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जाते-जाते कमेले को हरी झंडी दे गए सहारनपुर के डीएम

Thu, 04 May 2017 12:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Thu, 04 May 2017 12:18 AM IST
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DMK of Saharanpur has given green signal for visiting
बूचड़खाना (सांकेतिक चित्र)
सहारनपुर में पूर्व जिलाधिकारी शफकत कमाल ट्रांसफर से पहले नगर निगम के बूचड़खाने को चालू करने की अनुमति दे गए। बुधवार को इसका खुलासा उस समय हुआ जब नगर स्वास्थ्य अधिकारी पूर्व डीएम द्वारा जारी अनुमति पत्र लेकर नगरायुक्त के पास पहुंचे।
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हालांकि बूचड़खाने के चालू होने में अभी कई पेच फंसे हैं। श्रम विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस होना है, उसके बाद ही बूचड़खाना चालू हो पाएगा। प्रदेश सरकार के बूचड़खानों के खिलाफ चलाए गए अभियान के बीच में डीएम का यह आदेश चर्चाओं में है।
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जानकर हैरानी होगी कि नगर निगम के बूचड़खाने को पूर्व डीएम चालू करने की अनुमति दे गए हैं, वह भी नगरायुक्त को संज्ञान में लिए बिना। इतना ही नहीं, अभी तक श्रम विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग से भी बूचड़खाने को लाइसेंस नहीं दिया गया है।
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जिले में वर्षों से चार बूचड़खाने संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में योगी के नेेतृत्व वाली भाजपा सरकार बनने के बाद अवैध बूचड़खानों को बंद करने के आदेेश दिए गए थे। इसके बाद जिले में संचालित चारों कमेलों पर अफसरों ने छापेमारी कर बंद करा दिया।

इनमें दो बूचड़खाने गंगोह, एक सहारनपुर शहर और चौथा हरौड़ा में है। मगर धीरे-धीरे सभी बूचड़खानों को चालू कराया जा रहा है। चालू किए गए बूचड़खानों में एक गंगोह, एक हरौड़ा का बूचड़खाना शामिल है।

शहर में संचालित नगर निगम के बूचड़खाने पर भी सिटी मजिस्ट्रेट ने नगर निगम के अधिकारियों को साथ लेकर छापेमारी की थी, जिसमें कई अनियमितताएं पाई गई थी, जिसके चलते बूचड़खाने को बंद करा दिया गया था।

कुछ दिन बाद बूचड़खाना संचालकों ने सभी नॉर्म्स पूरे कर लेने की बात कहते हुए प्रशासन से पुन: निरीक्षण कराने की मांग की थी। इसके बाद फिर से सिटी मजिस्ट्रेट अपनी टीम के साथ बूचड़खाने पहुंचे थे।

इसके बाद तत्कालीन डीएम शफकत कमाल ने बूचड़खाने को पुन: चालू करने के आदेश जारी कर दिए। इसका पता नगरायुक्त ओपी वर्मा को बुधवार को तब चला, जब नगर स्वास्थ्य अधिकारी डीएम द्वारा दी गई अनुमति का पत्र लेकर उनके समक्ष पहुंचे। 

नगरायुक्त ने इस पर हैरानी जताई। यानी साफ है कि बूचड़खाने को पुन: चालू कराने की अनुमति देने के लिए नगरायुक्त को संज्ञान में नहीं लिया गया। इतना ही नहीं, बूचड़खाने को अभी तक श्रम विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस नहीं मिला है। हवाला दिया जा रहा है कि अनुमति के लिए आवेदन किया गया है। 

बूचड़खाने को चालू कराने के लिए डीएम द्वारा अनुमति दिए जाने की जानकारी मिली है। मगर बूचड़खाने को अभी तक श्रम विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस नहीं मिला है। अभी केवल आवेदन किया गया है। तमाम नियम पूरे करने के बाद ही बूचड़खाने को चालू कराया जाएगा।  
- ओपी वर्मा, नगरायुक्त। 

पूर्व डीएम शफकत कमाल द्वारा बूचड़खाने को चालू कराने की अनुमति देने के बाद सवाल उठ रहे हैं। हालांकि नगर स्वास्थ्य अधिकारी ओपी गुप्ता का कहना है कि बूचड़खाने का दौरा करने वाली टीम में सिटी मजिस्ट्रेट के साथ ही अपर नगरायुक्त भी शामिल थे।


दूसरी बार जब टीम बूचड़खाने पहुंची तब भी वह साथ ही रहे। ऐसे में यह बात कहना कि निगम को पता नहीं था ठीक नहीं है। ज्यादातर बूचड़खाने नियमों की अनदेखी कर संचालित किए जा रहे थे। शहर के साथ ही हरौड़ा स्थित बूचड़खाने से निकलने वाला खून नालियों में बहता था। आसपास के इलाके में रहने वाले कुत्ते मांस के लोथड़े लिए घूमते नजर आते थे। 
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