{"_id":"629f5da826ea313ec9582549","slug":"deoband-maulana-arshad-madani-has-filed-a-petition-in-supreme-court-against-law-of-gyan-vapi-and-worship","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoband: ज्ञानवापी व पूजा के कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची जमीयत, मौलाना बोले- गर्मी की छुट्टी के बाद सुनवाई की उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoband: ज्ञानवापी व पूजा के कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची जमीयत, मौलाना बोले- गर्मी की छुट्टी के बाद सुनवाई की उम्मीद
Tue, 07 Jun 2022 08:02 PM IST
कपिल kapil
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
Published by: कपिल kapil
Updated Tue, 07 Jun 2022 08:02 PM IST
सार
मौलाना अरशद मदनी ने ज्ञानवापी मस्जिद मामला और इबादतगाह कानून (पूजा के कानून) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
विज्ञापन
मौलाना अरशद मदनी
- फोटो : amar ujala
विस्तार
ज्ञानवापी मस्जिद मामला और इबादतगाह कानून (पूजा के कानून) के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले पर गर्मी के अवकाश के बाद सुनवाई की उम्मीद है।
विज्ञापन
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बताया कि हस्तक्षेप करने वाली इस याचिका में लिखा गया है कि जमीयत उलमा-ए-हिंद बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि संपत्ति विवाद मामले में एक प्रमुख पक्ष था। जिसमें प्लेस आफ वरशिप एक्ट की धारा 4 को स्वीकार कर लिया गया है और इस कानून की संवैधानिक स्थिति को सर्वोच्च न्यायालय ने भी मान्यता दी है। इसलिए अब इस कानून को चुनौती देकर एक बार फिर देश की शांति भंग करने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: UP: भीषण गर्मी से हाल-बेहाल, पंखे दे रहे गर्म हवा, झुलसा रही लू, इस तारीख के बाद मिलेगी राहत
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम 1991 को लागू करने के दो उद्देश्य थे। पहला किसी भी धार्मिक स्थल की तब्दीली को रोकना और दूसरा पूजा स्थलों को उसी में रखना था जिस स्थिति या रूप में वे 1947 में थे। मौलाना मदनी ने उम्मीद जताई के गर्मी के अवकाश के बाद कोर्ट इस पर सुनवाई करेगा।
यह भी पढ़ें: Gupta Brothers Arrested: राशन की दुकान से निकलकर गुप्ता बंधुओं ने साउथ अफ्रीका में खड़ा किया साम्राज्य, अब मंडराया ये खतरा