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मुश्किल दौर में भी ऋण अदा करने में आगे रहे जिले के किसान

Sat, 05 Sep 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2020 11:54 PM IST
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Farmers of the district were ahead in repaying loans even in difficult times
सहारनपुर। एक तरफ खेती से किसानों ने देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा दिया है तो सहकारी समितियों और बैंकों से लिया ऋण अदा करने में भी बड़ा दिल दिखाया है। सिर्फ सहकारी समितियों का ही करीब 81.5 प्रतिशत ऋण किसानों ने जमा कराया है, जो करीब 574 करोड़ रुपये बनता है। बैंकों के अन्य ऋण इससे अलग हैं।
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साधन सहकारी समितियां किसानों को उर्वरक, बीज, कीटनाशक के साथ ही फसल में लागत लगाने के लिए ऋण भी देती हैं। इस ऋण को छमाही आधार पर जमा कराया जाता है। ऋण को जमा करने के बाद किसान दोबारा ऋण ले सकता है। जिले में 114 साधन सहकारी समितियां हैं। जिनमें 1.65 लाख किसान सदस्य हैं। किसी भी किसान को ऋण लेने या क्रेडिट पर उर्वरक आदि लेने के लिए सहकारी समिति का सदस्य बनना आवश्यक है। किसान की ऋण की लिमिट उसकी जमीन के क्षेत्रफल के आधार पर तय होती है। कोरोना काल में भी किसानों ने बड़ी शिद्दत से सहकारी समितियों के ऋण की वापसी की। इस बार गत वर्ष की तुलना में अधिक ऋण लौटाया गया। पिछले वर्ष जिले के किसानों पर करीब 740 करोड़ रुपये की डिमांड थी, जबकि गत वर्ष 31 अगस्त तक किसानों ने इस डिमांड का 76.6 प्रतिशत ही जमा कराया था, जबकि इस बार यह आंकडा 81.5 प्रतिशत है।
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3.43 लाख हैं केसीसी
जिले में विभिन्न बैंकों की 326 शाखाएं हैं। इन बैंक शाखाओं से किसानों के करीब 3.43 लाख किसान क्रेडिट कार्ड बने हुए हैं। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिये भी किसानों द्वारा कृषि यंत्र खरीदने या अन्य जरूरत के हिसाब से ऋण लिया जाता है। जिले में करीब 850 करोड़ रुपये केसीसी पर ऋण के रूप में बैंकों द्वारा किसानों को दिया हुआ है। लीड बैंक मैनेजर राजेश चौधरी का कहना है कि किसान क्रेडिट कार्डों पर लिए ऋण के सापेक्ष किसानों ने ऋण जमा कराया है, लेकिन कितना जमा कराया है, इसका ब्यौरा जुटाना होगा।
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जिला निबंधक सहकारिता अशोक कुमार ने बताया कि इस बार जनपद के किसानों पर 705 करोड़ रुपये की डिमांड (ऋण एवं बकाया) लगी हुई थी। इसमें से 31 अगस्त तक किसानों ने डिमांड का 81.5 प्रतिशत सहकारी समितियों में जमा करा दिया है, जबकि गत वर्ष रिकवरी रेट 76.6 फीसदी ही रहा था।
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