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Saharanpur News: चार दशक से चला रहे महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने की मुहिम
Mon, 23 Jan 2023 05:15 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Mon, 23 Jan 2023 05:15 PM IST
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केएन तिवारी
सहारनपुर/चिलकाना। समाज के दबे कुचले वंचित वर्ग और महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने को सामाजिक संस्था दिशा के संस्थापक केएन तिवारी पिछले 39 साल से मुहिम चला रहे हैं। उनके अभियान से जुड़ कर करीब आठ हजार महिलाएं आर्थिक रूप से तरक्की कर चुकी हैं।
मूलरूप से उत्तराखंड के रहने वाले केएन तिवारी ने चिलकाना सुल्तानपुर में वर्ष 1984 में दिशा सामाजिक संस्था का गठन किया था। उन्होंने महिलाओं को समाज में पुरुषों के बराबर हक दिलाने के लिए महिला सामाख्या कार्यक्रम से अपने अभियान की शुरुआत की। महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा तथा उनके हक की बात को उच्च स्तर और जन-जन तक पहुंचाने के लिए आंदोलनों का सहारा लिया। महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया। वर्तमान में दिशा के तत्वावधान में क्षेत्र भर में 700 स्वयं सहायता समूह चल रहे हैं। इनसे जुड़ी करीब आठ हजार महिलाएं अपना रोजगार स्थापित कर स्वावलंबन की इबारत लिख रही हैं।
महिला उत्पीड़न से संबंधित मामले दिशा द्वारा गठित नारी अदालत में पेश किए जाते हैं। हर माह की 10 तारीख को दिशा के कैंपस में नारी अदालत लगती है। इसमें संस्था की चार वरिष्ठ महिलाओं का एक समूह महिला उत्पीड़न के मामले सुनता है। इस अदालत में दहेज तथा घरेलू हिंसा आदि मामलों की सुनवाई की जाती है। दोनों पार्टियों को बैठाकर संभव होने वाले मामलों में सुलह करा दी जाती है। यदि कोई पार्टी संतुष्ट नहीं होती है, तो उसे वन स्टॉप सेंटर अथवा थाने जाने के लिए कह दिया जाता है।
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दिशा संस्था द्वारा मुस्लिम किशोरियों के लिए किशोरी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इन सेंटरों में 12 वर्ष से अधिक की मुस्लिम किशोरियों को तीन वर्ष में कक्षा पांच तक की पढ़ाई कराई जाती है तथा उसकी परीक्षा कराकर अन्य विद्यालयों में प्रवेश करा दिया जाता है। एक सेंटर में 25 से 30 किशोरियां शिक्षा ग्रहण करती हैं।
दिशा के इन प्रयासों के चलते वर्ष 2005 में तत्कालीन राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने केएन तिवारी को रेड एंड व्हाइट सामाजिक बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा भी तिवारी को अनेक संस्थाओं द्वारा समाज हित के लिए किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
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मूलरूप से उत्तराखंड के रहने वाले केएन तिवारी ने चिलकाना सुल्तानपुर में वर्ष 1984 में दिशा सामाजिक संस्था का गठन किया था। उन्होंने महिलाओं को समाज में पुरुषों के बराबर हक दिलाने के लिए महिला सामाख्या कार्यक्रम से अपने अभियान की शुरुआत की। महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा तथा उनके हक की बात को उच्च स्तर और जन-जन तक पहुंचाने के लिए आंदोलनों का सहारा लिया। महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया। वर्तमान में दिशा के तत्वावधान में क्षेत्र भर में 700 स्वयं सहायता समूह चल रहे हैं। इनसे जुड़ी करीब आठ हजार महिलाएं अपना रोजगार स्थापित कर स्वावलंबन की इबारत लिख रही हैं।
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महिला उत्पीड़न से संबंधित मामले दिशा द्वारा गठित नारी अदालत में पेश किए जाते हैं। हर माह की 10 तारीख को दिशा के कैंपस में नारी अदालत लगती है। इसमें संस्था की चार वरिष्ठ महिलाओं का एक समूह महिला उत्पीड़न के मामले सुनता है। इस अदालत में दहेज तथा घरेलू हिंसा आदि मामलों की सुनवाई की जाती है। दोनों पार्टियों को बैठाकर संभव होने वाले मामलों में सुलह करा दी जाती है। यदि कोई पार्टी संतुष्ट नहीं होती है, तो उसे वन स्टॉप सेंटर अथवा थाने जाने के लिए कह दिया जाता है।
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दिशा संस्था द्वारा मुस्लिम किशोरियों के लिए किशोरी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इन सेंटरों में 12 वर्ष से अधिक की मुस्लिम किशोरियों को तीन वर्ष में कक्षा पांच तक की पढ़ाई कराई जाती है तथा उसकी परीक्षा कराकर अन्य विद्यालयों में प्रवेश करा दिया जाता है। एक सेंटर में 25 से 30 किशोरियां शिक्षा ग्रहण करती हैं।
दिशा के इन प्रयासों के चलते वर्ष 2005 में तत्कालीन राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने केएन तिवारी को रेड एंड व्हाइट सामाजिक बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा भी तिवारी को अनेक संस्थाओं द्वारा समाज हित के लिए किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया जा चुका है।