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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद
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- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से की मांग, गैर संवैधानिक कानूनों पर लगे रोक
- भीम आर्मी प्रमुख ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये रखी अपनी बात
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। भीम आर्मी प्रमुख एवं आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के समक्ष भारत में मानवाधिकार का मुद्दा उठाया है। उन्होंने किसान आंदोलन एवं सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान मानवाधिकारों का उल्लंघन किए जाने का आरोप लगाया है।
पार्टी के मीडिया प्रभारी टिंकू कपिल ने बताया कि सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में चंद्रशेखर आजाद ने अपनी बात कही। आजाद ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में लोगों के मानवाधिकार होते हैं और वे मानवाधिकार स्वतंत्र होते हैं, लेकिन भारत में मानवाधिकारों को कुचला जा रहा है। सरकार के विरुद्ध आवाज उठाने वालों को अलोकतांत्रिक तरीकों से प्रताड़ित किया जाता हैं। विशेष रूप से दलितों व अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर उत्पीड़न किया जा रहा है।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए भारत सरकार ने आंदोलनकारियों पर आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठी बल का प्रयोग किया। आंदोलन में शामिल बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं का भी उत्पीड़न किया गया।
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चंद्रशेखर आजाद ने इस दौरान सीएए विरोधी आंदोलन का भी जिक्र कर कहा कि आंदोलनकारियों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर उनके विरोध को दबा दिया गया। सरकार हर उस आवाज को दबा देना चाहती है, जो सरकार के विरोध में उठती है।
चंद्रशेखर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अनुरोध किया कि मानवाधिकारों का पालन कराने के लिए भारत से आग्रह करे और सरकार द्वारा बनाए गए गैर संवैधानिक कानूनों पर भी रोक लगाई जाए।
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- भीम आर्मी प्रमुख ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये रखी अपनी बात
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। भीम आर्मी प्रमुख एवं आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के समक्ष भारत में मानवाधिकार का मुद्दा उठाया है। उन्होंने किसान आंदोलन एवं सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान मानवाधिकारों का उल्लंघन किए जाने का आरोप लगाया है।
पार्टी के मीडिया प्रभारी टिंकू कपिल ने बताया कि सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में चंद्रशेखर आजाद ने अपनी बात कही। आजाद ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में लोगों के मानवाधिकार होते हैं और वे मानवाधिकार स्वतंत्र होते हैं, लेकिन भारत में मानवाधिकारों को कुचला जा रहा है। सरकार के विरुद्ध आवाज उठाने वालों को अलोकतांत्रिक तरीकों से प्रताड़ित किया जाता हैं। विशेष रूप से दलितों व अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर उत्पीड़न किया जा रहा है।
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चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए भारत सरकार ने आंदोलनकारियों पर आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठी बल का प्रयोग किया। आंदोलन में शामिल बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं का भी उत्पीड़न किया गया।
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चंद्रशेखर आजाद ने इस दौरान सीएए विरोधी आंदोलन का भी जिक्र कर कहा कि आंदोलनकारियों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर उनके विरोध को दबा दिया गया। सरकार हर उस आवाज को दबा देना चाहती है, जो सरकार के विरोध में उठती है।
चंद्रशेखर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अनुरोध किया कि मानवाधिकारों का पालन कराने के लिए भारत से आग्रह करे और सरकार द्वारा बनाए गए गैर संवैधानिक कानूनों पर भी रोक लगाई जाए।