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Saharanpur News: भुगतान न होने पर ठेकेदार ने प्राचार्य कक्ष के बाहर दिया धरना
Thu, 23 Mar 2023 11:43 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 23 Mar 2023 11:43 PM IST
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में धरने पर बैठे ठेकेदार
सहारनपुर/सरसावा। कोरोना काल में राजकीय मेडिकल कॉलेज स्टाफ को खाना सप्लाई कराने वाले ठेकेदार का भुगतान नहीं हुआ है। जिसके चलते बृहस्पतिवार को ठेकेदार ने प्राचार्य कक्ष के बाहर धरना दिया। 23 लाख रुपये से अधिक के भुगतान की फाइल दबाने का आरोप लगाया है।
ठेकेदार शमीम ने बताया कि उसकी रजिस्टर्ड फर्म एआई इंडिया ने राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में कोरोना काल में तीनों समय भोजन की सप्लाई का कार्य किया था, जिसमें उसका बिल 22 लाख 71 हजार छह रुपये बैठता है। इस विषय में ठेकेदार ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को कई पत्र लिखे हैं।
उसके भुगतान संबंधित फाइल एनआरएचएम, जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी आदि जगह से पास होने के बाद ऑडिट में भी पास हो चुकी है। अब राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन को उसकी फाइल भुगतान के लिए जिला अस्पताल भेजनी है, लेकिन, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य बीते डेढ़ साल से फाइल को अपने दफ्तर में दबाए बैठे हैं। ठेकेदार का कहना है कि उसने उधार लेकर कोरोना काल में खाने की पूर्ति कराई थी।
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ठेकेदार के बिलों में विसंगतियां पाई गई हैं, जिनकी जांच की गई थी। ठेकेदार से पुराने भुगतान के बिल मांगे गए थे, जो उन्होंने उपलब्ध नहीं कराए हैं। पूर्व में निर्गत भुगतान और पूर्व में प्राप्त बिलों का परीक्षण करना बेहद जरूरी है।
- डॉ. अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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ठेकेदार शमीम ने बताया कि उसकी रजिस्टर्ड फर्म एआई इंडिया ने राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में कोरोना काल में तीनों समय भोजन की सप्लाई का कार्य किया था, जिसमें उसका बिल 22 लाख 71 हजार छह रुपये बैठता है। इस विषय में ठेकेदार ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को कई पत्र लिखे हैं।
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उसके भुगतान संबंधित फाइल एनआरएचएम, जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी आदि जगह से पास होने के बाद ऑडिट में भी पास हो चुकी है। अब राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन को उसकी फाइल भुगतान के लिए जिला अस्पताल भेजनी है, लेकिन, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य बीते डेढ़ साल से फाइल को अपने दफ्तर में दबाए बैठे हैं। ठेकेदार का कहना है कि उसने उधार लेकर कोरोना काल में खाने की पूर्ति कराई थी।
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ठेकेदार के बिलों में विसंगतियां पाई गई हैं, जिनकी जांच की गई थी। ठेकेदार से पुराने भुगतान के बिल मांगे गए थे, जो उन्होंने उपलब्ध नहीं कराए हैं। पूर्व में निर्गत भुगतान और पूर्व में प्राप्त बिलों का परीक्षण करना बेहद जरूरी है।
- डॉ. अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज