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स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी से घिरा आयुष

Tue, 24 Aug 2021 11:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Aug 2021 11:42 PM IST
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Ayush surrounded by spinal muscular atrophy
सहारनपुर। दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी ने सहारनपुर जिले के दो लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। इनमें एक हैं बड़गांव के रहने वाले आयुष त्यागी, जो इन दिनों सहारनपुर के कपिल विहार में रहते हैं। इस बीमारी का इलाज बेहद महंगा है, जिस कारण आयुष के पिता सचिन त्यागी ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर मदद की गुहार लगाई है।
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सचिन त्यागी ने बताया कि उनके बेटे आयुष की उम्र 19 वर्ष है। आयुष पढ़ाई में बहुत अच्छा और सीबीएसई से 10वीं में 90 प्रतिशत तथा इंटरमीडिएट में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इन दिनों वह चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे हैं। जब वह पैदा हुआ तो सामान्य था, लेकिन उसके बाद दिक्कत होने लगी। कई अस्पतालों में चेकअप कराया और उपचार कराया, जिसके बाद पता चलता कि आयुष को स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी टाइप टू (एसएमए 2) नामक बीमारी है। इसके बाद एसजीपीजीआई लखनऊ के डॉक्टर सुनील प्रधान की देखरेख में उसका उपचार चल रहा है।
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सचिन त्यागी का कहना है कि इस बीमारी से बचाव के लिए एक इंजेक्शन आता है जो करीब 16 करोड़ रुपये कीमत का है। उस इंजेक्शन को लगवाने की उनकी सामर्थ्य नहीं है। इसी कारण वह इस बारे में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह को पत्र लिख चुके हैं, ताकि उनके बेटे के उपचार में मदद मिल सके।
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एक लड़की को भी इसी बीमारी ने घेरा
आयुष के अलावा शहर के ही नवाब गंज क्षेत्र की रहने वाली एक लड़की भी एसएमए की चपेट में आ गई है। हालांकि उसके परिजन अभी कुछ भी बताने से इनकार कर रहे हैं।
इस बीमारी के लक्षण
जो बच्चे स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी से पीड़ित होते हैं, उनकी मांसपेशियां कमजोर होती हैं। शरीर में पानी की कमी होने लगती है और सांस लेने में दिक्कत होती है। सांस तक लेने के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है। मांसपेशियां कमजोर होने से बच्चा या किशोर चलने फिरने से भी मोहताज हो जाता है।

अमेरिका से मंगाना पड़ता है इंजेक्शन
इस बीमारी में असर करने वाले एक खास इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है, जो अमेरिका से मंगाया जाता है। इस इंजेक्शन की कीमत करीब 16 करोड़ रुपये बताई जाती है। इंजेक्शन की खासियत ये है कि यह बच्चों की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले जीन को निष्क्रिय कर देता है, यानी यह तंत्रिका कोशिकाओं के लिए जरूरी प्रोटीन का उत्पादन शुरू कर देता है। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास सामान्य रूप से होने लगता है।
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