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सीपीआई: अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी पर पहुंची, खाद्य कीमतें बनीं बड़ी वजह
Mon, 14 Sep 2026 04:40 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 14 Sep 2026 04:40 PM IST
सार
अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी पर पहुंची, मुख्य वजह खाद्य कीमतों में वृद्धि रही। थोक महंगाई भी बढ़कर 9.92 फीसदी हुई। आरबीआई ने दरों को अपरिवर्तित रखा।
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खुदरा महंगाई दर
- फोटो : amarujala.com
विस्तार
देश में महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ाया है। अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण हुई है।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को जारी जानकारी के मुताबिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई जुलाई में 4.45 फीसदी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। खाद्य महंगाई दर अगस्त में 5.95 फीसदी पर पहुंच गई है। यह जुलाई के 5.52 फीसदी से अधिक है।
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खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार वृद्धि ने आम लोगों के बजट पर सीधा असर डाला है। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2026-27 के लिए सीपीआई महंगाई का अनुमान 5 फीसदी लगाया है। इसमें दूसरी तिमाही के लिए 4.7 फीसदी, तीसरी तिमाही के लिए 5.9 फीसदी और चौथी तिमाही के लिए 5.5 फीसदी का अनुमान शामिल है।
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क्या आरबीआई की चिंताएं बढ़ी हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में महंगाई की चिंताओं के बीच प्रमुख अल्पकालिक नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखा है। यह कदम बढ़ती महंगाई के दबाव को दर्शाता है। आरबीआई का आधिकारिक जनादेश महंगाई को 2 फीसदी से 6 फीसदी की स्वीकार्य सीमा के भीतर रखना है। केंद्रीय बैंक लगातार कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।
थोक महंगाई का क्या हाल है?
इस बीच, थोक मूल्य आधारित महंगाई दर भी अगस्त में बढ़कर 9.92 फीसदी हो गई है। यह जुलाई में 9.78 फीसदी थी। थोक महंगाई में यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थ, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण हुई है। यह स्थिति अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती पेश करती है।