यूपी: मौत बनकर कहर बरपा रहीं पटाखा फैक्टरियां, जिले में फिर हुआ बड़ा हादसा, दो की गई जान
जिले में अवैध रूप से चल रहीं पटाखा फैक्टरियां मौत बनकर कहर बरपा रहीं हैं। अब जिले में फिर से एक बड़ा हादसा हो गया, जिसमें दो की जान चल गई।
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में अवैध रूप से और मानकों को पूरा किए बिना पटाखा फैक्टरियां संचालित हो रही हैं। पहले भी कई बार पटाखा फैक्टरियां कहर बरपा चुकी हैं, जिसमें कई लोगों की जान भी जा चुकी है। वहीं रविवार को भी जिले में एक पटाखा फैक्टरी में भीषण आग लग गई, जिसमें दो की जान चली गई।
रविवार को कोतवाली गंगोह के गांव बोड़पुर में अवैध रूप से संचालित हो रही पटाखा फैक्टरी में धमाका होने के बाद लगी आग में दो बच्चों सहित चार लोग झुलस गए। इसी तरह जिले में पहले भी कई बार पटाखा फैक्टरियों में हादसे हो चुके हैं, जिसमें कई लोगों की जान जा चुकी है। दीपावली नजदीक होने की वजह से पटाखा कारोबारियों ने बड़े पैमाने पर आतिशबाजी बनाना शुरू कर दिया है, जिनका स्टॉक किया जा रहा है, लेकिन मानकों को पूरा किए बिना फैक्टरियां संचालित हो रही हैं।
जिले में गंगोह, सरसावा, देवबंद, बिहारीगढ़ और महानगर में चिलकाना रोड, बेहट रोड, मोहल्ला आतिशबाजान में कई बार अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्टरी पकड़ी जा चुकी हैं। इसके बावजूद चोरी-छिपे कई इलाकों में अब भी फैक्टरियां संचालित हो रही है। सीएफओ तेजवीर सिंह का कहना है कि विभाग की ओर से चेकिंग अभियान चल रहा है, जो फैक्टरियां लाइसेंसी है, वहां पर सभी मानक पूरे कराए जा रहे हैं। इसके अलावा अवैध फैक्टरियों को पकड़ने के लिए विभाग की टीमें लगी हैं।
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यहां हो चुके हैं बड़े हादसे
- सरसावा क्षेत्र के गांव गोविंदपुर में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट होने से पांच लोगों की मौत हुई थी।
- एकता कॉलोनी में अवैध रूप से घर में बनाए जा रहे सुतली बमों में आग लगने से तीन लोग झुलसे थे।
- मानकमऊ अवैध रूप से बनाए जा रहे आतिशबाजी में आग लगने से दो लोगों की मौत हुई थी।
- मोहल्ला आतिशबाजान में घर में आतिशबाजी बनाते समय धमाका हुआ था और तीन लोगों की जान गई थी।
- बिहारीगढ़ क्षेत्र के गांव सतपुरा में पटाखा फैक्टरी में तीन बार हादसे हो चुके हैं।
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इन मानकों को करना होता है पूरा
पटाखा फैक्टरी में कई मानकों को पूरा करना होता है। इसके तहत फैक्टरी में बिजली का कनेक्शन नहीं होना चाहिए। आग बुझाने को हर समय रेत की व्यवस्था और अग्निशमन यंत्र लगे हों। फैक्टरी परिसर में पानी के लिए हौज बनी होनी चाहिए। 18 वर्ष की उम्र से कम का कोई श्रमिक कार्यरत न हो। फैक्टरी आबादी से दूर होनी चाहिए।