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जल्द आएगा पांच हजार मीट्रिक टन यूरिया, किसानों को मिलेगी राहत

Sat, 04 Dec 2021 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 04 Dec 2021 11:24 PM IST
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Five thousand metric tons of urea will come soon, farmers will get relief
सहारनपुर। यूरिया की किल्लत से जूझ रहे किसानों को जल्द ही राहत मिलेगी। जनपद में शीघ्र ही पांच हजार मीट्रिक टन यूरिया की दो रैक आने वाली हैं। यूरिया की कमी से कई सहकारी समितियों से जुडे़ किसानों के सामने समस्या आ रही है।
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जनपद में रबी फसलों में गेहूं, सरसों, मसूर, चना, सहित अन्य फसलों की खेती होती है। इसमें सबसे अधिक खेती गेहूं की होती है। जिले में करीब 1.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की खेती होती है। किसान पहली सिंचाई करने के बाद गेहूं की फसल में यूरिया सहित अन्य पोषक तत्व डालते हैं। जिससे गेहूं की फसल में अच्छा फुटाव हो सके। इस समय 60 हजार हेक्टेयर गेहूं के क्षेत्रफल में यूरिया डालने की जरूरत है। कई किसानों को समय पर यूरिया नहीं मिल पा रहा है। इसका गेहूं की फसल पर विपरीत असर पडे़गा। समय पर नाइट्रोजन नहीं मिलने से गेहूूं की फसल में पर्याप्त फुटाव नहीं हो सकेगा। इसका सीधा असर गेहूं के उत्पादन पर पड़ेगा। यूरिया को छोड़कर डीएपी और एनपीके आदि उर्वरकों का स्टॉक जनपद में पर्याप्त है।
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वर्जन
जिले में अभी 1200 मीट्रिक टन यूरिया बफर स्टॉक में हैं। जिन सहकारी समितियों कमी है, इनमें एक एक ट्रक यूरिया भेजा जा रहा है। जनपद के किसी भी क्षेत्र में यूरिया की कमी ना रहे। एक दो दिन में ही पांच हजार मीट्रिक टन की दो रैक यूरिया की आ जाएंगी। - धीरज कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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बोले किसान-
यूरिया समय पर नहीं मिलने से किसान परेशान
गांव कातला निवासी किसान सुखपाल सिंह का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल में यूरिया डालने की आवश्यकता है। लेकिन यूरिया समय पर नहीं मिलने से किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। फसल में समय पर यूरिया नहीं डाला तो गेहूं की उत्पादकता प्रभावित होगी।

समिति में यूरिया नहीं होने से हो रही परेशानी
साढ़ौली कदीम के गांव चक खीजरपुर निवासी किसान सुखदेव सिंह का कहना है कि वे यूरिया लेने के लिए कई दिनों से समितियों का चक्कर काट रहे हैं। समिति में यूरिया नहीं होने से परेशानी हो रही है। इस समय गेहूं, सरसों सहित अन्य रबी फसलों को यूरिया की जरूरत है।
जनपद में उर्वरकों की स्थिति
यूरिया --- 1200 मीट्रिक टन
एनपीके --- 1985 मीट्रिक टन
डीएपी ---- 1450 मीट्रिक टन
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