Exclusive: दिल्ली, चंडीगढ़ वालों को भा रहे सहारनपुर के ड्रैगन फ्रूट, किसान हो रहे मालामाल
सहारनपुर जनपद के किसान कृषि विविधीकरण को तेजी से अपना रहे हैं। इसी के तहत यहां के किसान ड्रेगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। ड्रेगन फ्रूट की दिल्ली और चंडीगढ़ में खूब बिक्री हो रही है।
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परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और कम होती आय के चलते उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के किसान नए प्रयोग कर रहे हैं। जिले के गांव कलालहटी के एक प्रगतिशील किसान चांदवीर ने कैक्टस प्रजाति के ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। पोषक तत्वों से भरपूर ड्रैगन फ्रूट की खेती से उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है।
जनपद के किसान कृषि विविधीकरण को तेजी से अपना रहे हैं। विकासखंड गंगोह के गांव कलालहटी के किसान चांदवीर ने दो एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। उन्होंने आठ गुणा आठ फीट पर सीमेंट का पिलर लगाकर उसके चारों ओर ड्रैगन फ्रूट के चार पौधों को रोपा है। इस प्रकार एक एकड़ खेत में उन्होंने 1600 पौधे लगाए।
करीब तीन वर्ष पहले लगाए गए ड्रैगन फ्रूट के एक पौधे से उन्हें सात से आठ किलो फल प्राप्त हुए हैं। चांदवीर ने बताया कि फिलहाल उनका ड्रैगन फ्रूट 120 से 150 प्रति किलो बिक रहा है। उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का आइडिया गुजरात में इसकी खेती को देखकर आया। दिल्ली, चंडीगढ़, देहरादून आदि बड़े शहरों में ड्रैगन फ्रूट की खासी डिमांड है।
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पोषक तत्वों से है भरपूर
जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए जनपद की जलवायु अनुकूल है। महंगा फल होने के कारण इसकी खेती से आय भी अधिक प्राप्त होती है। जनपद में ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह फल एंटी ऑक्सीडेंट का काम करता है। इसमें आयरन, विटामिन सी, प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेड आदि भरपूर होता है।
उद्यान विभाग देता है अनुदान
उद्यान विभाग ड्रैगन फ्रूट की खेती को प्रोत्साहित कर रहा है। इसकी खेती करने वाले किसान को एकीकृत बागवानी मिशन के तहत 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा इसमें प्राथमिकता के आधार पर ड्र्पि एरीगेशन सिस्टम स्थापित किया जाता है। इसकी खेती में शुरूआती लागत काफी अधिक आती है। इसकी खेती से तीन से चार लाख रुपये प्रति एकड़ तक आय प्राप्त हो सकती है। - अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।