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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   22 Days, 18 Transactions, Removed 68 Million

22 दिन, 18 ट्रांजेक्शन, निकाले 68 लाख

Sat, 15 Apr 2017 12:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sat, 15 Apr 2017 12:18 AM IST
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22 Days, 18 Transactions, Removed 68 Million
पैसा - फोटो : Today City
सहारनपुर में 22 दिन, 18 ट्रांजेक्शन और तीन खाते में खप गए 68 लाख रुपये। फर्जीवाड़ा कर गबन करने वाले शातिरों ने 20 दिन में ही सरकारी खाते से 68 लाख रुपये उड़ा लिए।
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विभाग के अधिकारियों की नींद तब टूटी जब बैंक अधिकारियों ने खुद ही ट्रांजेक्शन रोक दी और विभाग से इसकी सूचना मांगी। अब हड़कंप मचा हुआ है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत सिविल लाइन क्षेत्र की पंजाब नेशनल बैंक में एनपीईजीईएल नाम से खाता है।

इस खाते में अंतिम बार 5 मार्च को 77,864 रुपये क्रेडिट हुए थे और इस खाते में कुल बैलेंस 7972388 रुपये हो गया था। इस खाते से विभाग द्वारा  तो दिसंबर 2016 से पहले ही रुपये निकाले गए थे।
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उसके बाद विभाग द्वारा कोई आहरण नहीं हुआ। लेकिन जब इस खाते से पैसा निकलना शुरू हुआ तो मात्र 22 दिन में ही 67.90 लाख रुपये निकल गए। फर्जीवाड़ा करने वाले ने 16 मार्च से 6 अप्रैल के बीच मात्र 22 दिन में यह धनराशि ट्रांसफर की।
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इस दौरान 18 ट्रांजेक्शन हुईं। विशेष बात यह है कि 18 ट्रांजेक्शन मात्र 8 दिन में की गईं और 8 दिन में 67.90 लाख रुपये तीन खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। ये खाते नेहा, दीपक सैनी और अतुल केबल नेटवर्क के नाम से हैं। पूरा पैसा इन खातों में ट्रांसफर किया गया।

फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों ने बड़ी सफाई से चेक लगाया। जो चेकबुक बीएसए के पास थी, उसी चेकबुक का चेक बना दिया गया। उस पर हस्ताक्षर भी बिल्कुल बीएसए के किए गए।

फर्जीवाड़ा करने वालों ने एक के बाद एक उसी चेकबुक के नंबर के चेक बैंक में जमा कर दिए और खातों में पैसे ट्रांसफर करा लिए।
जब खाते में मात्र 11,82,388 रुपये बैलेंस रह गए तो बैंक मैनेजर ने विभागीय लिपिक को फोन कर बैलेंस बढ़ाने के लिए कहा। जब बैलेंस की जानकारी हुई तब जाकर विभागीय अधिकारियों की नींद टूटी और फिर भागदौड़ शुरू कर दी।

बीएसए के पास जो चेकबुक थी उसी तरह का चेक फर्जी तरीके से तैयार किया गया। जो हस्ताक्षर चेक पर बीएसए ने किए थे, उसी प्रकार के हस्ताक्षर फर्जी चेक पर भी हैं। जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि किसी चेक को स्कैन किया गया है और फिर उसी तरह का चेक कंप्यूटर प्रिंटर के माध्यम से तैयार कराया गया है।

बीएसए बीपी सिंह ने सदर बाजार कोतवाली में दी गई तहरीर में बैंक के संबंधित कर्मचारियों की संलिप्तता भी जताई है। उनका कहना है कि बिना बैंक कर्मचारी के किसी के पास न तो चेक का नंबर पहुंच सकता और न ही चेक पर किए जाने वाले हस्ताक्षर की जानकारी किसी को हो सकती।

साथ ही लगातार इतने पैसे निकाले जाते रहे, किसी ने भी कोई जानकारी नहीं दी। जबकि विभाग के सभी कर्मचारियों को बैंक कर्मी अच्छी तरह से पहचानते हैं।

पंजाब नेशनल बैंक में 68 लाख रुपये के फर्जीवाड़े के बाद बैंक अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में लगे हुए हैं। किसी भी कार्रवाई से बचने के लिए खुद ही इस गबन की धनराशि को देने के लिए तैयार हो गए हैं।

लीड बैंक मैनेजर नीरज भारतीय का कहना है कि शिक्षा विभाग को उसकी गई हुई धनराशि को वापस किया जाएगा। चाहे बैंक को ही यह धनराशि क्यों न देनी पड़े। संबंधित बैंक कर्मी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

इतनी बड़ी धनराशि को फर्जी चेक और फर्जी हस्ताक्षर कर गबन कर लिया गया, लेकिन किसी भी बैंक कर्मी ने यह भी जानने का प्रयास नहीं किया कि चेक किसने दिया है, किसको दिया है, लगातार जा रही धनराशि पर कोई सवाल नहीं किया।


चुप्पी साधकर पैसा ट्रांसफर करते रहे। जबकि कोई प्राईवेट व्यक्ति अपना चेक लेकर पहुंच जाए, तो इतने सवाल करते हैं जैसे अपना नहीं बल्कि उधार मांगने पहुंच गया हो।

 
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