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आतंकियों को 50 अधिक फर्जी वर्चुअल आईडी दी थी बनाकर
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स्वतंत्रता दिवस पर फिदायीन हमले की तैयारी में थे नदीम और उसके साथी
सहारनपुर। नदीम और उससे साथी हबीबुल इस्लाम उर्फ सैफुल्ला की कानपुर से गिरफ्तारी के बाद कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान बैठे आतंकियों ने नदीम को नुपुर शर्मा की हत्या करने का टॉस्क दिया था, हबीबुल इस्लाम उर्फ सैफुल्ला को स्वतंत्रता दिवस पर फिदायीन हमला करने के लिए कहा था। सरकारी भवन और पुलिस मुख्यालय इनके निशाने पर थे। एटीएस ने समय रहते कार्रवाई कर आतंकियों की इस साजिश को नाकाम किया है।
जैश ए मोहम्मद और तहरीक ए तालिबान से जुड़े नदीम ने उत्तर प्रदेश में अपना नेटवर्क मजबूत कर लिया था। इसका खुलासा एटीएस की कार्रवाई में हो रहा है। एटीएस ने अब नदीम के फिदायीन साथी फतेहपुर निवासी हबीबुल इस्लाम उर्फ सैफुल्ला को कानपुर से गिरफ्तार किया है। यह भी जैश ए मोहम्मद के लिए कार्य कर रहा था। इन दोनों ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकियों को 50 से अधिक वर्चुअल आईडी बनाकर दी हैं।
कोतवाली गंगोह क्षेत्र के गांव कुंडाकला निवासी मोहम्मद नदीम पुत्र नफीस को एटीएस तीन दिन पूर्व गिरफ्तार कर चुकी है। नदीम के मोबाइल फोन से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकियों से सोशल मीडिया के जरिये की गई बातचीत की चैट और वॉयस मेसेज भी बरामद हुए है। 70 पेज की पीडीएफ फाइल भी बरामद की, जिसमें जैश ए मोहम्मद और तहरीक ए तालिबान के आतंकियों ने नदीम को फिदायीन हमले करने सहित आतंक फैलाने के तरीकों को समझाया था।
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हबीबुल इस्लाम उर्फ सैफुल्ला फर्जी वर्चुअल आईडी बनाने में माहिर है। नदीम और सैफुल्ला ने अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को 50 से अधिक वर्चुअल आईडी बनाकर दी हैं। हबीबुल और नदीम से हुई पूछताछ में मिली जानकारी के बाद एटीएस उनसे जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी में जुटी है।
.....
जेहादी वीडियो भेजकर उकसाते थे
एटीएस के मुताबिक फर्जी वर्चुअल आईडी पर बनाए गए ग्रुपों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकी जेहादी वीडियो अपलोड करते थे। इसके साथ ही फिदायीन हमले के तौर-तरीकों को भी सिखाया जाता और युवाओं जेहाद के लिए प्रेरित किया जाता था।
एटीएस की टीम ने डाला डेरा, खंगाल रही संदिग्धों की कुंडली
नदीम के सहारनपुर पकड़े जाने बाद से एटीएस की एक टीम जनपद में डेरा डाले हुए हैं। सूत्र बताते हैं किए एटीएस देवबंद में भी गोपनीय तरीके जांच कर रही हैं। इसके अलावा पूरे जनपद नजर बनाए हुए हैं। नदीम के कई अन्य साथियों के होने भी जानकारी मिली है। फोन पर जिन लोगों से नदीम बात करता था, उनकी कुंडली भी एटीएस खंगालने में लगी है।
संदिग्धों को कौन दे रहा संरक्षण
सहारनपुर। जिले में आतंकियों को संरक्षण मिलता है। एटीएस की कार्रवाई में बार-बार खुलासे हुए हैं, लेकिन कौन इनको संरक्षण देता है, उसकी गर्दन तक एटीएस और पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पाते हैं।
देश व प्रदेश में हुई आतंकी घटना और पकड़े गए आतंकियों का सहारनपुर से कनेक्शन निकलता रहा है। एटीएस और अन्य जनपदों की पुलिस ने यहां से आकर कई बार कार्रवाई की है, लेकिन स्थानीय खुफिया विभाग और पुलिस हमेशा बेखबर रही। बार-बार मामले सामने आने के बाद भी आतंकियों को संरक्षण देने वालों का पता नहीं लग पाया है। कई बार अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी भी जनपद से पकड़े गए। लगातार कार्रवाई के बाद भी यह सिलसिला नहीं रुक रहा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बैठे आतंकियों के तार अब गांवों तक पहुंच गए हैं। गंगोह क्षेत्र के गांव कुंडकला से नदीम के पकड़े जाना इसका उदाहरण है।
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सहारनपुर। नदीम और उससे साथी हबीबुल इस्लाम उर्फ सैफुल्ला की कानपुर से गिरफ्तारी के बाद कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान बैठे आतंकियों ने नदीम को नुपुर शर्मा की हत्या करने का टॉस्क दिया था, हबीबुल इस्लाम उर्फ सैफुल्ला को स्वतंत्रता दिवस पर फिदायीन हमला करने के लिए कहा था। सरकारी भवन और पुलिस मुख्यालय इनके निशाने पर थे। एटीएस ने समय रहते कार्रवाई कर आतंकियों की इस साजिश को नाकाम किया है।
जैश ए मोहम्मद और तहरीक ए तालिबान से जुड़े नदीम ने उत्तर प्रदेश में अपना नेटवर्क मजबूत कर लिया था। इसका खुलासा एटीएस की कार्रवाई में हो रहा है। एटीएस ने अब नदीम के फिदायीन साथी फतेहपुर निवासी हबीबुल इस्लाम उर्फ सैफुल्ला को कानपुर से गिरफ्तार किया है। यह भी जैश ए मोहम्मद के लिए कार्य कर रहा था। इन दोनों ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकियों को 50 से अधिक वर्चुअल आईडी बनाकर दी हैं।
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कोतवाली गंगोह क्षेत्र के गांव कुंडाकला निवासी मोहम्मद नदीम पुत्र नफीस को एटीएस तीन दिन पूर्व गिरफ्तार कर चुकी है। नदीम के मोबाइल फोन से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकियों से सोशल मीडिया के जरिये की गई बातचीत की चैट और वॉयस मेसेज भी बरामद हुए है। 70 पेज की पीडीएफ फाइल भी बरामद की, जिसमें जैश ए मोहम्मद और तहरीक ए तालिबान के आतंकियों ने नदीम को फिदायीन हमले करने सहित आतंक फैलाने के तरीकों को समझाया था।
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हबीबुल इस्लाम उर्फ सैफुल्ला फर्जी वर्चुअल आईडी बनाने में माहिर है। नदीम और सैफुल्ला ने अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को 50 से अधिक वर्चुअल आईडी बनाकर दी हैं। हबीबुल और नदीम से हुई पूछताछ में मिली जानकारी के बाद एटीएस उनसे जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी में जुटी है।
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जेहादी वीडियो भेजकर उकसाते थे
एटीएस के मुताबिक फर्जी वर्चुअल आईडी पर बनाए गए ग्रुपों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकी जेहादी वीडियो अपलोड करते थे। इसके साथ ही फिदायीन हमले के तौर-तरीकों को भी सिखाया जाता और युवाओं जेहाद के लिए प्रेरित किया जाता था।
एटीएस की टीम ने डाला डेरा, खंगाल रही संदिग्धों की कुंडली
नदीम के सहारनपुर पकड़े जाने बाद से एटीएस की एक टीम जनपद में डेरा डाले हुए हैं। सूत्र बताते हैं किए एटीएस देवबंद में भी गोपनीय तरीके जांच कर रही हैं। इसके अलावा पूरे जनपद नजर बनाए हुए हैं। नदीम के कई अन्य साथियों के होने भी जानकारी मिली है। फोन पर जिन लोगों से नदीम बात करता था, उनकी कुंडली भी एटीएस खंगालने में लगी है।
संदिग्धों को कौन दे रहा संरक्षण
सहारनपुर। जिले में आतंकियों को संरक्षण मिलता है। एटीएस की कार्रवाई में बार-बार खुलासे हुए हैं, लेकिन कौन इनको संरक्षण देता है, उसकी गर्दन तक एटीएस और पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पाते हैं।
देश व प्रदेश में हुई आतंकी घटना और पकड़े गए आतंकियों का सहारनपुर से कनेक्शन निकलता रहा है। एटीएस और अन्य जनपदों की पुलिस ने यहां से आकर कई बार कार्रवाई की है, लेकिन स्थानीय खुफिया विभाग और पुलिस हमेशा बेखबर रही। बार-बार मामले सामने आने के बाद भी आतंकियों को संरक्षण देने वालों का पता नहीं लग पाया है। कई बार अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी भी जनपद से पकड़े गए। लगातार कार्रवाई के बाद भी यह सिलसिला नहीं रुक रहा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बैठे आतंकियों के तार अब गांवों तक पहुंच गए हैं। गंगोह क्षेत्र के गांव कुंडकला से नदीम के पकड़े जाना इसका उदाहरण है।