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Saharanpur: जल्द शुरू होगा सीएफसी, बढ़ेगा वुड कार्विंग का निर्यात,उच्च मशीनों के साथ बनेगा विपणन सेंटर
Sun, 18 Sep 2022 11:57 PM IST
मेरठ ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Sep 2022 11:57 PM IST
सार
सहारनपुर के पिलखनी में बन रहे वुड कार्विंग के कॉमन फैसिलिटी सेंटर का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। इसमें उच्च स्तरीय मशीनों के साथ ही विपणन सेंटर भी बनेगा। इसके बनने से जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों की न सिर्फ गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि निर्यात में भी इजाफा होगा।
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पिलखनी में तैयार हो रहा सीएफसी
- फोटो : SAHARANPUR
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विस्तार
सहारनपुर, पिलखनी में बन रहे वुड कार्विंग के कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। इसमें उच्च स्तरीय मशीनों के साथ ही विपणन सेंटर भी बनेगा। इसके बनने से जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों की न सिर्फ गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि निर्यात में भी इजाफा होगा।
जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों की दुनिया भर में काफी मांग है। इसके चलते यहां से बड़े पैमाने पर विश्व के कई देशों को वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात होता है। जनपद में वुड कार्विंग उत्पादों का वार्षिक कारोबार करीब 1400 से 1600 करोड़ रुपये का है। इसमें से 1100 से 1200 करोड़ रुपये का निर्यात विदेशों में होता है। यह उद्योग एक से सवा लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार भी दे रहा है। जनपद में काष्ठ हस्तशिल्प उद्योगों को 250 से 300 वर्ष पुराना माना जाता है।
हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि यह उद्योग मुगल काल से ही जनपद में शुरू हो गया था। उनका कहना है कि काष्ठ हस्तशिल्प की नक्काशी का यह विश्व प्रसिद्ध कारोबार कश्मीरियों के संपर्क में आकर शुरू हुआ था। वुड कार्विंग उत्पादों की गुणवत्ता को और बढ़ाने के उद्देश्य से कॉमन फेसिलिटी सेंटर (सीएफसी) की स्थापना की जा रही है।
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सुधरेगी गुणवत्ता, बढेगा निर्यात
दस करोड़ रुपये की लागत वाले इस सामान्य सुविधा केंद्र के शुरू होने से काष्ठ हस्तशिल्प के उद्यमियों, हस्त शिल्पियों से लेकर निर्यातकों तक को काफी लाभ होगा। इसमें उच्च स्तरीय डिजाइनिंग सेंटर, लैब, सीजनिंग प्लांट, मार्केटिंग सेंटर भी बनाए जा रहे हैं। इससे वुड कार्विंग उत्पादों की गुणवत्ता में इजाफा होगा और निर्यात भी बढे़गा। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्र, प्रशिक्षण केंद्र और विपणन भवन भी होंगे। इसके पास ही करीब 60 एकड़ में वुड सिटी भी स्थापित की जा रही हैं। जिसमें सिर्फ निर्यातक इकाइयां ही लगेंगी। - सिद्धार्थ यादव, उपायुक्त उद्योग
अमेरिका एवं यूरोप में अधिक निर्यात
जनपद से वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात विश्व के कई देशों में होता है। इसमें 40 से 45 प्रतिशत अमेरिका, 20 से 25 फीसदी यूरोपीय देशों और 10 से 15 प्रतिशत निर्यात मध्य पूर्व के देशों में होता है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, दक्षिणी अफ्रीका, दुबई के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, रूस, यूक्रेन आदि में भी काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों को काफी पसंद किया जाता है।
यह भी पढे़ं: वर्दी का रौब: बागपत में सिपाही ने युवक को जड़ा थप्पड़, अभद्रता पर इंस्पेक्टर लाइन हाजिर
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जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों की दुनिया भर में काफी मांग है। इसके चलते यहां से बड़े पैमाने पर विश्व के कई देशों को वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात होता है। जनपद में वुड कार्विंग उत्पादों का वार्षिक कारोबार करीब 1400 से 1600 करोड़ रुपये का है। इसमें से 1100 से 1200 करोड़ रुपये का निर्यात विदेशों में होता है। यह उद्योग एक से सवा लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार भी दे रहा है। जनपद में काष्ठ हस्तशिल्प उद्योगों को 250 से 300 वर्ष पुराना माना जाता है।
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हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि यह उद्योग मुगल काल से ही जनपद में शुरू हो गया था। उनका कहना है कि काष्ठ हस्तशिल्प की नक्काशी का यह विश्व प्रसिद्ध कारोबार कश्मीरियों के संपर्क में आकर शुरू हुआ था। वुड कार्विंग उत्पादों की गुणवत्ता को और बढ़ाने के उद्देश्य से कॉमन फेसिलिटी सेंटर (सीएफसी) की स्थापना की जा रही है।
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सुधरेगी गुणवत्ता, बढेगा निर्यात
दस करोड़ रुपये की लागत वाले इस सामान्य सुविधा केंद्र के शुरू होने से काष्ठ हस्तशिल्प के उद्यमियों, हस्त शिल्पियों से लेकर निर्यातकों तक को काफी लाभ होगा। इसमें उच्च स्तरीय डिजाइनिंग सेंटर, लैब, सीजनिंग प्लांट, मार्केटिंग सेंटर भी बनाए जा रहे हैं। इससे वुड कार्विंग उत्पादों की गुणवत्ता में इजाफा होगा और निर्यात भी बढे़गा। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्र, प्रशिक्षण केंद्र और विपणन भवन भी होंगे। इसके पास ही करीब 60 एकड़ में वुड सिटी भी स्थापित की जा रही हैं। जिसमें सिर्फ निर्यातक इकाइयां ही लगेंगी। - सिद्धार्थ यादव, उपायुक्त उद्योग
अमेरिका एवं यूरोप में अधिक निर्यात
जनपद से वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात विश्व के कई देशों में होता है। इसमें 40 से 45 प्रतिशत अमेरिका, 20 से 25 फीसदी यूरोपीय देशों और 10 से 15 प्रतिशत निर्यात मध्य पूर्व के देशों में होता है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, दक्षिणी अफ्रीका, दुबई के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, रूस, यूक्रेन आदि में भी काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों को काफी पसंद किया जाता है।
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