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पुलिस ने दे दी थी दानिश को पूरी छूट
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 05 Nov 2016 01:09 AM IST
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ग्राम घाना खेड़ी निवासी दानिश हत्या के मामले में पेशी के लिए जेल गाड़ी में कचहरी पहुंचा। बंदियों को गाड़ी से निकालकर सीधे हवालात में स्थानांतरित किया जाता है, जहां से उन्हें पेशी पर ले जाया जाता है। लेकिन दानिश के मामले में पुलिस ने पूरी छूट दे दी।
एचसीपी यशपाल उसे हवालात ले जाने की बजाय कचहरी की सैर कराता रहा। उसे कैंटीन पर भी लेकर गया। उसके बाद दानिश को लेकर एक अधिवक्ता के चेंबर पर जा पहुंचा। लोगों के अनुसार एचसीपी चेंबर के बाहर पड़ी बेंच पर आराम से बैठ गया और दानिश को आजाद छोड़ दिया।
वह काफी देर तक घूमता रहा और अचानक ही बेंच पर बैठे यशपाल को धक्का देकर छत के रास्ते फरार हो गया। जबकि एडीजे-3 कोर्ट परिसर के दूसरे छोर पर है और जहां से दानिश फरार हुआ है, वह कोर्ट के बिल्कुल विपरीत दिशा में दूसरी ओर स्थित है।
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सवाल यह है कि एचसीपी कोर्ट की बजाय दानिश को दूसरी ओर लेकर क्यों पहुंचा। जिस जीने के रास्ते से फरार हुआ, ठीक उसके नजदीक ही अधिवक्ता के चेंबर के सामने जाकर क्यों बैठा? इस बारे में एसपी सिटी संजय सिंह का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। एचसीपी के खिलाफ भी लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
पहले से ही देख रखा था रास्ता
हत्यारोपी दानिश जिस तरह से जीने पर चढ़कर छत पर पहुंचकर दीवार के पार फांदा और वहां से पार्श्वनाथ प्लाजा की ओर होते हुए आराम से फरार हो गया, उसे देखकर यह अंदेशा हो रहा है कि दानिश ने फरार होने की पूरी प्लानिंग पहले ही कर ली थी।
उसने यह रास्ता पहले ही या तो देख लिया था, या किसी अन्य व्यक्ति से फरार होने का रास्ते के बारे में पूरी जानकारी ली थी। क्योंकि जिस तरह से इस रास्ते से आसानी से फरार हुआ है, वह बगैर रास्ते की जानकारी हुए संभव नहीं है। यही कारण है कि दानिश आराम से फरार हो गया और पुलिस देखती रह गई। उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने काफी हाथ-पांव मारे, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया।
जेल में दूसरे बंदियों से झगड़ा करने का भी है मामला दर्ज
जेल में भी दानिश शांत नहीं रहता है। यहां भी आए दिन साथी बंदियों से झगड़ा करने का आरोप लगता रहता है। जेल में साथी बंदी के साथ मारपीट करने का एक मामला दानिश पर थाना जनकपुरी में भी दर्ज है।
दोस्त के कत्ल के आरोप में था जेल में
ग्राम घानाखेड़ी निवासी दानिश पर देहात कोतवाली में तीन मामले दर्ज हैं। दानिश पर अपने ही दोस्त शादाब की हत्या करने का आरोप है। आरोप है कि दानिश ने 3 जनवरी 2012 में अपने दोस्त शादाब का कत्ल कर दिया था। तभी से वह जेल में बंद है। इसके अलावा देहात कोतवाली में 307 और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है।
पहले भी कचहरी से फरार हो चुके हैं दो बंदी
कचहरी परिसर से बंदी के फरार होने की यह पहली घटना नहीं है। बंदियों की अभिरक्षा में पुलिस लगातार कोताही बरत रही है। लगभग एक वर्ष पूर्व भी दो बंदी पुलिस कर्मियों की आंखों में मिर्च झोंक कर दीवार फांदकर आशा माडर्न स्कूल की ओर रास्ते से होते हुए फरार हो गए थे। जबकि दानिश भी उसी चारदीवारी की ओर से पार्श्वनाथ प्लाजा की ओर फरार हुआ है।
हाल में ही बंदियों के फरार होने की दो अन्य घटनाएं हुईं हैं। लगभग एक माह पूर्व दो बंदी जेल के सामने से दो पुलिसकर्मियों को धक्का देकर फरार हो गए थे। जबकि एक सप्ताह पूर्व भी एक बंदी जेल के पास से ही फरार हो गया था। हालांकि पुलिस हाल में फरार हुए तीनों बंदियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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एचसीपी यशपाल उसे हवालात ले जाने की बजाय कचहरी की सैर कराता रहा। उसे कैंटीन पर भी लेकर गया। उसके बाद दानिश को लेकर एक अधिवक्ता के चेंबर पर जा पहुंचा। लोगों के अनुसार एचसीपी चेंबर के बाहर पड़ी बेंच पर आराम से बैठ गया और दानिश को आजाद छोड़ दिया।
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वह काफी देर तक घूमता रहा और अचानक ही बेंच पर बैठे यशपाल को धक्का देकर छत के रास्ते फरार हो गया। जबकि एडीजे-3 कोर्ट परिसर के दूसरे छोर पर है और जहां से दानिश फरार हुआ है, वह कोर्ट के बिल्कुल विपरीत दिशा में दूसरी ओर स्थित है।
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सवाल यह है कि एचसीपी कोर्ट की बजाय दानिश को दूसरी ओर लेकर क्यों पहुंचा। जिस जीने के रास्ते से फरार हुआ, ठीक उसके नजदीक ही अधिवक्ता के चेंबर के सामने जाकर क्यों बैठा? इस बारे में एसपी सिटी संजय सिंह का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। एचसीपी के खिलाफ भी लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
पहले से ही देख रखा था रास्ता
हत्यारोपी दानिश जिस तरह से जीने पर चढ़कर छत पर पहुंचकर दीवार के पार फांदा और वहां से पार्श्वनाथ प्लाजा की ओर होते हुए आराम से फरार हो गया, उसे देखकर यह अंदेशा हो रहा है कि दानिश ने फरार होने की पूरी प्लानिंग पहले ही कर ली थी।
उसने यह रास्ता पहले ही या तो देख लिया था, या किसी अन्य व्यक्ति से फरार होने का रास्ते के बारे में पूरी जानकारी ली थी। क्योंकि जिस तरह से इस रास्ते से आसानी से फरार हुआ है, वह बगैर रास्ते की जानकारी हुए संभव नहीं है। यही कारण है कि दानिश आराम से फरार हो गया और पुलिस देखती रह गई। उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने काफी हाथ-पांव मारे, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया।
जेल में दूसरे बंदियों से झगड़ा करने का भी है मामला दर्ज
जेल में भी दानिश शांत नहीं रहता है। यहां भी आए दिन साथी बंदियों से झगड़ा करने का आरोप लगता रहता है। जेल में साथी बंदी के साथ मारपीट करने का एक मामला दानिश पर थाना जनकपुरी में भी दर्ज है।
दोस्त के कत्ल के आरोप में था जेल में
ग्राम घानाखेड़ी निवासी दानिश पर देहात कोतवाली में तीन मामले दर्ज हैं। दानिश पर अपने ही दोस्त शादाब की हत्या करने का आरोप है। आरोप है कि दानिश ने 3 जनवरी 2012 में अपने दोस्त शादाब का कत्ल कर दिया था। तभी से वह जेल में बंद है। इसके अलावा देहात कोतवाली में 307 और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है।
पहले भी कचहरी से फरार हो चुके हैं दो बंदी
कचहरी परिसर से बंदी के फरार होने की यह पहली घटना नहीं है। बंदियों की अभिरक्षा में पुलिस लगातार कोताही बरत रही है। लगभग एक वर्ष पूर्व भी दो बंदी पुलिस कर्मियों की आंखों में मिर्च झोंक कर दीवार फांदकर आशा माडर्न स्कूल की ओर रास्ते से होते हुए फरार हो गए थे। जबकि दानिश भी उसी चारदीवारी की ओर से पार्श्वनाथ प्लाजा की ओर फरार हुआ है।
हाल में ही बंदियों के फरार होने की दो अन्य घटनाएं हुईं हैं। लगभग एक माह पूर्व दो बंदी जेल के सामने से दो पुलिसकर्मियों को धक्का देकर फरार हो गए थे। जबकि एक सप्ताह पूर्व भी एक बंदी जेल के पास से ही फरार हो गया था। हालांकि पुलिस हाल में फरार हुए तीनों बंदियों को गिरफ्तार कर चुकी है।