{"_id":"676ca02dafc8f4e26406ec2d","slug":"children-learning-kakhara-under-the-open-sky-in-cold-weather-saharanpur-news-c-30-1-smrt1053-139012-2024-12-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: सर्द मौसम में खुले आसमान के नीचे बच्चे सीख रहे ककहरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: सर्द मौसम में खुले आसमान के नीचे बच्चे सीख रहे ककहरा
विज्ञापन
विज्ञापन
गंगोह। गांव मोहनपुरा स्थित प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत 131 मासूम सर्दी मौसम के बीच खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय का भवन जर्जर होने के कारण डेढ़ वर्ष पहले तोड़ा गया था, जिसके बाद अभी तक उसके निर्माण का कार्य शुरू तक नहीं किया गया है।
हिम्मत है अभिभावकों की, जो ऐसे हालातों में भी अपने नौनिहालों को विद्यालय भेज रहे हैं।
दरअसल, विद्यालय के पास केवल एक कमरा है, जो प्रधानाध्यापक के कार्यालय और सामान रखने में इस्तेमाल किया जा रहा है। 131 विद्यार्थियों और पांच शिक्षकों के पढ़ने और बैठने के लिए विद्यालय के पास अन्य कोई कक्ष नहीं है। इस स्थिति में शिक्षक डेढ़ साल से विद्यार्थियों को विद्यालय के खुले परिसर में जमीन पर बिछी दरी पर बिठाकर पढ़ा रहे हैं।
प्रधानाध्यापक ब्रह्मपाल सिंह का कहना है कि भवन निर्माण के लिए विभाग से धनराशि आई थी, लेकिन समय पर काम न शुरू होने के कारण धनराशि वापस चली गई। उधर, अभिभावकों का कहना है कि गर्मियों और बरसात के दिनों में भी उनके बच्चे खुले में ही बैठकर पढ़ते हैं। विभाग को जल्द ही भवन बनवाकर देना चाहिए, जिससे कि उनके बच्चे सुरक्षित और सुविधा के साथ शिक्षा ग्रहण कर सकें। ग्राम प्रधान राशिदा के पति नासिर ने बताया कि विद्यालय के पास अपना भवन नहीं होना निंदनीय है। वह कई बार विभाग और शिक्षकों से भवन के लिए कह चुके हैं।
विज्ञापन
हिम्मत है अभिभावकों की, जो ऐसे हालातों में भी अपने नौनिहालों को विद्यालय भेज रहे हैं।
दरअसल, विद्यालय के पास केवल एक कमरा है, जो प्रधानाध्यापक के कार्यालय और सामान रखने में इस्तेमाल किया जा रहा है। 131 विद्यार्थियों और पांच शिक्षकों के पढ़ने और बैठने के लिए विद्यालय के पास अन्य कोई कक्ष नहीं है। इस स्थिति में शिक्षक डेढ़ साल से विद्यार्थियों को विद्यालय के खुले परिसर में जमीन पर बिछी दरी पर बिठाकर पढ़ा रहे हैं।
विज्ञापन
प्रधानाध्यापक ब्रह्मपाल सिंह का कहना है कि भवन निर्माण के लिए विभाग से धनराशि आई थी, लेकिन समय पर काम न शुरू होने के कारण धनराशि वापस चली गई। उधर, अभिभावकों का कहना है कि गर्मियों और बरसात के दिनों में भी उनके बच्चे खुले में ही बैठकर पढ़ते हैं। विभाग को जल्द ही भवन बनवाकर देना चाहिए, जिससे कि उनके बच्चे सुरक्षित और सुविधा के साथ शिक्षा ग्रहण कर सकें। ग्राम प्रधान राशिदा के पति नासिर ने बताया कि विद्यालय के पास अपना भवन नहीं होना निंदनीय है। वह कई बार विभाग और शिक्षकों से भवन के लिए कह चुके हैं।
विज्ञापन

पुवायां के गांव मुड़िया वैश्य निवासी रागिनी का फाइल फोटो। स्रोत मायके के लोग