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धराली हादसा: पांच दिन की तलाश के बाद खाली हाथ लौटे परिजन
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गंगोह के गांव जुखेड़ी में उदास बैठे दीपांशु के परिजन संवाद
- गंगोह के दो घरों में टूटी अपनों को सकुशल पाने की उम्मीदें
संवाद न्यूज एजेंसी
गंगोह। धराली की आपदा ने गंगोह के दो परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। पांच दिन तक मलबे में दबे अपनों की तलाश में खाक छानते परिजन आखिरकार निराश होकर लौट आए। लौटे परिजनों में शामिल अभिलाष ने कांपती आवाज में बताया कि करीब 20 बीघा का इलाका पूरी तरह तबाह हो गया, जहां मुकेश और दीपांशु रहते थे, वहां 70 फीट तक मलबा है। पांच दिन तक हम अस्पतालों से लेकर हादसा स्थल तक हर जगह खोजते रहे, लेकिन पता नहीं चला।
जुखेड़ी निवासी मुकेश कुमार (22) पुत्र रामसिंह और उसका चचेरा भाई दीपांशु (19) पुत्र मोनू, दो माह पहले ही धराली में वेल्डिंग का काम करने गए थे। हादसे के दिन सुबह आखिरी बार पिता से बात हुई थी। मुकेश ने बताया था कि बारिश हो रही है, वह काम पर नहीं जा रहे हैं, लेकिन कुछ ही घंटे बाद तबाही की खबर आई और फिर दोनों के मोबाइल बंद हो गए। दीपांशु ने घर की आर्थिक मजबूरी के कारण इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और परिवार का सहारा बन गया था। वह घर का इकलौता कमाने वाला था।
वहीं, मुकेश काम के साथ-साथ प्राइवेट रूप से बीए प्रथम वर्ष का छात्र था और पिता रामसिंह की गंभीर बीमारी के बाद घर की जिम्मेदारी निभा रहा था। रामसिंह ने बेटे को 70 हजार रुपये की वेल्डिंग मशीनरी कर्ज लेकर दिलाई थी, ताकि वह घर की हालत सुधार सके। सात दिनों से घरों में चूल्हा तक नहीं जला। परिजनों का कहना है कि उनके दिल में अब भी एक उम्मीद है, लेकिन वह उम्मीद भी मलबे में दबती जा रही है। दीपांशु की माता मधु और मुकेश की मां ने सीएम योगी और पीएम मोदी से मदद की गुहार लगाई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गंगोह। धराली की आपदा ने गंगोह के दो परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। पांच दिन तक मलबे में दबे अपनों की तलाश में खाक छानते परिजन आखिरकार निराश होकर लौट आए। लौटे परिजनों में शामिल अभिलाष ने कांपती आवाज में बताया कि करीब 20 बीघा का इलाका पूरी तरह तबाह हो गया, जहां मुकेश और दीपांशु रहते थे, वहां 70 फीट तक मलबा है। पांच दिन तक हम अस्पतालों से लेकर हादसा स्थल तक हर जगह खोजते रहे, लेकिन पता नहीं चला।
जुखेड़ी निवासी मुकेश कुमार (22) पुत्र रामसिंह और उसका चचेरा भाई दीपांशु (19) पुत्र मोनू, दो माह पहले ही धराली में वेल्डिंग का काम करने गए थे। हादसे के दिन सुबह आखिरी बार पिता से बात हुई थी। मुकेश ने बताया था कि बारिश हो रही है, वह काम पर नहीं जा रहे हैं, लेकिन कुछ ही घंटे बाद तबाही की खबर आई और फिर दोनों के मोबाइल बंद हो गए। दीपांशु ने घर की आर्थिक मजबूरी के कारण इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और परिवार का सहारा बन गया था। वह घर का इकलौता कमाने वाला था।
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वहीं, मुकेश काम के साथ-साथ प्राइवेट रूप से बीए प्रथम वर्ष का छात्र था और पिता रामसिंह की गंभीर बीमारी के बाद घर की जिम्मेदारी निभा रहा था। रामसिंह ने बेटे को 70 हजार रुपये की वेल्डिंग मशीनरी कर्ज लेकर दिलाई थी, ताकि वह घर की हालत सुधार सके। सात दिनों से घरों में चूल्हा तक नहीं जला। परिजनों का कहना है कि उनके दिल में अब भी एक उम्मीद है, लेकिन वह उम्मीद भी मलबे में दबती जा रही है। दीपांशु की माता मधु और मुकेश की मां ने सीएम योगी और पीएम मोदी से मदद की गुहार लगाई है।
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