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आज बंद रहेंगी दवा की दुकानें
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 14 Oct 2015 12:36 AM IST
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ऑनलाइन बिजनेस के विरोध में बुधवार को प्रस्तावित हड़ताल के चलते दवा कारोबारी दवा की दुकानें बंद रखेंगे। जनपद में करीब 2700 दवा की दुकानों पर रोजाना पांच लाख मरीज और तीमारदार दवा लेने के लिए पहुंचते हैं। एक दिन में करीब तीन करोड़ के दवा कारोबार पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
दो बसों में दवा कारोबारी जंतर मंतर पर दिल्ली में प्रदर्शन के लिए भी निकलेंगे। इस हड़ताल से मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी होगी। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील त्यागी, महासचिव प्रदीप लूथरा सहित अन्य दवा कारोबारियों ने बताया कि ई-फार्मेसी जैसी ऑनलाइन बिजनेस नीति के विरोध में देशव्यापी हड़ताल की जा रही है।
इसके तहत ही बुधवार को जिले की सभी 2700 दवा की दुकानें बंद करने का आह्वान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि दवा की दुकानों पर रोजाना साढ़े चार से पांच लाख मरीज और तीमारदार दवाएं लेने पहुंचते हैं। सीडीए की रिटेल विंग के अध्यक्ष नलिन अग्रवाल, डॉ. एसके ठकराल सहित अन्य दवा कारोबारियों ने कहा कि ऑनलाइन बिजनेस में ब्रांडेड ऑनलाइन शापिंग कंपनियों की मनमानी बढ़ेगी।
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ऑनलाइन खरीदारी पर अंकुश न होने के कारण ड्रग तस्करी जैसे खतरे बढ़ेंगे। इसके अलावा देहाती इलाकों से कस्बों में अब तक ऑनलाइन बिजनेस का माहौल और साधन ही नहीं है। इसलिए यह काम अभी अव्यवहारिक है। उन्होंने कहा कि सरकार के तमाम दबाव के बावजूद इस बार दवा कारोबारी पीछे नहीं हटेंगे।
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दो बसों में दवा कारोबारी जंतर मंतर पर दिल्ली में प्रदर्शन के लिए भी निकलेंगे। इस हड़ताल से मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी होगी। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील त्यागी, महासचिव प्रदीप लूथरा सहित अन्य दवा कारोबारियों ने बताया कि ई-फार्मेसी जैसी ऑनलाइन बिजनेस नीति के विरोध में देशव्यापी हड़ताल की जा रही है।
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इसके तहत ही बुधवार को जिले की सभी 2700 दवा की दुकानें बंद करने का आह्वान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि दवा की दुकानों पर रोजाना साढ़े चार से पांच लाख मरीज और तीमारदार दवाएं लेने पहुंचते हैं। सीडीए की रिटेल विंग के अध्यक्ष नलिन अग्रवाल, डॉ. एसके ठकराल सहित अन्य दवा कारोबारियों ने कहा कि ऑनलाइन बिजनेस में ब्रांडेड ऑनलाइन शापिंग कंपनियों की मनमानी बढ़ेगी।
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ऑनलाइन खरीदारी पर अंकुश न होने के कारण ड्रग तस्करी जैसे खतरे बढ़ेंगे। इसके अलावा देहाती इलाकों से कस्बों में अब तक ऑनलाइन बिजनेस का माहौल और साधन ही नहीं है। इसलिए यह काम अभी अव्यवहारिक है। उन्होंने कहा कि सरकार के तमाम दबाव के बावजूद इस बार दवा कारोबारी पीछे नहीं हटेंगे।