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कागजों में खोल दी बाढ़ राहत चौकियां, राम भरोसे है व्यवस्था
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बाढ़ सुरक्षा चौकी बरथा कोरसी पर लटका ताला
- फोटो : SAHARANPUR
कागजों में खोल दी बाढ़ राहत चौकियां, राम भरोसे है व्यवस्था
सहारनपुर। जिले के नदियों के किनारे बसे ग्रामीणों को बाढ़ आने की दशा में बचाने के लिए प्रशासन द्वारा इस साल 25 बाढ़ राहत चौकियों की स्थापना कर उन पर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। लेकिन यह सब कवायद कागजों में ही की जा रही है। अमर उजाला ने बुधवार को बाढ़ चौकियों की पड़ताल की तो प्रशासन के दावे नजर पूरे होते नहीं मिले।
बाढ़ को लेकर सबसे संवेदनशील क्षेत्र बेहट तहसील की बाढ़ राहत चौकियों पर ताले लटके मिले। हैरत की बात तो यह है कि बाढ़ राहत चौकियों के ड्यूटी चार्ट में दर्शाए गए कई कर्मचारियों को यह तक नहीं पता कि उनकी ड्यूटी बाढ़ राहत में लगी भी है। गागलहेड़ी में तो प्रभारी बाढ़ राहत चौकी की लोकेशन तक नहीं बता सके। ऐसे में बाढ़ से बचाव राम भरोसे ही है।
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कर्मचारियों को पता नहीं बाढ़ चौकी पर है ड्यूटी
नकुड़। तहसील कार्यालय, नकुड़ के गांव टाबर व रानीपुर बरसी, सरसावा के गांव कुतुबपुर व सरसावा, गंगोह के गांव लखनौती व ढलावली सहित सात कंट्रोल रूम तथा सात शरण स्थल बनाए हैं। इन पर 54 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जब इन चौकियों का भ्रमण किया तो रानीपुर बरसी के शिव मंदिर तथा टाबर के प्राइमरी स्कूल में बनाई चौकी पर कोई कर्मचारी नहीं मिला। टाबर की ड्यूटी में दर्शाए गए डॉ. घनश्याम से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि उन्हें बाढ़ चौकी की ड्यूटी की जानकारी नहीं है, वैसे भी उनकी ड्यूटी कांवड़ शिविर में लगी है। दूसरे कर्मचारी लेखपाल देवेंद्र शर्मा ने भी बाढ़ चौकी पर लगाई गई ड्यूटी की जानकारी होने इंकार किया। जबकि रानीपुर बरसी की चौकी पर दर्शाए गए डॉ. सुलेख चंद का मोबाइल फोन बंद मिला।
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ताले लटके मिले बाढ़ राहत चौकियों पर
बेहट। बाढ़ से निपटने के लिए बेहद संवेदनशील तहसील बेहट क्षेत्र में प्रशासन ने बरथा कोरसी, नुनियारी, धौलरा, कस्बागढ़, हबीबपुर तपोवन, हैदरपुर उर्फ हिंदूवाला, अलीपुर नौगांवा, जैतपुर खुर्द, कोठड़ी भागमल, कालूवाला जहानपुर व खैरी मढ़ती आदि 11 चौकियां स्थापित की हैं। प्रशासन का दावा है कि चौकी पर प्रभारी समेत पांच कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन ये चौकियां कागजों तक ही सीमित हैं। हकीकत में कहीं कोई चौकी नहीं है और न ही कहीं कोई कर्मचारी ड्यूटी कर रहा। ज्यादातर चौकियां प्राथमिक विद्यालय में बनाई गई है। बुधवार को जब पड़ताल की गई, तो बाढ़ से निपटने के प्रशासनिक दावे हवाई साबित हुए। बरथा कोरसी, कालूवाला जहानपुर, अलीपुरा नौगांवा, खैरी मढ़ती आदि में ताले लटके थे। तहसीलदार बेहट प्रकाश सिंह ने बताया कि लगातार 24 घंटे कर्मचारी ड्यूटी नहीं कर सकते। जैसे ही बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है या फिर कोई सूचना मिलती है, कि नदियों में पानी बढ़ रहा है, तो तैनात कर्मचारी चौकी पर पहुंचते हैं।
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अधिकारी को ही पता नहीं बाढ़ राहत चौकी की लोकेशन
गागलहेड़ी में हिंडन नदी के किनारे बाढ़ राहत चौकी पर सिंचाई निर्माण खंड के जेई राहुल कुमार को तैनात किया गया है। जब राहुल कुमार से चौकी की लोकेशन की जानकारी ली गई तो वे नहीं बता सके कि चौकी कहां स्थापित है। उनका कहना था कि उन्हें बाढ़ राहत चौकी की पूरी जानकारी नहीं है। एसडीएम सदर किंशुक श्रीवास्तव का कहना है कि उनकी जानकारी में गागलहेड़ी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नहीं आता फिर भी वे सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बात करेंगी।
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सहारनपुर। जिले के नदियों के किनारे बसे ग्रामीणों को बाढ़ आने की दशा में बचाने के लिए प्रशासन द्वारा इस साल 25 बाढ़ राहत चौकियों की स्थापना कर उन पर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। लेकिन यह सब कवायद कागजों में ही की जा रही है। अमर उजाला ने बुधवार को बाढ़ चौकियों की पड़ताल की तो प्रशासन के दावे नजर पूरे होते नहीं मिले।
बाढ़ को लेकर सबसे संवेदनशील क्षेत्र बेहट तहसील की बाढ़ राहत चौकियों पर ताले लटके मिले। हैरत की बात तो यह है कि बाढ़ राहत चौकियों के ड्यूटी चार्ट में दर्शाए गए कई कर्मचारियों को यह तक नहीं पता कि उनकी ड्यूटी बाढ़ राहत में लगी भी है। गागलहेड़ी में तो प्रभारी बाढ़ राहत चौकी की लोकेशन तक नहीं बता सके। ऐसे में बाढ़ से बचाव राम भरोसे ही है।
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कर्मचारियों को पता नहीं बाढ़ चौकी पर है ड्यूटी
नकुड़। तहसील कार्यालय, नकुड़ के गांव टाबर व रानीपुर बरसी, सरसावा के गांव कुतुबपुर व सरसावा, गंगोह के गांव लखनौती व ढलावली सहित सात कंट्रोल रूम तथा सात शरण स्थल बनाए हैं। इन पर 54 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जब इन चौकियों का भ्रमण किया तो रानीपुर बरसी के शिव मंदिर तथा टाबर के प्राइमरी स्कूल में बनाई चौकी पर कोई कर्मचारी नहीं मिला। टाबर की ड्यूटी में दर्शाए गए डॉ. घनश्याम से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि उन्हें बाढ़ चौकी की ड्यूटी की जानकारी नहीं है, वैसे भी उनकी ड्यूटी कांवड़ शिविर में लगी है। दूसरे कर्मचारी लेखपाल देवेंद्र शर्मा ने भी बाढ़ चौकी पर लगाई गई ड्यूटी की जानकारी होने इंकार किया। जबकि रानीपुर बरसी की चौकी पर दर्शाए गए डॉ. सुलेख चंद का मोबाइल फोन बंद मिला।
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ताले लटके मिले बाढ़ राहत चौकियों पर
बेहट। बाढ़ से निपटने के लिए बेहद संवेदनशील तहसील बेहट क्षेत्र में प्रशासन ने बरथा कोरसी, नुनियारी, धौलरा, कस्बागढ़, हबीबपुर तपोवन, हैदरपुर उर्फ हिंदूवाला, अलीपुर नौगांवा, जैतपुर खुर्द, कोठड़ी भागमल, कालूवाला जहानपुर व खैरी मढ़ती आदि 11 चौकियां स्थापित की हैं। प्रशासन का दावा है कि चौकी पर प्रभारी समेत पांच कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन ये चौकियां कागजों तक ही सीमित हैं। हकीकत में कहीं कोई चौकी नहीं है और न ही कहीं कोई कर्मचारी ड्यूटी कर रहा। ज्यादातर चौकियां प्राथमिक विद्यालय में बनाई गई है। बुधवार को जब पड़ताल की गई, तो बाढ़ से निपटने के प्रशासनिक दावे हवाई साबित हुए। बरथा कोरसी, कालूवाला जहानपुर, अलीपुरा नौगांवा, खैरी मढ़ती आदि में ताले लटके थे। तहसीलदार बेहट प्रकाश सिंह ने बताया कि लगातार 24 घंटे कर्मचारी ड्यूटी नहीं कर सकते। जैसे ही बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है या फिर कोई सूचना मिलती है, कि नदियों में पानी बढ़ रहा है, तो तैनात कर्मचारी चौकी पर पहुंचते हैं।
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अधिकारी को ही पता नहीं बाढ़ राहत चौकी की लोकेशन
गागलहेड़ी में हिंडन नदी के किनारे बाढ़ राहत चौकी पर सिंचाई निर्माण खंड के जेई राहुल कुमार को तैनात किया गया है। जब राहुल कुमार से चौकी की लोकेशन की जानकारी ली गई तो वे नहीं बता सके कि चौकी कहां स्थापित है। उनका कहना था कि उन्हें बाढ़ राहत चौकी की पूरी जानकारी नहीं है। एसडीएम सदर किंशुक श्रीवास्तव का कहना है कि उनकी जानकारी में गागलहेड़ी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नहीं आता फिर भी वे सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बात करेंगी।

कालूवाला जहानपुर की बाढ़ चौकी पर लटका ताला- फोटो : SAHARANPUR

प्राथमिक विद्यालय अलीपुरा नौगांवा में बनाई बाढ़ चौकी पर लगा ताला- फोटो : SAHARANPUR

सूनी पड़ी बाढ़ चौकी खैरी मढ़ती, कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं- फोटो : SAHARANPUR