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महंगा डीजल, भाड़ा है कम और खर्चे ज्यादा
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ललित पोपली
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कोरोना कर्फ्यू हटने के बाद ट्रांसपोर्ट कारोबार पटरी पर नहीं लौट सका है। जितना भाड़ा मिल रहा है, उसमें डीजल और अन्य खर्च निकालना भारी पड़ रहा है। ट्रांसपोर्ट कारोबारी पशोपेश में हैं, आखिर करें तो क्या करें। क्योंकि आमदनी कम होने के बावजूद बैंक ऋण की किस्त से लेकर टैक्स आदि का भी खर्च सिर पर है।
ऐसे में ट्रांसपोर्ट कारोबारी राहत चाहते हैं जो बैंक ऋण किस्त में छूट के साथ ही टैक्स की अदायगी के रूप में मिलनी चाहिए। इसके लिए ट्रांसपोर्टरों की तरफ से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजे गए। ट्रांसपोर्टरों को सबसे बड़ा नुकसान डीजल की महंगाई के रूप में झेलना पड़ रहा है, उस पर ट्रांसपोर्टरों का तर्क है कि डीजल तो महंगा हो गया, लेकिन भाड़ा पहले की तरह है। प्रतिस्पर्धा के कारण भी भाड़ा नहीं बढ़ पा रहा है। इस कारण यह हालत है कि कई ट्रांसपोर्टरों ने अपने वाहन खड़े कर दिए हैं।
आमदनी और खर्चे का हिसाब
ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक सहारनपुर से मुजफ्फरनगर का भाड़ा 4200 से 4500 रुपये लिया जाता है। आने और जाने की दूरी करीब 130 किलोमीटर बनती है। ट्रक 03 किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज देता है, जिससे करीब 43 लीटर डीजल की खपत है, जो 3800 रुपये का बनता है। इसके अलावा ड्राइवर और हेल्पर 400 रुपये, एक तरफ का टोल टैक्स 1230 रुपये होते हैं, इसे मिलाकर मुजफ्फरनगर जाने आने का खर्च करीब 5400 रुपये बनता है। यदि लौटते समय भाड़ा नहीं मिला तो खर्च भी पूरा नहीं होता है।
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आंकड़ों में ट्रांसपोर्ट कारोबार
200 ट्रांसपोर्टर हैं कुल सहारनपुर में
3000 बड़ी गाड़ियां हैं
1600 छोटे वाहन हैं
200 छोटे वाहन पूर्व में भाड़ा लेकर निकलते थे
ट्रांसपोर्टरों की पीड़ा
डीजल की महंगाई ने दम निकाल दिया है। दो महीने के भीतर 14 रुपये डीजल के दाम बढ़ गए हैं। बैंक किस्त और टैक्स की अदायगी करना भी मुश्किल हो रहा है। सरकार को ट्रांसपोर्टरों के हित में सोचना चाहिए। -- ब्रित चावला, अध्यक्ष, सहारनपुर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन
ट्रांसपोर्ट कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिसका खामियाजा कारोबारियों को ही झेलना पड़ रहा है। डीजल की महंगाई से दिक्कत और बढ़ गई है। - ललित पोपली, महासचिव
ट्रांसपोर्ट भाड़ा बढ़ाने को लेकर भी सरकार को कदम उठाना चाहिए या फिर ट्रांसपोर्टरों को अन्य सहूलियतें दी जाएं, तभी कारोबार ठीक हो सकेगा। - मुकेश दत्ता, कोषाध्यक्ष
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ऐसे में ट्रांसपोर्ट कारोबारी राहत चाहते हैं जो बैंक ऋण किस्त में छूट के साथ ही टैक्स की अदायगी के रूप में मिलनी चाहिए। इसके लिए ट्रांसपोर्टरों की तरफ से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजे गए। ट्रांसपोर्टरों को सबसे बड़ा नुकसान डीजल की महंगाई के रूप में झेलना पड़ रहा है, उस पर ट्रांसपोर्टरों का तर्क है कि डीजल तो महंगा हो गया, लेकिन भाड़ा पहले की तरह है। प्रतिस्पर्धा के कारण भी भाड़ा नहीं बढ़ पा रहा है। इस कारण यह हालत है कि कई ट्रांसपोर्टरों ने अपने वाहन खड़े कर दिए हैं।
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आमदनी और खर्चे का हिसाब
ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक सहारनपुर से मुजफ्फरनगर का भाड़ा 4200 से 4500 रुपये लिया जाता है। आने और जाने की दूरी करीब 130 किलोमीटर बनती है। ट्रक 03 किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज देता है, जिससे करीब 43 लीटर डीजल की खपत है, जो 3800 रुपये का बनता है। इसके अलावा ड्राइवर और हेल्पर 400 रुपये, एक तरफ का टोल टैक्स 1230 रुपये होते हैं, इसे मिलाकर मुजफ्फरनगर जाने आने का खर्च करीब 5400 रुपये बनता है। यदि लौटते समय भाड़ा नहीं मिला तो खर्च भी पूरा नहीं होता है।
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आंकड़ों में ट्रांसपोर्ट कारोबार
200 ट्रांसपोर्टर हैं कुल सहारनपुर में
3000 बड़ी गाड़ियां हैं
1600 छोटे वाहन हैं
200 छोटे वाहन पूर्व में भाड़ा लेकर निकलते थे
ट्रांसपोर्टरों की पीड़ा
डीजल की महंगाई ने दम निकाल दिया है। दो महीने के भीतर 14 रुपये डीजल के दाम बढ़ गए हैं। बैंक किस्त और टैक्स की अदायगी करना भी मुश्किल हो रहा है। सरकार को ट्रांसपोर्टरों के हित में सोचना चाहिए। -- ब्रित चावला, अध्यक्ष, सहारनपुर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन
ट्रांसपोर्ट कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिसका खामियाजा कारोबारियों को ही झेलना पड़ रहा है। डीजल की महंगाई से दिक्कत और बढ़ गई है। - ललित पोपली, महासचिव
ट्रांसपोर्ट भाड़ा बढ़ाने को लेकर भी सरकार को कदम उठाना चाहिए या फिर ट्रांसपोर्टरों को अन्य सहूलियतें दी जाएं, तभी कारोबार ठीक हो सकेगा। - मुकेश दत्ता, कोषाध्यक्ष

व्रित चावला- फोटो : SAHARANPUR

मुकेश दत्ता- फोटो : SAHARANPUR