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Saharanpur News: ब्यूटी पार्लर, जूता विक्रेता और दर्जी को भी देना होगा लाइसेंस शुल्क
Sun, 28 Jun 2026 01:25 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 28 Jun 2026 01:25 AM IST
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सहारनपुर। नगर निगम ने प्रतिष्ठानों के लाइसेंस शुल्क को लेकर बड़ा बदलाव किया है। स्कूल, क्लीनिक, पैथोलॉजी सेंटर और गैस एजेंसी आदि पर शुल्क कम किया गया है। वहीं, अब ब्यूटी पार्लर, जूतों की दुकान और यहां तक की दर्जी की दुकान भी लाइसेंस शुल्क के दायरे में शामिल होंगी। इसका खाका तैयार कर लिया गया है। उन्हें भी एक निर्धारित लाइसेंस शुल्क देना होगा, जो सालाना होगा।
हाल ही में नगर निगम की तरफ से 136 प्रकार के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। अनेक प्रकार के प्रतिष्ठानों के शुल्क शासन द्वारा निर्धारित हैं, लेकिन नगर निगम बोर्ड उन्हें अपने हिसाब से कम या अधिक कर सकता है। इस बार भी नगर निगम ने कई प्रकार के शुल्क कम किए हैं, लेकिन कई प्रकार के व्यावसायिक कार्यों को शुल्क के दायरे में रखा है। किससे कितना शुल्क वसूला जाएगा यह कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी पास हो चुका हे। अब यह बोर्ड बैठक में जाएगा, जहां से हरी झंडी मिलने के बाद यह लागू होगा। ऐसे छोटे रोजगार पर लाइसेंस शुल्क वसूली का प्रभाव आम जनता पर भी पड़ेगा।
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लाइसेंस शुल्क के दायरे में रखे गए प्रतिष्ठान
प्रतिष्ठान-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- निर्धारित लाइसेंस शुल्क
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वाटर प्लांट एवं वाटर बॉटलिंग प्लांट-- -- -- -- क्रमश: 2000 और 5000
कपड़े की दुकान 500 वर्ग फीट से कम-- -- -- 2000
जिम फिटनेस सेंटर एक हजार वर्ग फीट तक-- -5000
ब्यूटी पार्लर-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- 5000
टेलर दुकान-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -500
फुटवियर दुकान-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- 5000
पुराने दोपहिया वाहन क्रय-विक्रय-- -- -- -- -- 5000
लकड़ी की दुकान व शोरूम-- -- -- -- -- -- -- 2000
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इन्हें मिली राहत
प्रतिष्ठान-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -निर्धारित शुल्क-- -- -- -पहले का शुल्क
पांचवीं तक प्ले स्कूल-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- 00-- -- -- -- -- -- -- -5000
सीबीएसई और आईसीएसई स्कूल 12वीं तक-- -- -- -- -- -10,000-- -- -- -- -- -- 25,000
प्राइवेट क्लीनिक एलोपैथिक-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- 4000-- -- -- -- -- -- -- 8000
पैथोलॉजी सेंटर, एक्स-रे सेंटर और अल्ट्रासाउंड सेंटर-- -- -4000-- -- -- -- -- -- -- 8000
एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई संयुक्त सेंटर-- -- -- 6000-- -- -- -- -- -- -- 10,000
गैस एजेंसी-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- 5000-- -- -- -- -- -- -- 10,000
मीट की दुकान-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- 2000 3000
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पार्षदों का पक्ष
- कार्यकारिणी सदस्य एवं पार्षद मंसूर बदर का कहना है कि निजी स्कूल और निजी अस्पतालों का शुल्क आधा कर दिया गया है। इससे आपत्ति नहीं है, लेकिन छोटे कामगारों, आरा मशीन संचालकों को भी राहत दी जानी चाहिए थी।
-कार्यकारिणी सदस्य एवं पार्षद टिंकू अरोड़ा का कहना है कि जिनकी प्रतिदिन लाखों रुपये में कमाई है उनका शुल्क आधा किया गया है, जबकि छोटे दुकानदारों के हित का ध्यान नहीं रखा गया है। समिति की बैठक में विरोध कर चुका हूं।
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जनता के हित को ध्यान में रखते हुए स्कूलों और अस्पतालों का शुल्क कम किया गया है और यह कार्यकारिणी समिति का निर्णय है। कई नए व्यवसायों को शामिल किया गया है। प्रयास यही है कि सभी नियमों के दायरे में आएं।
- डॉ. अजय कुमार, महापौर
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हाल ही में नगर निगम की तरफ से 136 प्रकार के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। अनेक प्रकार के प्रतिष्ठानों के शुल्क शासन द्वारा निर्धारित हैं, लेकिन नगर निगम बोर्ड उन्हें अपने हिसाब से कम या अधिक कर सकता है। इस बार भी नगर निगम ने कई प्रकार के शुल्क कम किए हैं, लेकिन कई प्रकार के व्यावसायिक कार्यों को शुल्क के दायरे में रखा है। किससे कितना शुल्क वसूला जाएगा यह कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी पास हो चुका हे। अब यह बोर्ड बैठक में जाएगा, जहां से हरी झंडी मिलने के बाद यह लागू होगा। ऐसे छोटे रोजगार पर लाइसेंस शुल्क वसूली का प्रभाव आम जनता पर भी पड़ेगा।
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लाइसेंस शुल्क के दायरे में रखे गए प्रतिष्ठान
प्रतिष्ठान
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वाटर प्लांट एवं वाटर बॉटलिंग प्लांट
कपड़े की दुकान 500 वर्ग फीट से कम
जिम फिटनेस सेंटर एक हजार वर्ग फीट तक
ब्यूटी पार्लर
टेलर दुकान
फुटवियर दुकान
पुराने दोपहिया वाहन क्रय-विक्रय
लकड़ी की दुकान व शोरूम
इन्हें मिली राहत
प्रतिष्ठान
पांचवीं तक प्ले स्कूल
सीबीएसई और आईसीएसई स्कूल 12वीं तक
प्राइवेट क्लीनिक एलोपैथिक
पैथोलॉजी सेंटर, एक्स-रे सेंटर और अल्ट्रासाउंड सेंटर
एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई संयुक्त सेंटर
गैस एजेंसी
मीट की दुकान
पार्षदों का पक्ष
- कार्यकारिणी सदस्य एवं पार्षद मंसूर बदर का कहना है कि निजी स्कूल और निजी अस्पतालों का शुल्क आधा कर दिया गया है। इससे आपत्ति नहीं है, लेकिन छोटे कामगारों, आरा मशीन संचालकों को भी राहत दी जानी चाहिए थी।
-कार्यकारिणी सदस्य एवं पार्षद टिंकू अरोड़ा का कहना है कि जिनकी प्रतिदिन लाखों रुपये में कमाई है उनका शुल्क आधा किया गया है, जबकि छोटे दुकानदारों के हित का ध्यान नहीं रखा गया है। समिति की बैठक में विरोध कर चुका हूं।
जनता के हित को ध्यान में रखते हुए स्कूलों और अस्पतालों का शुल्क कम किया गया है और यह कार्यकारिणी समिति का निर्णय है। कई नए व्यवसायों को शामिल किया गया है। प्रयास यही है कि सभी नियमों के दायरे में आएं।
- डॉ. अजय कुमार, महापौर