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पांच साल से रहते रहे, किसी को पता नहीं चल सका

Tue, 05 Feb 2019 12:57 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 05 Feb 2019 12:57 AM IST
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पांच साल से रहते रहे, किसी को पता नहीं चल सका
पांच साल से रहते रहे, किसी को पता भी नहीं चला
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सहारनपुर। बांग्लादेश से घुसपैठ करके भारत में प्रवेश कर गए और फिर देवबंद में आकर बस गए। पांच साल से बांग्लादेशी नागरिक रहते रहे। देवबंद में आसपास रहने वाले लोगों को इसका पता नहीं चल सका, न ही खुफिया टीम को ही इसकी भनक लग सकी। आम लोगों में ऐसे घुल- मिल गए कि किसी को इनके बांग्लादेशी होने का आभास भी नहीं हुआ।
देवबंद के रेलवे रोड पर टेलीफोन एक्सचेंज के सामने से पकड़े गए बांग्लादेशी पांच नागरिक एक-एक करके आते रहे और देवबंद में ही अपने पैर जमाते रहे। न सिर्फ मेल- जोल बढ़ाया, बल्कि अपना कारोबार भी शुरू कर दिया। जिससे किसी को भी उन पर संदेह न हो सके। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी इस्माइल ने बताया गया कि वह घुसपैठ कर भारत में पहुंचा और कई दिनों तक इधर-उधर घूमने के बाद देवबंद पहुंच गया। यहां किराए पर कमरा ले लिया और फिर टोपी बेचने का काम करने लगा। इस्माइल ने लगभग तीन साल पहले रफीक को भी बांग्लादेश से अपने पास देवबंद बुला लिया। उसने देवबंद में सिलाई का काम शुरू कर दिया। डेढ़ वर्ष पूर्व ही उसने मिनाज को भी देवबंद बुलाया। मिनाज ने देवबंद में कुछ दिन मेलजोल बढ़ाया, फिर पैसे के लेनदेन का काम शुरू कर दिया। मुनीर और अहमद सात-आठ माह पूर्व यहां पर घूमने के इरादे से आए। वह भी घुसपैठ करके ही आए, लेकिन वापस जाने की बजाय यहीं पर रहने लगे। अहमद ने रफीक के साथ मिलकर सिलाई का काम भी शुरू कर दिया था। जो भी बांग्लादेशी यहां आता, वो इनसे संपर्क करने लगा। जिससे आसपास के लोगों को संदेह होने लगा। जिस पर मामला खुफिया विभाग तक पहुंच गया और पांचों बांग्लादेशी नागरिक धरे गए।
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-- बार-बार जांच होती रही, फिर भी नहीं आए पकड़ में
-- देवबंद में बांग्लादेशी नागरिकों के होने के बार-बार इनपुट मिले। देवबंद में रहने वाले बाग्लादेशी आतंकी संगठन से जुड़े लोग अलग-अलग स्थानों पर पकड़े भी गए। पुलिस ने बांग्लादेशी आतंकियों से देवबंद के तार जुड़े होने के बाद लगातार बाहर से आकर रहने वालों की जांच कराई, फिर भी बांग्लादेशी नागरिक पुलिस एवं खुफिया विभाग की नजरों से बच गए। सोमवार को पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों पर आसपास के लोगों को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। जिस पर पांचों आरोपी पकड़े गए।
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-- पहले भी पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिक एवं आतंकी संगठन से जुड़े लोग
पिछले वर्ष से अब तक लगभग दस लोग बांग्लादेशी आतंकी संगठन से जुड़े हुए पकड़े जा चुके हैं, जो देवबंद में ही रहे। पिछले वर्ष छह अगस्त को मुजफ्फरनगर के ग्राम कुटेसरा से पकड़ा गया अब्दुल्ला अल मामून नाम का बांग्लादेशी भी बांग्लादेश के आतंकी संगठन अंसारुल्ला बांग्ला टीम का सक्रिय सदस्य था, जो देवबंद में काफी समय तक रहा। इसके बाद एटीएस ने फर्जी पासपोर्ट बनाकर रह रहे कुछ बांग्लादेशी आतंकियों की सूचना पर छापामार कार्रवाई की। जिसमें फैजान नाम का बांग्लादेशी आतंकी का नाम सामने आया, वह आज तक फरार चल रहा है जो अब्दुल्लाह का ही साथी बताया गया।
इस साल गत दो जनवरी को देवबंद से वसीम अहमद और अहशान कुरैशी को बांग्लादेशी आतंकी यूसुफ अली के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसका पासपोर्ट बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। मुरादनगर के ग्राम कुुर्सी में रह रहे बांग्लादेशी ने भी देवबंद से फर्जी पासपोर्ट बनवा लिया था। अक्तूबर 2017 में कोलकाता पुलिस ने दिल्ली से बांग्लादेशी रजाउल रहमान को पकड़ा था, जो देवबंद में काफी समय से रह रहा था। उसके बाद लखनऊ के चारबाग स्टेशन से एटीएस ने इमरान, रजीमुद्दीन, मोहम्मद फिरदौस को पकड़ा, जो देवबंद के ग्राम भनैड़ा में काफी दिनों से रह रहे थे, जबकि दिल्ली से सहारनपुर आ रहे एक बांग्लादेशी युवक को छह जून 2018 को गिरफ्तार किया गया।
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--- मकान मालिकों से होगी पूछताछ
देवबंद के रेलवे रोड से गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी पांचों नागरिक अलग-अलग मकान में किराए पर रह रहे थे। जिन लोगों के मकान में आरोपी किराए पर रह रहे थे, उन्होंने किसी के बारे में तहकीकात नहीं की और किराए पर मकान दे दिया। एसएसपी दिनेश कुमार ने बताया कि पुलिस मकान मालिकों से भी आरोपियों के बारे में पूछताछ करेेगी।

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...तो मोबाइल फोन किसकी आईडी पर चला रहे थे
पुलिस द्वारा देवबंद से गिरफ्ताए किए गए बांग्लादेशी नागरिक मोबाइल फोन का भी उपयोग कर रहे थे। आरोपियों ने भारत में ही मोबाइल फोन खरीदे और उनमें सिम भी खरीदकर डलवाए। मोबाइल सिम भी खरीदने में पहचान दस्तावेज दिए गए, जबकि पुलिस को आरोपियों के पास से पहचान संबंधी कोई दस्तावेज बरामद नहीं हुए। फिर सिम के लिए किसने दस्तावेज उपलब्ध कराए। एसएसपी दिनेश कुमार का कहना है कि पुलिस इस मामले में जांच कर रही है।
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