सहारनपुर। जैन बाग स्थित श्री दिगंबर जैन प्राचीन जिनालय में दशलक्षण पर्व के दसवें दिवस में उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की गई। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के विषय में अनुव्रती श्रावक सीए अनिल जैन ने बताया आध्यात्म मार्ग में ब्रह्मचर्य को सर्वश्रेष्ठ माना गया है, यही मार्ग मोक्ष मार्ग है। इंद्रिय विषयों में राग छोड़कर अपने आत्म स्वरूप में लीन रहना ब्रह्मचर्य है। इस व्रत को %अणुव्रत% और %महाव्रत% दोनों ही रूप में ग्रहण किया जाता है। महाव्रत के रूप में %उत्तम-ब्रह्मचर्य% के धारी तो केवल दिगंबर महा मुनिराज होते है, श्रावकों के लिए इस व्रत को अणुव्रत के रूप में ग्रहण करने का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में है। जो श्रावक अपनी विवाहिता स्त्री में संतोष कर स्त्री मात्र में राग का त्याग करते हैं, वह ब्रह्मचर्य अणुव्रत के धारी होते हैं। जो वृद्धा, बालिका, यौवना स्त्री को मां, बहन बेटी मानकर स्त्री संबंधी राग का त्याग करते हैं, अपने आत्म स्वरूप में रमण करते हैं, वे तीनों लोकों में पूज्यनीय होते हैं एवं ब्रह्मचर्य व्रत के धारी होते हैं।
इस दौरान कुलभूषण जैन, राकेश जैन, संदीप जैन बिट्टू जैन विशाल जैन प्रदीप जैन राजीव जैन टीटी जैन प्रवीण जैन, मनोज जैन वैभव जैन आकाश जैन नवीन जैन, अनिल जैन, नवीन जैन, मनीष जैन, प्रदीप जैन, अरिंज जैन, मोहित जैन पंकज जैन, प्रवीण जैन, राजीव जैन, नरेश जैन, दिनेश जैन, संदीप जैन, सौरभ जैन, अशोक जैन, मुकेश जैन, नीरज जैन, तरुण जैन, प्रकाम जैन आदि मौजूद रहे।