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आफत बन सकती हैं शहर में खड़ी जर्जर इमारतें
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सहारनपुर के मीर कोट स्थित जर्जर इमारत के द्घार
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। शहर में पुराने और जर्जर भवनों के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सोमवार रात रानी बाजार में जर्जर इमारत का हिस्सा गिर गया, जबकि पूर्व के वर्षों में ऐसे हादसों में कई लोगों की जान भी जा चुकी हैं। बावजूद इसके नगर निगम अनदेखी कर रहा है। नोटिस भेजकर अधिकारी भूल जाते हैं कि उससे आगे भी कोई कार्रवाई करनी है या नहीं।
नगर निगम के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शहर में 150 से अधिक जर्जर इमारतें हैं, जिनमें ज्यादातर इमारतें 80 से 100 वर्ष पुरानी हैं। बरसात के दिनों में लगभग प्रत्येक वर्ष कोई न कोई इमारत गिरती रही है। चार वर्ष पहले रानी बाजार क्षेत्र में ही इमारत में दबकर मां और बेटे की जान चली गई थी। करीब पांच वर्ष पहले हिरनमारान में गोदाम की इमारत गिरने से उसमें काम कर रहे तीन मजदूरों की दबकर मौत हो गई थी। तीन वर्ष पहले पुल खुमरान के पास पुरानी इमारत का एक हिस्सा गिरा था, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था। समय-समय पर इस तरह के हादसे होते रहे हैं। लगातार हो रही घटनाओं का संज्ञान लेते हुए नगर निगम इमारतों में रहने वाले लोगों को कई बार नोटिस जारी कर इमारतें खाली करने के निर्देश दिए थे। मगर कोई असर नहीं हुआ है।
यहां पर हैं ज्यादातर जर्जर इमारतें
शहर के दीनानाथ बाजार में दो से तीन मंजिला प्राचीन इमारतें हैं, जिनमें से कई की हालत खराब है। रानी बाजार में पुरानी और जर्जर इमारतों की गलियां भी संकरी हैं, जिनमें हादसा होने के बाद वाहन तक नहीं घुस सकते हैं। हिरनमारान और मटिया महल में ज्यादातर पुरानी इमारतें मुख्य मार्ग से हटकर है। छत्ता जंबूदास में एक पूरी लाइन प्राचीन इमारतों की है। मोहल्ला चौधरियान, मोहल्ला बढ़तला, हलवाई हट्टा, पुल खुमरान, मोरगंज, शहीद गंज, सराफा बाजार में भी बड़ी संख्या में प्राचीन और जर्जर इमारतें हैं।
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कब्जा नहीं छोड़ना चाहते लोग
शहर की ज्यादातर प्राचीन और जर्जर इमारतों में कई-कई परिवार रह रहे हैं। इमारत से कब्जा ना छूट जाए ऐसा सोचकर कोई भी परिवार इमारत को खाली करने को तैयार नहीं है। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ इमारतों पर कब्जे को लेकर उनमें रह रहे लोगों के मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में नगर निगम कार्रवाई नहीं कर सकता है।
ढमोला नदी किनारे भी खतरा
जर्जर भवनों के साथ ही ढमोला नदी किनारे बसे लोगों को भी खतरा है। वर्ष 2013 में भारी बारिश की वजह से ढमोला नदी उफान पर आई थी। इसकी वजह से ढमोला किनारे बने कई मकान ढहकर पानी में बह गए थे। कई घरों में अचानक पानी आ जाने से सामान का नुकसान हुआ था। प्रशासन ने ढमोला नदी पर कब्जा कर बनाए गए मकानों को चिह्नित कराया था, जिनकी संख्या 250 से अधिक थी। मगर आज तक ढमोला नदी से कब्जे नहीं हटे हैं। ऐसे में बरसात में ढमोला किनारे बसे लोगों को भी खतरा है।
जर्जर इमारतों को लेकर नगर निगम फिर से नोटिस जारी करने जा रहा है। यदि उनमें रहने वाले परिवार खुद इमारतों को खाली नहीं करते हैं तो नगर निगम नियमानुसार इमारतों को खाली कराकर ध्वस्त कराएगा।
- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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नगर निगम के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शहर में 150 से अधिक जर्जर इमारतें हैं, जिनमें ज्यादातर इमारतें 80 से 100 वर्ष पुरानी हैं। बरसात के दिनों में लगभग प्रत्येक वर्ष कोई न कोई इमारत गिरती रही है। चार वर्ष पहले रानी बाजार क्षेत्र में ही इमारत में दबकर मां और बेटे की जान चली गई थी। करीब पांच वर्ष पहले हिरनमारान में गोदाम की इमारत गिरने से उसमें काम कर रहे तीन मजदूरों की दबकर मौत हो गई थी। तीन वर्ष पहले पुल खुमरान के पास पुरानी इमारत का एक हिस्सा गिरा था, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था। समय-समय पर इस तरह के हादसे होते रहे हैं। लगातार हो रही घटनाओं का संज्ञान लेते हुए नगर निगम इमारतों में रहने वाले लोगों को कई बार नोटिस जारी कर इमारतें खाली करने के निर्देश दिए थे। मगर कोई असर नहीं हुआ है।
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यहां पर हैं ज्यादातर जर्जर इमारतें
शहर के दीनानाथ बाजार में दो से तीन मंजिला प्राचीन इमारतें हैं, जिनमें से कई की हालत खराब है। रानी बाजार में पुरानी और जर्जर इमारतों की गलियां भी संकरी हैं, जिनमें हादसा होने के बाद वाहन तक नहीं घुस सकते हैं। हिरनमारान और मटिया महल में ज्यादातर पुरानी इमारतें मुख्य मार्ग से हटकर है। छत्ता जंबूदास में एक पूरी लाइन प्राचीन इमारतों की है। मोहल्ला चौधरियान, मोहल्ला बढ़तला, हलवाई हट्टा, पुल खुमरान, मोरगंज, शहीद गंज, सराफा बाजार में भी बड़ी संख्या में प्राचीन और जर्जर इमारतें हैं।
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कब्जा नहीं छोड़ना चाहते लोग
शहर की ज्यादातर प्राचीन और जर्जर इमारतों में कई-कई परिवार रह रहे हैं। इमारत से कब्जा ना छूट जाए ऐसा सोचकर कोई भी परिवार इमारत को खाली करने को तैयार नहीं है। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ इमारतों पर कब्जे को लेकर उनमें रह रहे लोगों के मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में नगर निगम कार्रवाई नहीं कर सकता है।
ढमोला नदी किनारे भी खतरा
जर्जर भवनों के साथ ही ढमोला नदी किनारे बसे लोगों को भी खतरा है। वर्ष 2013 में भारी बारिश की वजह से ढमोला नदी उफान पर आई थी। इसकी वजह से ढमोला किनारे बने कई मकान ढहकर पानी में बह गए थे। कई घरों में अचानक पानी आ जाने से सामान का नुकसान हुआ था। प्रशासन ने ढमोला नदी पर कब्जा कर बनाए गए मकानों को चिह्नित कराया था, जिनकी संख्या 250 से अधिक थी। मगर आज तक ढमोला नदी से कब्जे नहीं हटे हैं। ऐसे में बरसात में ढमोला किनारे बसे लोगों को भी खतरा है।
जर्जर इमारतों को लेकर नगर निगम फिर से नोटिस जारी करने जा रहा है। यदि उनमें रहने वाले परिवार खुद इमारतों को खाली नहीं करते हैं तो नगर निगम नियमानुसार इमारतों को खाली कराकर ध्वस्त कराएगा।
- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।

सहारनपुर के माहेश्वरी स्ट्रीट स्थित जर्जर इमारत- फोटो : SAHARANPUR

सहारनपुर के रानी बाजार स्थित जर्जर इमारत- फोटो : SAHARANPUR

सहारनपुर के रानी बाजार स्थित जर्जर इमारत- फोटो : SAHARANPUR