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दहेज हत्या के मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास
Updated Tue, 05 Sep 2017 12:48 AM IST
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दहेज हत्या में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास
सहारनपुर। दहेज की खातिर विवाहिता को जिंदा जलाकर मारने के मामले में कोर्ट ने 12 साल बाद पति, देवर और जेठ को आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी ससुर की मौत हो गई।
थाना रामपुर निवासी रेशमा की शादी 27 जनवरी 2005 को अंबेहटा पीरजादगान निवासी शमशाद के साथ हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद ही रेशमा के ससुरालियों ने दहेज के लिए रेशमा को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। घटना से छह माह पूर्व ससुरालियों को 10 हजार रुपये दिए ।लेकिन ससुराली 50 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर ससुरालियों ने रेशमा को तंग करना शुरू कर दिया। 16 जुलाई 2007 को ससुराल वालों ने रेशमा पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इससे रेशमा 70 प्रतिशत झुलस गई। मायके से लोगों ने पहुंचकर रेशमा को अस्पताल में भर्ती कराया।
इस मामले में रेशमा के पिता हनीफ अहमद ने रामपुर मनिहारन थाना में पति शमशाद, देवर नफीस एवं परवेज, ननद मैराज बानो, सास सईदा तथा ससुर रफीक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शासकीय सहायक अधिवक्ता जयवीर सिंह पुंडीर, विक्रम सिंह यादव ने बताया कि सात नवंबर 2007 को रेशमा की मौत हो गई। विवेचना के बाद पुलिस ने शमशाद, नफीस, रफीक और परवेज के खिलाफ अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
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अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार सिंघल ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर शमशाद, नफीस और परवेज को आजीवन कारावास एवं पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी ससुर रफीक की पहले ही मौत हो चुकी है।
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सहारनपुर। दहेज की खातिर विवाहिता को जिंदा जलाकर मारने के मामले में कोर्ट ने 12 साल बाद पति, देवर और जेठ को आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी ससुर की मौत हो गई।
थाना रामपुर निवासी रेशमा की शादी 27 जनवरी 2005 को अंबेहटा पीरजादगान निवासी शमशाद के साथ हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद ही रेशमा के ससुरालियों ने दहेज के लिए रेशमा को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। घटना से छह माह पूर्व ससुरालियों को 10 हजार रुपये दिए ।लेकिन ससुराली 50 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर ससुरालियों ने रेशमा को तंग करना शुरू कर दिया। 16 जुलाई 2007 को ससुराल वालों ने रेशमा पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इससे रेशमा 70 प्रतिशत झुलस गई। मायके से लोगों ने पहुंचकर रेशमा को अस्पताल में भर्ती कराया।
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इस मामले में रेशमा के पिता हनीफ अहमद ने रामपुर मनिहारन थाना में पति शमशाद, देवर नफीस एवं परवेज, ननद मैराज बानो, सास सईदा तथा ससुर रफीक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शासकीय सहायक अधिवक्ता जयवीर सिंह पुंडीर, विक्रम सिंह यादव ने बताया कि सात नवंबर 2007 को रेशमा की मौत हो गई। विवेचना के बाद पुलिस ने शमशाद, नफीस, रफीक और परवेज के खिलाफ अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
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अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार सिंघल ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर शमशाद, नफीस और परवेज को आजीवन कारावास एवं पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपी ससुर रफीक की पहले ही मौत हो चुकी है।