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बंदियों की फरारी प्रकरण में सिपाही निलंबित
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 24 Feb 2016 12:16 AM IST
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पुलिस अभिरक्षा में कोर्ट परिसर में सिपाही की आंखों में मिर्च झोंककर दो बंदियों के फरार होने के मामले में सिपाही शीशपाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
सोमवार को फरार होने वाले दो बंदियों में एक लुकमान पकड़ा गया था, जबकि दूसरा सरफराज अब तक फरार है। उसका कोई सुराग अभी नहीं लग पाया है। पुलिस अधिकारी कॉल डिटेल और सिपाहियों से जुड़े लिंक को खंगालने में जुटी हुई है।
देवबंद के गांव थीथकी में करीब दो वर्ष पूर्व पूरे दोहरे हत्याकांड में आरोपी इन बंदियों को जब सोमवार की दोपहर कोर्ट में पेशी पर जिला कारागार से गारद लाई थी, तो कोर्ट में नोवर्क होने के कारण बाकी आरोपियों को तो सदर हवालात में पहुंचा दिया था, जबकि दो आरोपी लुकमान और सरफराज आर्म्ड पुलिस के सिपाही शीशपाल सिंह की कस्टडी में थे।
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फोन पर बात करने के बहाने कोर्ट की दीवार के पास जाकर वे सिपाही की आंखों में मिर्च पाउडर डालकर फरार हो गए थे। बाद में लुकमान को पकड़ लिया गया था। हालांकि सरफराज हाथ नहीं आया था। अब तक उसका सुराग नहीं मिला है।
सिपाही को जेल भेजा
बंदियों के फरार होने में पेशी के सिपाही शीशपाल की भूमिका संदिग्ध है। थाना सदर बाजार में हवालात सदर में तैनात हेडकांस्टेबल कृष्णपाल की ओर से फरारी के दर्ज कराए गए मामले में फरार हुए हत्यारोपी सहित सिपाही शीशपाल सिंह को भी नामजद कराया गया है।
एसपी सिटी महेंद्र सिंह यादव ने बताया कि सिपाही की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है। फिलहाल उसे सस्पेंड कर जेल भेज दिया गया है और आगे जांच में उसकी कॉल डिटेल भी निकलवाई जाएगी। यदि मामले में उसकी संलिप्तता उजागर हुई तो इससे आगे की कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।
कहीं पहले ही तो नहीं रची गई साजिश
बंदियों के फरार होने के मामले में संदिग्ध पाए गए सिपाही को सस्पेंड कर जेल तो भेज दिया गया है। हालांकि इस प्रकरण में पड़ताल कर रही पुलिस टीमें खुद कई तरह के झोल में फंसी हुई हैं। फरार सरफराज को खोजने की जद्दोजहद के बीच यह भी जांच की जा रही है कि कहीं बंदियों को भगाने की पहले ही तो साजिश नहीं रची गई थी।
इस बिंदु पर जांच की एक बड़ी वजह यह है कि फरार होते समय इन्हीं दो बंदियों को काफी समय तक अन्य से अलग जगह पर सक्रिय रहने का मौका दिया गया।
प्रमुख सचिव तक पहुंचा फरारी का मामला
कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान बंदियों की फरारी का यह मामला शासन में प्रमुख सचिव कारागार आरके तिवारी तक भी पहुंचा है। सूत्रों के अनुसार प्रमुख सचिव की ओर से भी जिला कारागार से लेकर अन्य सरकारी तंत्र को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बंदियों की सुरक्षा और सतर्कता के प्रति जिम्मेदार रहने को कहा गया है।
थीतकी गांव तक गूंजता रहा फरारी का प्रकरण
जिले के देवबंद थाना क्षेत्र के जिस थीतकी गांव में हुए दोहरे हत्याकांड में ये बंदी आरोपी रहे हैं। उसी गांव तक बंदियों की फरारी का प्रकरण गूंजता रहा। अधिकतर ग्रामीणों में इसी बात को जानने की जिज्ञासा रही कि लुकमान तो पकड़ा गया सरफराज का क्या हुआ? पता चला है कि पुलिस की टीमों ने थीतकी गांवों में भी सरफराज के होने की संभावनाओं पर जानकारी जुटाई है।
मिर्च पाउडर किसने दिलवाया !
बंदियों के फरार होने में इस्तेमाल किए गए मिर्च पाउडर की गुत्थी अब तक पूरी तरह नहीं खोली गई है। अब तक की जांच में सिपाही और पकड़े गए लुकमान की ओर से जानकारी दी गई है कि यह मिर्च मुलाकात के समय मां से ही मिली थी। हालांकि पुलिस के आला अधिकारी अभी इसे लेकर खुद आशंकित हैं।
मिर्च पाउडर को लेकर वह यह भी छानबीन कर रहे हैं कि कहीं फोन पर बात करवाने से लेकर मिर्च पाउडर की व्यवस्था कराना भी कहीं साजिश का हिस्सा तो नहीं था। एसपी सिटी का कहना है कि पूरी पड़ताल होने पर ही सब कुछ साफ हो सकेगा।
बंदियों की पेशी में फिर खुली सतर्कता की पोल
पुलिस अभिरक्षा में बंदियों के फरार होने के मामले को चौबीस घंटे भी नहीं बीते कि मंगलवार दोपहर कोर्ट परिसर में कैदियों की पेशी में बरती जा रही सतर्कता की फिर से पोल खुल गई। कोर्ट परिसर में दोपहर को पेशी पर लाए जाते समय चार आरोपियों के लिए दो ही सिपाही साथ चल रहे थे।
इतना ही नहीं हथकड़ी बंधे आरोपी सिपाहियों से बहुत आगे चलते रहे। पुलिस जवानों के पास न तो डंडा था और न ही रायफल। सवाल यह है कि सुरक्षा और सतर्कता में ऐसी लापरवाही बार बार किए जाने पर क्या फिर से ऐसी घटनाएं सामने नहीं आएंगी? आखिर खाकी कब सबक लेगी।
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सोमवार को फरार होने वाले दो बंदियों में एक लुकमान पकड़ा गया था, जबकि दूसरा सरफराज अब तक फरार है। उसका कोई सुराग अभी नहीं लग पाया है। पुलिस अधिकारी कॉल डिटेल और सिपाहियों से जुड़े लिंक को खंगालने में जुटी हुई है।
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देवबंद के गांव थीथकी में करीब दो वर्ष पूर्व पूरे दोहरे हत्याकांड में आरोपी इन बंदियों को जब सोमवार की दोपहर कोर्ट में पेशी पर जिला कारागार से गारद लाई थी, तो कोर्ट में नोवर्क होने के कारण बाकी आरोपियों को तो सदर हवालात में पहुंचा दिया था, जबकि दो आरोपी लुकमान और सरफराज आर्म्ड पुलिस के सिपाही शीशपाल सिंह की कस्टडी में थे।
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फोन पर बात करने के बहाने कोर्ट की दीवार के पास जाकर वे सिपाही की आंखों में मिर्च पाउडर डालकर फरार हो गए थे। बाद में लुकमान को पकड़ लिया गया था। हालांकि सरफराज हाथ नहीं आया था। अब तक उसका सुराग नहीं मिला है।
सिपाही को जेल भेजा
बंदियों के फरार होने में पेशी के सिपाही शीशपाल की भूमिका संदिग्ध है। थाना सदर बाजार में हवालात सदर में तैनात हेडकांस्टेबल कृष्णपाल की ओर से फरारी के दर्ज कराए गए मामले में फरार हुए हत्यारोपी सहित सिपाही शीशपाल सिंह को भी नामजद कराया गया है।
एसपी सिटी महेंद्र सिंह यादव ने बताया कि सिपाही की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है। फिलहाल उसे सस्पेंड कर जेल भेज दिया गया है और आगे जांच में उसकी कॉल डिटेल भी निकलवाई जाएगी। यदि मामले में उसकी संलिप्तता उजागर हुई तो इससे आगे की कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।
कहीं पहले ही तो नहीं रची गई साजिश
बंदियों के फरार होने के मामले में संदिग्ध पाए गए सिपाही को सस्पेंड कर जेल तो भेज दिया गया है। हालांकि इस प्रकरण में पड़ताल कर रही पुलिस टीमें खुद कई तरह के झोल में फंसी हुई हैं। फरार सरफराज को खोजने की जद्दोजहद के बीच यह भी जांच की जा रही है कि कहीं बंदियों को भगाने की पहले ही तो साजिश नहीं रची गई थी।
इस बिंदु पर जांच की एक बड़ी वजह यह है कि फरार होते समय इन्हीं दो बंदियों को काफी समय तक अन्य से अलग जगह पर सक्रिय रहने का मौका दिया गया।
प्रमुख सचिव तक पहुंचा फरारी का मामला
कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान बंदियों की फरारी का यह मामला शासन में प्रमुख सचिव कारागार आरके तिवारी तक भी पहुंचा है। सूत्रों के अनुसार प्रमुख सचिव की ओर से भी जिला कारागार से लेकर अन्य सरकारी तंत्र को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बंदियों की सुरक्षा और सतर्कता के प्रति जिम्मेदार रहने को कहा गया है।
थीतकी गांव तक गूंजता रहा फरारी का प्रकरण
जिले के देवबंद थाना क्षेत्र के जिस थीतकी गांव में हुए दोहरे हत्याकांड में ये बंदी आरोपी रहे हैं। उसी गांव तक बंदियों की फरारी का प्रकरण गूंजता रहा। अधिकतर ग्रामीणों में इसी बात को जानने की जिज्ञासा रही कि लुकमान तो पकड़ा गया सरफराज का क्या हुआ? पता चला है कि पुलिस की टीमों ने थीतकी गांवों में भी सरफराज के होने की संभावनाओं पर जानकारी जुटाई है।
मिर्च पाउडर किसने दिलवाया !
बंदियों के फरार होने में इस्तेमाल किए गए मिर्च पाउडर की गुत्थी अब तक पूरी तरह नहीं खोली गई है। अब तक की जांच में सिपाही और पकड़े गए लुकमान की ओर से जानकारी दी गई है कि यह मिर्च मुलाकात के समय मां से ही मिली थी। हालांकि पुलिस के आला अधिकारी अभी इसे लेकर खुद आशंकित हैं।
मिर्च पाउडर को लेकर वह यह भी छानबीन कर रहे हैं कि कहीं फोन पर बात करवाने से लेकर मिर्च पाउडर की व्यवस्था कराना भी कहीं साजिश का हिस्सा तो नहीं था। एसपी सिटी का कहना है कि पूरी पड़ताल होने पर ही सब कुछ साफ हो सकेगा।
बंदियों की पेशी में फिर खुली सतर्कता की पोल
पुलिस अभिरक्षा में बंदियों के फरार होने के मामले को चौबीस घंटे भी नहीं बीते कि मंगलवार दोपहर कोर्ट परिसर में कैदियों की पेशी में बरती जा रही सतर्कता की फिर से पोल खुल गई। कोर्ट परिसर में दोपहर को पेशी पर लाए जाते समय चार आरोपियों के लिए दो ही सिपाही साथ चल रहे थे।
इतना ही नहीं हथकड़ी बंधे आरोपी सिपाहियों से बहुत आगे चलते रहे। पुलिस जवानों के पास न तो डंडा था और न ही रायफल। सवाल यह है कि सुरक्षा और सतर्कता में ऐसी लापरवाही बार बार किए जाने पर क्या फिर से ऐसी घटनाएं सामने नहीं आएंगी? आखिर खाकी कब सबक लेगी।