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डिबेट में अपशब्दों का इस्तेमाल करने पर दारुल उलूम नाराज
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 23 Nov 2017 11:54 PM IST
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दारूल उलूम देवबंद
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सहारनपुर के देवबंद में दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कुछ टीवी चैनलों पर डिबेट के दौरान हजरत आयशा और हजरत फातिमा जेहरा की शान में अपमानजनक शब्द कहे जाने की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सरकार से चैनलों और आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को जारी बयान में मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि मुसलमानों के साथ ही देशवासियों को भी इस तथ्य का ज्ञान होना चाहिए कि पैगंबरे इस्लाम सल्लाहुअलैहिवसलल्म ने अपने सहाबा को चांद सितारों से तशबीह (उन जैसा बताया) दी है।
अहले बैत और सहाबा-ए-कराम हमारे दीन की बुनियाद व आधार हैं। उनकी शान में गुस्ताखी बड़ा गुनाह है और गाली गलौज करना कूफर तक ले जा सकती है।
उन्होंने कहा कि मुसलमान किसी भी हालत में सहाबा और अलहे बैत का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते। मामूली इमान रखने वाला भी सहाबा की शान में कभी कोई गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं कर सकता।
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कहा कि अजमत-ए-सहाबा इमान का हिस्सा है इसलिए हम उन सभी चैनलों और व्यक्तियों की कड़ी निंदा करते हैं जिन्होंने हजरत आयशा और हजरत फातिमा जेहरा की शान में अपशब्द कहे।
हम सरकार से मांग करते हैं कि मुसलमानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसे चैनलों और लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करें। मोहतमिम ने यह भी कहा कि सरकार को चाहिए कि वह अभिव्यक्ति की हदें तय करें और किसी भी धार्मिक समुदाय के अकाबिर के खिलाफ गाली गुफ्तार या अपशब्द कहने को कानूनी अपराध की श्रेणी में लाए। उसी आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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बृहस्पतिवार को जारी बयान में मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि मुसलमानों के साथ ही देशवासियों को भी इस तथ्य का ज्ञान होना चाहिए कि पैगंबरे इस्लाम सल्लाहुअलैहिवसलल्म ने अपने सहाबा को चांद सितारों से तशबीह (उन जैसा बताया) दी है।
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अहले बैत और सहाबा-ए-कराम हमारे दीन की बुनियाद व आधार हैं। उनकी शान में गुस्ताखी बड़ा गुनाह है और गाली गलौज करना कूफर तक ले जा सकती है।
उन्होंने कहा कि मुसलमान किसी भी हालत में सहाबा और अलहे बैत का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते। मामूली इमान रखने वाला भी सहाबा की शान में कभी कोई गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं कर सकता।
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कहा कि अजमत-ए-सहाबा इमान का हिस्सा है इसलिए हम उन सभी चैनलों और व्यक्तियों की कड़ी निंदा करते हैं जिन्होंने हजरत आयशा और हजरत फातिमा जेहरा की शान में अपशब्द कहे।
हम सरकार से मांग करते हैं कि मुसलमानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसे चैनलों और लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करें। मोहतमिम ने यह भी कहा कि सरकार को चाहिए कि वह अभिव्यक्ति की हदें तय करें और किसी भी धार्मिक समुदाय के अकाबिर के खिलाफ गाली गुफ्तार या अपशब्द कहने को कानूनी अपराध की श्रेणी में लाए। उसी आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।