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गायब हो रही जरूरी दवाएं, दाम में भारी उछाल
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सहारनपुर। कोरोना संक्रमण के साथ ही अन्य बीमारियों के मरीजों को जरूरी दवाएं आसानी से नहीं मिल पा रही हैं। बाजार में दवाओं की किल्लत बनी हुई है। मेडिकल स्टोर संचालक कहते हैं कि ऊपर से माल कम आ रहा है। ऐसे में मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशान होना पड़ रहा है।
शहर के तमाम मेडिकल स्टोर पर दिन भर दवाएं खरीदने वालों की भीड़ है। कोई पैरासिटामोल खरीदने पहुंच रहा है तो कोई जिंकोविट। चूंकि इन दिनों खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज भी बढ़ गए हैं तो इन बीमारियों के होने पर लोगों को कोरोना संक्रमण का भी भय बना रहता है। इस कारण लोग चिकित्सक की सलाह पर मेडिकल स्टोरों से इन दवाओं को खरीदने पहुंच रहे हैं, लेकिन तेजी से बढ़ी डिमांड के चलते या तो दवाएं मिल नहीं पा रही हैं या फिर महंगे दाम पर खरीदनी पड़ रही हैं।
--- तीन गुना दाम पर भी नहीं मिल रहा फ्लो मीटर
जो कोरोना संक्रमित होम आइसोलेशन में हैं और उन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता है तो उनके सामने फ्लो मीटर भी बड़ी समस्या बन गया है। मरीज के तीमारदार जैसे तैसे ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था करते हैं तो फ्लो मीटर नहीं मिल पा रहा है। पूर्व में फ्लो मीटर 600 रुपये तक बिकता था, लेकिन अब यह तीन गुना ज्यादा दाम पर भी आसानी से नहीं मिल पा रहा है। इसी तरह 600 से 900 रुपये में बिकने वाला पल्स ऑक्सीमीटर भी 400 से 500 रुपये महंगा हो गया है।
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--- एक संस्था ने सोशल मीडिया पर चलाई अपील
सामाजिक संस्था हेड्स टू केयर ने फेसबुक और अन्य माध्यम से अभियान चलाया। लोगों से अपील की कि जिन्होंने पूर्व में फ्लो मीटर खरीदे थे और अब उनका उपयोग नहीं हो रहा है, वह फ्लो मीटर उपलब्ध कराएं, ताकि जरूरतमंदों को मिल सकें। संस्था के अध्यक्ष परम बत्रा का कहना है कि इस अपील के बाद कई लोगों ने फ्लो मीटर उपलब्ध भी कराए, जिन्हें जरूरतमंदों तक पहुंचाया गया।
दवा विक्रेताओं का कहना, कम आ रहीं दवाएं
किशनपुरा में दवा विक्रेता सुशील कुमार का कहना है कि कई तरह की दवाएं बहुत कम आ रही हैं। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर तो मिल ही नहीं रहा। इसी तरह दवा कारोबारी राजू बावेजा का कहना है कि पीछे से ही डिमांड के अनुसार दवाएं और सर्जिकल सामान नहीं मिल पा रहा है।
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शहर के तमाम मेडिकल स्टोर पर दिन भर दवाएं खरीदने वालों की भीड़ है। कोई पैरासिटामोल खरीदने पहुंच रहा है तो कोई जिंकोविट। चूंकि इन दिनों खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज भी बढ़ गए हैं तो इन बीमारियों के होने पर लोगों को कोरोना संक्रमण का भी भय बना रहता है। इस कारण लोग चिकित्सक की सलाह पर मेडिकल स्टोरों से इन दवाओं को खरीदने पहुंच रहे हैं, लेकिन तेजी से बढ़ी डिमांड के चलते या तो दवाएं मिल नहीं पा रही हैं या फिर महंगे दाम पर खरीदनी पड़ रही हैं।
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--- तीन गुना दाम पर भी नहीं मिल रहा फ्लो मीटर
जो कोरोना संक्रमित होम आइसोलेशन में हैं और उन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता है तो उनके सामने फ्लो मीटर भी बड़ी समस्या बन गया है। मरीज के तीमारदार जैसे तैसे ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था करते हैं तो फ्लो मीटर नहीं मिल पा रहा है। पूर्व में फ्लो मीटर 600 रुपये तक बिकता था, लेकिन अब यह तीन गुना ज्यादा दाम पर भी आसानी से नहीं मिल पा रहा है। इसी तरह 600 से 900 रुपये में बिकने वाला पल्स ऑक्सीमीटर भी 400 से 500 रुपये महंगा हो गया है।
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--- एक संस्था ने सोशल मीडिया पर चलाई अपील
सामाजिक संस्था हेड्स टू केयर ने फेसबुक और अन्य माध्यम से अभियान चलाया। लोगों से अपील की कि जिन्होंने पूर्व में फ्लो मीटर खरीदे थे और अब उनका उपयोग नहीं हो रहा है, वह फ्लो मीटर उपलब्ध कराएं, ताकि जरूरतमंदों को मिल सकें। संस्था के अध्यक्ष परम बत्रा का कहना है कि इस अपील के बाद कई लोगों ने फ्लो मीटर उपलब्ध भी कराए, जिन्हें जरूरतमंदों तक पहुंचाया गया।
दवा विक्रेताओं का कहना, कम आ रहीं दवाएं
किशनपुरा में दवा विक्रेता सुशील कुमार का कहना है कि कई तरह की दवाएं बहुत कम आ रही हैं। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर तो मिल ही नहीं रहा। इसी तरह दवा कारोबारी राजू बावेजा का कहना है कि पीछे से ही डिमांड के अनुसार दवाएं और सर्जिकल सामान नहीं मिल पा रहा है।