजा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से करीब 10 हजार मुस्लिम और दलित मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई है।
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आरोप है कि यह कोशिश जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 के जरिये की गई। इसके अलावा, कम से कम तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इनमें एक मामला मैसूर में भाजपा के स्थानीय नेता और अन्य लोगों के खिलाफ है।
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एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके, उसके परिवार और मुस्लिम समुदाय के दूसरे लोगों के मतदाता सूची से हटाने की साजिश की गई। इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश की गई।
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बेलगावी में 198 नामों को लेकर क्या आरोप है?
रवि पाटिल के खिलाफ मामला बेलगावी मार्केट थाने में दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, यह प्राथमिकी 30 सितंबर को मीरासाब सनदी की शिकायत के बाद दर्ज हुई। सनदी बेलगावी उत्तर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 12 में भाजपा के बूथ लेवल एजेंट (बीएलओ) के तौर पर काम कर रहे थे।
प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने बताया कि वह 22 सितंबर को बीएलओ की मदद कर रहे थे। इसी दौरान आरोपी रवि पाटिल, शंकर बीरप्पा नाइक और प्रशांत दीपक मुंडिनमणि 20-25 अन्य लोगों के साथ वहां आए। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इन लोगों की खराब मंशा थी। उन्होंने केवल मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाने की साजिश की।
ये भी पढ़ें: शिवाजी पार्क में सीजेपी प्रदर्शन का विरोध: स्थानीय लोगों ने जताई आपत्ति; जावेद अख्तर ने क्यों किया व्यंग्य?
आरोप है कि 198 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इन्हें बीएलओ के पास जमा किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन दस्तावेजों को यह कहकर पेश किया गया कि वे असली हैं और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने जारी किए हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के साथ लाए गए फॉर्म-7 में शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों के नाम भी थे।
फॉर्म-7 क्या होता है?
फॉर्म-7 मौजूदा मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने या हटाने पर आपत्ति दर्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
प्राथमिकी के अनुसार, आरोपियों ने बीएलओ पर दबाव बनाया। उन्होंने एक दूसरे व्यक्ति से फोन पर बात भी कराई। उस व्यक्ति ने खुद को ईआरओ बताया। इसके बाद बीएलओ से हस्ताक्षर कराए गए। शिकायतकर्ता और मतदाताओं के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने बताया कि प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
बीदर में 3,244 मतदाताओं का क्या मामला है?
बीदर में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। भालकी के 40 वर्षीय कारोबारी और मतदाता मोहम्मद अतीक अहमद ने शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान फॉर्म-7 के जरिये 3,244 मतदाताओं को गलत तरीके से 'स्थानांतरित/अनुपस्थित' दिखाया गया। इनमें उनका नाम भी शामिल था। उनकी शिकायत के बाद 1 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज की गई। इसमें कथित अनियमितताओं के मामले में 32 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
मैसूर में क्या आरोप लगाया गया?
मैसूर में सामाजिक कार्यकर्ता सैयद हसरत उल्ला ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 में दावा किया गया कि वह और उनके परिवार के सदस्य अपने दर्ज पते पर नहीं रहते हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह और उनका परिवार कई वर्षों से इसी पते पर रह रहे हैं।
शिकायत के बाद नरसिम्हाराजा थाने में मामला दर्ज किया गया। इसमें हरीश कुमार सी, राघवेंद्र एम और भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अनिल थॉमस समेत अन्य लोगों के नाम हैं। आरोप है कि इन लोगों ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता, उसके परिवार और मुस्लिम समुदाय के अन्य लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की। शिकायत में कहा गया कि इससे समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची और समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश हुई।
बल्लारी में 7,561 फॉर्म-7 का मामला क्या है?
बल्लारी में भी एक प्राथमिकी दर्ज हुई है। यह मामला 1 अक्तूबर को ब्रूसपेट थाने में दर्ज किया गया। कांग्रेस के वार्ड नंबर 23 के बीएलए गौतम एस ने शिकायत की थी। उन्होंने चार लोगों के खिलाफ शिकायत की। इनमें भाजपा के बीएलए और बल्लारी नगर निगम के पार्षद श्रीनिवास मोटकर, बल्लारी सिटी कॉरपोरेशन के सहायक आयुक्त नंदीश, बीएलओ सुमलता और शरणबसवा शामिल हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि इन लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 7,561 फॉर्म-7 आवेदन जमा करने की साजिश की। यह आवेदन जारी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान दिए जाने का आरोप है।
दक्षिण कन्नड़ में भी सामने आई शिकायत
दक्षिण कन्नड़ जिले से भी ऐसी ही अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। कांग्रेस नेता रक्षित शिवराम ने आरोप लगाया कि बेलथंगडी विधानसभा क्षेत्र के 16 मतदान केंद्रों पर 279 फॉर्म-7 आवेदन जमा किए गए।
इन आवेदनों में मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी। इनमें उजिरे में मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाकर दिए गए 82 आवेदन भी शामिल थे। हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है।
कांग्रेस विधायक ने क्या आरोप लगाया?
इस बीच, कर्नाटक कांग्रेस के विधायक तनवीर सैत ने शुक्रवार को एक और आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जारी प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन जमा किए गए हैं। इन आवेदनों के जरिये उनके नरसिम्हाराजा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से करीब 10 हजार मुस्लिम और दलित मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई है।