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शिक्षा में तकनीक की जरूरत पर बल
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 29 Feb 2016 01:00 AM IST
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जेवी जैन महाविद्यालय में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन शिक्षक प्रशिक्षकों को अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य और बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के सापेक्ष कौशल विकास किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
संगोष्ठी का प्रारंभ तकनीकी सत्र से हुआ। जिसमें शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने प्रतिभाग किया। प्राचार्य डा. जेपी सिंघल ने कहा कि अनुशासन, लग्न, उत्तरदायित्व की भावना, समय प्रबंधन के महत्व को शिक्षक को समझना होगा। इसके बाद तकनीकी सत्र में समावेशी शिक्षा के लिए शिक्षक निर्माण के संदर्भ में शोधार्थियों और शिक्षकों ने अपने शोध पत्र पढ़े।
विषय विशेषज्ञ डा. डीके शर्मा एवं सत्र संचालक डा. नीता कौशिक ने समावेशी शिक्षा के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण काल से विशिष्ट पाठ्यक्रम उपलब्ध कराये जाने और शिक्षकों में उपयुक्त विकास के महत्व को दर्शाया। डा. निरंजना, डा. धर्मेंद्र कुमार और डा. संजीव तोमर ने जानकारी दी।
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अंतिम सत्र में सत्र विशेषज्ञ डा. गिरीश पचौरी ने शिक्षक शिक्षा में जीवन कौशल विकास विषय पर प्रस्तुत शोध पत्रों को प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता डा. शुभ्रा चतुर्वेदी ने बताया कि प्रतिभागियों ने तकनीकी सत्रों में 150 पत्र प्रस्तुत किए। डा. सुरक्षापाल ने शिक्षक शिक्षा के ज्वलंत मुद्दों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट किया।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के प्रोफेसर डा. उमेंद्र मलिक ने शिक्षक प्रशिक्षकों को अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य एवं बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के सापेक्ष कौशल विकास किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया। कोटद्वार से आए डा. दिनेश मोहन शर्मा, दिल्ली से आए डा. रहमान मुसव्विर, साधना शर्मा, डा. गिरीश पचौरी आदि ने भी विचार रखे। संचालन अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डा. ममता सिंघल ने किया।
संयोजक डा. कांशीराम शर्मा, प्रबंध समिति सचिव मोहित जैन, डा. डीके शर्मा, डा. नीता कौशिक, डा. धमेंद्र कुमार, डा. हरिओम गुप्ता, डा. मनु गुप्ता, डा. विनोद कुमार, डा. वकुल बंसल, डा. संदीप गुप्ता, डा. हरवीर सिंह चौधरी, सुनील जैन आदि का सहयोग रहा।
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संगोष्ठी का प्रारंभ तकनीकी सत्र से हुआ। जिसमें शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने प्रतिभाग किया। प्राचार्य डा. जेपी सिंघल ने कहा कि अनुशासन, लग्न, उत्तरदायित्व की भावना, समय प्रबंधन के महत्व को शिक्षक को समझना होगा। इसके बाद तकनीकी सत्र में समावेशी शिक्षा के लिए शिक्षक निर्माण के संदर्भ में शोधार्थियों और शिक्षकों ने अपने शोध पत्र पढ़े।
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विषय विशेषज्ञ डा. डीके शर्मा एवं सत्र संचालक डा. नीता कौशिक ने समावेशी शिक्षा के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण काल से विशिष्ट पाठ्यक्रम उपलब्ध कराये जाने और शिक्षकों में उपयुक्त विकास के महत्व को दर्शाया। डा. निरंजना, डा. धर्मेंद्र कुमार और डा. संजीव तोमर ने जानकारी दी।
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अंतिम सत्र में सत्र विशेषज्ञ डा. गिरीश पचौरी ने शिक्षक शिक्षा में जीवन कौशल विकास विषय पर प्रस्तुत शोध पत्रों को प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता डा. शुभ्रा चतुर्वेदी ने बताया कि प्रतिभागियों ने तकनीकी सत्रों में 150 पत्र प्रस्तुत किए। डा. सुरक्षापाल ने शिक्षक शिक्षा के ज्वलंत मुद्दों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट किया।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के प्रोफेसर डा. उमेंद्र मलिक ने शिक्षक प्रशिक्षकों को अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य एवं बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के सापेक्ष कौशल विकास किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया। कोटद्वार से आए डा. दिनेश मोहन शर्मा, दिल्ली से आए डा. रहमान मुसव्विर, साधना शर्मा, डा. गिरीश पचौरी आदि ने भी विचार रखे। संचालन अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डा. ममता सिंघल ने किया।
संयोजक डा. कांशीराम शर्मा, प्रबंध समिति सचिव मोहित जैन, डा. डीके शर्मा, डा. नीता कौशिक, डा. धमेंद्र कुमार, डा. हरिओम गुप्ता, डा. मनु गुप्ता, डा. विनोद कुमार, डा. वकुल बंसल, डा. संदीप गुप्ता, डा. हरवीर सिंह चौधरी, सुनील जैन आदि का सहयोग रहा।