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शिक्षकों के लिए चुनौती बना प्रेरणा साथी तलाशना
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सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के पठन पाठन में सहयोग के लिए प्रेरणा साथी तलाशना चुनौती बना हुआ है। ई-पाठशाला.0 के पांचवें चरण के तहत प्रत्येेक गांव या मोहल्लों में प्रेरणा साथी चुनने हैं, इस पर काम शुरू हो गया है, लेकिन अभी प्रेरणा साथी बनने को बहुत लोग तैयार नहीं हो रहे हैं।
कोरोना के चलते विद्यालय बंद होने के बाद पठन पाठन का तरीका बदला है। ई-पाठशाला चलाकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के प्रयास किए हैं। ई-पाठशाला के कई चरण चले हैं। वर्तमान में ई-पाठशाला का पांचवां चरण चल रहा है, इसे ई-पाठशाला.0 का नाम दिया है। सरकार का मानना है कि रेडियो और दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले शैक्षिक कार्यक्रमों का लाभ शत प्रतिशत बच्चों तक नहीं पहुंच रहा है, क्योंकि शत प्रतिशत बच्चों के पास टीवी, रेडियो और स्मार्ट फोन नहीं हैं। ऐसे में सरकार ने पांचवें चरण में प्रत्येक गांव या मोहल्ले में कम से कम एक-एक प्रेरणा साथी बनाने के निर्देश दिए हैं।
खास बात यह है कि प्रेरणा साथी स्वयंसेवी होगा, जो स्वेच्छा से काम करेगा। प्रेरणा साथी का काम होगा कि शिक्षा विभाग द्वारा मुहैया शैक्षिक कार्यक्रमों की वीडियो अपने स्मार्ट फोन के जरिए आसपास के बच्चों को इकट्ठा कर दिखानी हैं, ताकि कोई भी बच्चा उक्त कार्यक्रमों से अछूता न रहे और उसका पठन पाठन जारी रह सके। प्रेरणा साथी को विभाग से कोई सुविधा या खर्च नहीं मिलेगा। स्मार्ट फोन भी उसका होगा और डाटा भी वह अपना ही खर्च करेगा। ऐसे में शिक्षकों के लिए प्रेरणा साथी तलाशना मुश्किल हो रहा है। जनपद में अभी तक बहुत कम संख्या में प्रेरणा साथी बने हैं।
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प्रेरणा साथी का होगा पंजीकरण
शिक्षक जिस व्यक्ति का चयन प्रेरणा साथी के रूप में करेंगे। पोर्टल पर उसका पंजीकरण करना होगा, इसमें उसका नाम, पिता का नाम, पता और फोन नंबर आदि जानकारी भरी जाएंगी। बिना किसी स्वार्थ के प्रेरणा साथी बनने के लिए लोग पंजीकरण से बच रहे हैं।
काम की होगी समीक्षा
शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि जो भी प्रेरणा साथी बनेंगे। उनके कार्य की समीक्षा की जाए। उन्होंने सप्ताह या महीने में कितनी बार बच्चों को वीडियो दिखाई इसके बारे में पूछा जाए और रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाए।
वर्जन
जिन बच्चों के घरों में स्मार्ट फोन या डाटा नहीं है। ऐसे बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने के लिए विद्यालयों के आसपास के क्षेत्रों में प्रेरणा साथी बनाए जा रहे हैं। जनपद में अनेक शिक्षकों ने प्रेरणा साथी बना भी लिए हैं। - योगराज सिंह, एडी बेसिक, सहारनपुर।
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कोरोना के चलते विद्यालय बंद होने के बाद पठन पाठन का तरीका बदला है। ई-पाठशाला चलाकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के प्रयास किए हैं। ई-पाठशाला के कई चरण चले हैं। वर्तमान में ई-पाठशाला का पांचवां चरण चल रहा है, इसे ई-पाठशाला.0 का नाम दिया है। सरकार का मानना है कि रेडियो और दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले शैक्षिक कार्यक्रमों का लाभ शत प्रतिशत बच्चों तक नहीं पहुंच रहा है, क्योंकि शत प्रतिशत बच्चों के पास टीवी, रेडियो और स्मार्ट फोन नहीं हैं। ऐसे में सरकार ने पांचवें चरण में प्रत्येक गांव या मोहल्ले में कम से कम एक-एक प्रेरणा साथी बनाने के निर्देश दिए हैं।
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खास बात यह है कि प्रेरणा साथी स्वयंसेवी होगा, जो स्वेच्छा से काम करेगा। प्रेरणा साथी का काम होगा कि शिक्षा विभाग द्वारा मुहैया शैक्षिक कार्यक्रमों की वीडियो अपने स्मार्ट फोन के जरिए आसपास के बच्चों को इकट्ठा कर दिखानी हैं, ताकि कोई भी बच्चा उक्त कार्यक्रमों से अछूता न रहे और उसका पठन पाठन जारी रह सके। प्रेरणा साथी को विभाग से कोई सुविधा या खर्च नहीं मिलेगा। स्मार्ट फोन भी उसका होगा और डाटा भी वह अपना ही खर्च करेगा। ऐसे में शिक्षकों के लिए प्रेरणा साथी तलाशना मुश्किल हो रहा है। जनपद में अभी तक बहुत कम संख्या में प्रेरणा साथी बने हैं।
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प्रेरणा साथी का होगा पंजीकरण
शिक्षक जिस व्यक्ति का चयन प्रेरणा साथी के रूप में करेंगे। पोर्टल पर उसका पंजीकरण करना होगा, इसमें उसका नाम, पिता का नाम, पता और फोन नंबर आदि जानकारी भरी जाएंगी। बिना किसी स्वार्थ के प्रेरणा साथी बनने के लिए लोग पंजीकरण से बच रहे हैं।
काम की होगी समीक्षा
शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि जो भी प्रेरणा साथी बनेंगे। उनके कार्य की समीक्षा की जाए। उन्होंने सप्ताह या महीने में कितनी बार बच्चों को वीडियो दिखाई इसके बारे में पूछा जाए और रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाए।
वर्जन
जिन बच्चों के घरों में स्मार्ट फोन या डाटा नहीं है। ऐसे बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने के लिए विद्यालयों के आसपास के क्षेत्रों में प्रेरणा साथी बनाए जा रहे हैं। जनपद में अनेक शिक्षकों ने प्रेरणा साथी बना भी लिए हैं। - योगराज सिंह, एडी बेसिक, सहारनपुर।