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डॉक्टर, जांच सुविधाएं और दवाएं सब हैं, पर इलाज नहीं
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जिला मानसिक स्वस्थ्य वार्ड
- फोटो : SAHARANPUR
डॉक्टर, जांच सुविधाएं और दवाएं सब हैं, पर इलाज नहीं
सहारनपुर। जनपद में मनोरोगियों पर भी कोरोना की मार पड़ रही है। कोविड अस्पताल बनने के कारण राजकीय मेडिकल कॉलेज में मनोरोग चिकित्सक की ओपीडी करीब सात माह से बंद पड़ी है। इस वजह से मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉ. अंशुमन तिवारी मनोरोग चिकित्सक के तौर पर 2016 से तैनात हैं। वह लगातार ओपीडी कर रहे थे। प्रतिदिन 150 से अधिक मरीज देखते थे। कोरोना के बाद कॉलेज में एल-1, एल-2 और एल-3 कोविड अस्पताल बनाए गए। ऐसे में नियमानुसार वहां ओपीडी नहीं चलाई जा सकती। यही वजह है कि कोविड अस्पताल बनने के बाद से मेडिकल कॉलेज की मनोरोग चिकित्सक की ओपीडी भी बंद पड़ी है।
उधर, एसबीडी जिला अस्पताल के कक्ष संख्या छह में मेंटल हेल्थ ओपीडी है, जो सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को खुलती है। यहां डॉ. प्रमोद ही मरीजों को देखते हैं, वह मनोरोग के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। काउंसिलिंग के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. देवेंद्र तैनात हैं। इनके अलावा स्टाफ के सदस्य भी हैं। एक तरह से जिले भर के मरीजों के लिए डॉ. अंशुमन तिवारी ही सरकारी तौर पर मनोरोग विशेषज्ञ हैं।
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- कोरोना काल में बढ़ा मानसिक तनाव
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ओपीडी बंद होने के कारण वहां तो मरीज पहुंच ही नहीं रहे हैं। मगर एसबीडी जिला अस्पताल की ओपीडी में भी कम ही मरीज पहुंच रहे हैं। डाक्टर देवेंद्र का कहना है कि कोरोना से पहले प्रतिदिन 70 से 75 मरीज मनोरोग के संबंधित चिकित्सा परामर्श लेने आते थे, मगर अप्रैल से सितंबर के अंत तक 800- 900 मरीज पहुंचे, जिन्होंने कोरोना की वजह से मानसिक तनाव के बारे में परामर्श लिया।
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- नकारात्मकता के मामले ज्यादा
मनोरोग को लेकर परामर्श लेने जिला अस्पताल में पहुंचने वाले लोगों में कई तरह के लक्षण सामने आए। डाक्टर देवेंद्र बताते हैं कि फ्लू डेस्क पर आकर जांच कराने वालों में अधिकांश लोग ऐसे थे, जो भावनात्मक और नकारात्मकता से घिरे थे। किसी न किसी रूप में डर या घबराहट और चि ड़चिड़ापन महसूस कर रहे थे।
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सहारनपुर। जनपद में मनोरोगियों पर भी कोरोना की मार पड़ रही है। कोविड अस्पताल बनने के कारण राजकीय मेडिकल कॉलेज में मनोरोग चिकित्सक की ओपीडी करीब सात माह से बंद पड़ी है। इस वजह से मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉ. अंशुमन तिवारी मनोरोग चिकित्सक के तौर पर 2016 से तैनात हैं। वह लगातार ओपीडी कर रहे थे। प्रतिदिन 150 से अधिक मरीज देखते थे। कोरोना के बाद कॉलेज में एल-1, एल-2 और एल-3 कोविड अस्पताल बनाए गए। ऐसे में नियमानुसार वहां ओपीडी नहीं चलाई जा सकती। यही वजह है कि कोविड अस्पताल बनने के बाद से मेडिकल कॉलेज की मनोरोग चिकित्सक की ओपीडी भी बंद पड़ी है।
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उधर, एसबीडी जिला अस्पताल के कक्ष संख्या छह में मेंटल हेल्थ ओपीडी है, जो सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को खुलती है। यहां डॉ. प्रमोद ही मरीजों को देखते हैं, वह मनोरोग के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। काउंसिलिंग के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. देवेंद्र तैनात हैं। इनके अलावा स्टाफ के सदस्य भी हैं। एक तरह से जिले भर के मरीजों के लिए डॉ. अंशुमन तिवारी ही सरकारी तौर पर मनोरोग विशेषज्ञ हैं।
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- कोरोना काल में बढ़ा मानसिक तनाव
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ओपीडी बंद होने के कारण वहां तो मरीज पहुंच ही नहीं रहे हैं। मगर एसबीडी जिला अस्पताल की ओपीडी में भी कम ही मरीज पहुंच रहे हैं। डाक्टर देवेंद्र का कहना है कि कोरोना से पहले प्रतिदिन 70 से 75 मरीज मनोरोग के संबंधित चिकित्सा परामर्श लेने आते थे, मगर अप्रैल से सितंबर के अंत तक 800- 900 मरीज पहुंचे, जिन्होंने कोरोना की वजह से मानसिक तनाव के बारे में परामर्श लिया।
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- नकारात्मकता के मामले ज्यादा
मनोरोग को लेकर परामर्श लेने जिला अस्पताल में पहुंचने वाले लोगों में कई तरह के लक्षण सामने आए। डाक्टर देवेंद्र बताते हैं कि फ्लू डेस्क पर आकर जांच कराने वालों में अधिकांश लोग ऐसे थे, जो भावनात्मक और नकारात्मकता से घिरे थे। किसी न किसी रूप में डर या घबराहट और चि ड़चिड़ापन महसूस कर रहे थे।