Saharanpur: आस्ट्रेलिया वाले भी चखेंगे जनपद के शहद का स्वाद,
सहारनपुर जनपद में बडे़ स्तर पर मधुमक्खी पालन होता है। यहां काष्ठ कला के साथ शहद भी निर्यात किया जाएगा। जनपद के पांच हजार से अधिक लोग इस कारोबार से जुडे़ हुए हैं। अब शहद के साथ ही मोम (बी वैक्स) का भी आस्ट्रेलिया निर्यात किया जाएगा।
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सहारनपुर जनपद की काष्ठ हस्तशिल्प और आम के बाद अब जनपद से शहद एवं मोम का निर्यात भी शुरू हो गया है। मार्च तक जनपद से 69 हजार किलो शहद और 20 हजार किलो मोम (बी वैक्स) का निर्यात आस्ट्रेलिया किया जाएगा। इससे पहले अमेरिका भी शहद भेजा गया था।
जनपद में बडे़ स्तर पर मधुमक्खी पालन होता है। यहां के पांच हजार से अधिक लोग इस कारोबार से जुडे़ हुए हैं। जनपद के मधुमक्खी पालकों के पास सौ से लेकर कई हजार डिब्बे हैं। इसके चलते ही मधुमक्खी पालन में जनपद का प्रदेश में अहम स्थान है।
जनपद में प्रति वर्ष आठ से दस हजार क्विंटल शहद का उत्पादन होने का अनुमान है। शहद का चयन प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना में एक जनपद-एक उत्पाद के तहत भी किया गया है। इसके चलते जिले में कई शहद प्रसंस्करण इकाइयां भी स्थापित हुई हैं।
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जनपद में मधुमक्खियां फरवरी से अप्रैल महीने तक यूकेलिप्टस, लीची, आम और सरसों आदि से शहद प्राप्त करती हैं। मई से लेकर जून तक मौनपालक मधुमक्खियों के डिब्बों को अलीगढ़ एवं मथुरा से लेकर हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड आदि राज्यों में ले जाते हैं। जहां पर लाही, सूरजमुखी, नीम आदि से मधुमक्खियां शहद प्राप्त करती हैं।
वर्ष 1990 से मधुमक्खी पालन कर रहे अजय सैनी ने गंगोह में शहद प्रसंस्करण उद्योग स्थापित किया है। इसकी क्षमता 30 टन शहद को प्रतिदिन प्रसंकृत करने की है।
शहद के साथ ही मोम (बी वैक्स) का भी आस्ट्रेलिया निर्यात किया जाएगा। वहां 69 हजार किलो शहद और 20 हजार किलो मोम भेजा जाएगा। इसके लिए शहद का प्रसंस्करण किया जा रहा है। यह ऑर्डर मार्च तक आस्ट्रेलिया भेज दिया जाएगा। इससे पहले शहद को अमेरिका निर्यात किया गया था। शहद के निर्यात होने से जनपद के मौन पालकों को भी काफी लाभ होगा। - अजय सैनी, मधुमक्खी पालक एवं निर्यातक