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इस्लाम में खुदकुशी करना हराम : गोरा
Sun, 08 Jun 2025 10:52 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 08 Jun 2025 10:52 PM IST
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मौलाना कारी इस्हाक गोरा।
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देवबंद। जनपद देवरिया में बकरीद की कुर्बानी के दिन खुद को कुर्बान करने के मामले में उलमा ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि यह कुर्बानी नहीं, बल्कि इस्लामी अकीदे (प्रथा) के खिलाफ उठाया गया कदम है। यह खुदकुशी है, जिसे इस्लाम में हराम करार दिया गया है। मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने रविवार को जारी बयान में कहा कि देवरिया में हुई इस घटना ने जहां समाज को सन्न कर दिया। वहीं इस्लामी हल्कों में भी गंभीर चिंता और अफसोस का माहौल है। साफ कहा कि इस्लाम में खुदकुशी हराम अमल है। यह न केवल एक बड़ा गुनाह है, बल्कि ऐसा शख्स अल्लाह की दी हुई जिंदगी को ठुकराता है, जो इस्लामी अकीदे के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि यह अफसोसनाक घटना इस बात की गवाही देती है कि आज आम मुसलमानों में इस्लामी तालीम और समझ की भारी कमी है। कुर्बानी का मकसद जानवर को मारना नहीं, बल्कि अल्लाह के हुक्म की इताअत (आज्ञा का पालन) है। मगर किसी इंसान का खुद को कुर्बान कर देना न शरीयत में जायज है, न इंसानियत में।
इस्लाम जज्बात नहीं हिकमत (समझ) और इल्म का मजहब है। हर काम की हदें, तरीके और मकसद शरीयत ने तय किए हैं। खुद की गर्दन काटना न कुर्बानी है, न इबादत बल्कि यह शैतान का बहकावा है।
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उन्होंने कहा कि यह अफसोसनाक घटना इस बात की गवाही देती है कि आज आम मुसलमानों में इस्लामी तालीम और समझ की भारी कमी है। कुर्बानी का मकसद जानवर को मारना नहीं, बल्कि अल्लाह के हुक्म की इताअत (आज्ञा का पालन) है। मगर किसी इंसान का खुद को कुर्बान कर देना न शरीयत में जायज है, न इंसानियत में।
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इस्लाम जज्बात नहीं हिकमत (समझ) और इल्म का मजहब है। हर काम की हदें, तरीके और मकसद शरीयत ने तय किए हैं। खुद की गर्दन काटना न कुर्बानी है, न इबादत बल्कि यह शैतान का बहकावा है।
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