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फर्जीवाड़े की जांच लटकी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 08 Nov 2016 01:39 AM IST
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सिंचाई विभाग में सींचपाल की फर्जी भर्ती और फर्जी प्रशिक्षण के रैकेट का पुलिस के खुलासा करने के बाद जांच लटक कर रह गई है। अभी तक न तो यह ही पूरा पता लगाया जा सका कि कितने लोगों को ट्रेनिंग कराकर ठगी की गई और न ही अभी तक पुलिस फर्जीवाडे के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर सकी है।
पुलिस ने ग्राम गुनारसा निवासी रवि की शिकायत पर थाना देवबंद में सिंचाई विभाग में नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा करने एवं फर्जी ट्रेनिंग दिलाने की एफआईआर दर्ज कराकर 20 अक्तूबर को बिजनौर के विकास खंड जलीलपुर एवं कीतरपुर से चार लोगों को पकड़ा, बाद में एक को छोड़ दिया था।
उस समय पुलिस ने दावा किया था कि 10 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जीवाड़ा किया गया है और इसका मास्टर माइंड लोनी निवासी सुशील जाटव को बताया। पुलिस ने लोनी में दबिश दी और उसके बेटे ललित को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए सहारनपुर लाया गया।
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उस समय पुलिस जोर शोर से दावा कर रही थी कि इसकी जड़ें काफी गहरी हैं। कई वरिष्ठ अधिकारी एवं सफेदपोश भी इसमें शामिल हैं। लेकिन 20 अक्तूबर की कार्रवाई के बाद से पुलिस पर न जाने ऐसा कौन सा दबाव पड़ा कि मामला पूरी तरह से ठंडे बस्ते में ही डाल दिया गया।
आरोपी कथित मास्टरमाइंड सुशील जाटव को गिरफ्तार करना तो दूर पुलिस उससे अभी तक पूछताछ तक नहीं कर पाई। यही नहीं 20 अक्तूबर को पुलिस ने दोनों विकास खंडों के खंड विकास अधिकारियों को हिरासत में ले लिया था। लेकिन उनकी तत्काल नियुक्ति होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया। लेकिन अभी तक उनसे पिछले कार्यकाल में रहे बीडीओ के बारे में पुलिस ने जानकारी तक नहीं की।
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तो सुशील जाटव ही पुलिस पर हावी होने लगा है। बताया जा रहा है कि उसने पुलिस के खिलाफ ही आरटीआई के तहत सूचना मांगी है कि उसके घर पर किसके आदेश पर छापा मारा गया और महिलाओं से अभद्रता की गई। जिससे पुलिस की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई है।
पुलिस फिलहाल आरोपी को जवाब देने में उलझ गई है। कार्रवाई तो अब पिछले 20 दिन से लटक ही चुकी है। इस मामले में एसएसपी मनोज तिवारी का कहना है कि फर्जीवाड़े में महत्वपूर्ण जानकारी की जा रही है। शीघ्र ही शेष आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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पुलिस ने ग्राम गुनारसा निवासी रवि की शिकायत पर थाना देवबंद में सिंचाई विभाग में नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा करने एवं फर्जी ट्रेनिंग दिलाने की एफआईआर दर्ज कराकर 20 अक्तूबर को बिजनौर के विकास खंड जलीलपुर एवं कीतरपुर से चार लोगों को पकड़ा, बाद में एक को छोड़ दिया था।
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उस समय पुलिस ने दावा किया था कि 10 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जीवाड़ा किया गया है और इसका मास्टर माइंड लोनी निवासी सुशील जाटव को बताया। पुलिस ने लोनी में दबिश दी और उसके बेटे ललित को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए सहारनपुर लाया गया।
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उस समय पुलिस जोर शोर से दावा कर रही थी कि इसकी जड़ें काफी गहरी हैं। कई वरिष्ठ अधिकारी एवं सफेदपोश भी इसमें शामिल हैं। लेकिन 20 अक्तूबर की कार्रवाई के बाद से पुलिस पर न जाने ऐसा कौन सा दबाव पड़ा कि मामला पूरी तरह से ठंडे बस्ते में ही डाल दिया गया।
आरोपी कथित मास्टरमाइंड सुशील जाटव को गिरफ्तार करना तो दूर पुलिस उससे अभी तक पूछताछ तक नहीं कर पाई। यही नहीं 20 अक्तूबर को पुलिस ने दोनों विकास खंडों के खंड विकास अधिकारियों को हिरासत में ले लिया था। लेकिन उनकी तत्काल नियुक्ति होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया। लेकिन अभी तक उनसे पिछले कार्यकाल में रहे बीडीओ के बारे में पुलिस ने जानकारी तक नहीं की।
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तो सुशील जाटव ही पुलिस पर हावी होने लगा है। बताया जा रहा है कि उसने पुलिस के खिलाफ ही आरटीआई के तहत सूचना मांगी है कि उसके घर पर किसके आदेश पर छापा मारा गया और महिलाओं से अभद्रता की गई। जिससे पुलिस की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई है।
पुलिस फिलहाल आरोपी को जवाब देने में उलझ गई है। कार्रवाई तो अब पिछले 20 दिन से लटक ही चुकी है। इस मामले में एसएसपी मनोज तिवारी का कहना है कि फर्जीवाड़े में महत्वपूर्ण जानकारी की जा रही है। शीघ्र ही शेष आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।