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हत्या करने पर पांच दोषियों को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 25 Aug 2016 12:20 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : file photo
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सहारनपुर में अपर सत्र न्यायाधीश ने पांच हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पांचों पर बहन के हत्यारोपी के भाई की हत्या करने का आरोप था। सुनवाई में पांचों हत्या के दोषी पाए गए।
थाना नकुड़ के गांव कंडेल निवासी पाली कश्यप की बेटी की हत्या कर दी गई थी। हत्या के जुर्म में सत्ता नाम का व्यक्ति जेल भेजा गया था। मामले में फैसले की बात चल रही थी।
23 अप्रैल 2013 को पाली का बेटा बबलू, मांगा और उसका भतीजा संजय गांव के ही रहने वाले सत्ता के मौसेरे भाई वीरेंद्र कुमार के घर पहुंचे थे। वह उसे फैसला करने का बहाना बनाकर अपने साथ मंजीत सरदार के डेरे पर ले गए थे।
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बुलावे पर वीरेंद्र के साथ ही सत्ता का भाई जगपाल और मंजीत सरदार भी डेरे पर पहुंचे थे। डेरे पर पहले से ही सहेंद्र और बिंदर मौजूद थे। यहां फैसले की बात करते-करते मामला बिगड़ गया था।
आरोप था कि यहां पांचों से बहन की हत्या का बदला लेने की बात कहते हुए जगपाल पर दरांती, डंडों और कट्टे की बटों से हमला कर दिया था। वीरेंद्र ने बचाने का प्रयास किया तो उस पर भी हमला कर दिया गया था।
घटना में जगपाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता मोहम्महद फारूख ने बताया कि वीरेंद्र की तहरीर पर थाना नकुड़ पर पांचों के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 307, 302, 404 और 506 में मुकदमा दर्ज किया गया था।
पांचों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। अपर सत्र न्यायाधीश बबीता रानी ने मामले की सुनवाई करते हुए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पांचों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही सात हजार रुपये का अर्थदंड भी प्रत्येक पर लगाया है, जो मृतक जगपाल की पत्नी को देने के आदेश दिए गए हैं।
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थाना नकुड़ के गांव कंडेल निवासी पाली कश्यप की बेटी की हत्या कर दी गई थी। हत्या के जुर्म में सत्ता नाम का व्यक्ति जेल भेजा गया था। मामले में फैसले की बात चल रही थी।
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23 अप्रैल 2013 को पाली का बेटा बबलू, मांगा और उसका भतीजा संजय गांव के ही रहने वाले सत्ता के मौसेरे भाई वीरेंद्र कुमार के घर पहुंचे थे। वह उसे फैसला करने का बहाना बनाकर अपने साथ मंजीत सरदार के डेरे पर ले गए थे।
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बुलावे पर वीरेंद्र के साथ ही सत्ता का भाई जगपाल और मंजीत सरदार भी डेरे पर पहुंचे थे। डेरे पर पहले से ही सहेंद्र और बिंदर मौजूद थे। यहां फैसले की बात करते-करते मामला बिगड़ गया था।
आरोप था कि यहां पांचों से बहन की हत्या का बदला लेने की बात कहते हुए जगपाल पर दरांती, डंडों और कट्टे की बटों से हमला कर दिया था। वीरेंद्र ने बचाने का प्रयास किया तो उस पर भी हमला कर दिया गया था।
घटना में जगपाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता मोहम्महद फारूख ने बताया कि वीरेंद्र की तहरीर पर थाना नकुड़ पर पांचों के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 307, 302, 404 और 506 में मुकदमा दर्ज किया गया था।
पांचों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। अपर सत्र न्यायाधीश बबीता रानी ने मामले की सुनवाई करते हुए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पांचों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही सात हजार रुपये का अर्थदंड भी प्रत्येक पर लगाया है, जो मृतक जगपाल की पत्नी को देने के आदेश दिए गए हैं।