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राम मंदिर आंदोलन में वाजपेयी के लिए सरसावा शुगर मिल बनाई थी जेल
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सरसावा में बनी अस्थायी जेल में बंद थे अटल बिहारी वाजपेयी
सहारनपुर। राम मंदिर आंदोलन 1990 के आसपास अपने चरम पर था। भाजपा और हिंदू संगठनों से जुड़े नेताओं और कारसेवकों की गिरफ्तारी की जा रही थी। इसके लिए सरसावा शुगर मिल के गेस्ट हाउस में अस्थायी जेल बनाई गई थी। यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी समेत शीर्ष 14 नेताओं को रखा गया था।
अस्थायी जेल में सबसे पहले 14 नेताओं को 24 अक्तूबर 1990 को रखा गया था। पुलिस ने अटल बिहारी वाजपेयी को भी हिरासत में ले लिया था और 28 अक्तूबर 1990 को गुपचुप तरीके से सहकारी शुगर मिल सरसावा के गेस्ट हाउस में ले जाकर नजरबंद कर दिया था। अस्थायी जेल में अटल बिहारी वाजपेयी अपने 14 साथियों के साथ 5 नवंबर 1990 तक बंद रहे। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। वाजपेयी के साथ बसंत राय, भाजपा सांसद रहे गुमानमल लोढ़ा, उस समय के विहिप अध्यक्ष विष्णु हरि डालमिया, जगद्गुरु शंकराचार्य भानुपुरा पीठ स्वामी दिव्यानंद तीर्थ, विहिप उपाध्यक्ष बीपी तोषनीवाल, केदारनाथ साहनी, उस समय के विहिप कोषाध्यक्ष पुल्लारेड्डी, तिलक राज गुप्ता, अंजलि बहन, विहिप के पदाधिकारी रहे आरके गोयल, राम निवास डंडारिया, जगद्गुरु के शिष्य शिव कुमार, आरके गुप्ता शामिल थे।
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सहारनपुर। राम मंदिर आंदोलन 1990 के आसपास अपने चरम पर था। भाजपा और हिंदू संगठनों से जुड़े नेताओं और कारसेवकों की गिरफ्तारी की जा रही थी। इसके लिए सरसावा शुगर मिल के गेस्ट हाउस में अस्थायी जेल बनाई गई थी। यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी समेत शीर्ष 14 नेताओं को रखा गया था।
अस्थायी जेल में सबसे पहले 14 नेताओं को 24 अक्तूबर 1990 को रखा गया था। पुलिस ने अटल बिहारी वाजपेयी को भी हिरासत में ले लिया था और 28 अक्तूबर 1990 को गुपचुप तरीके से सहकारी शुगर मिल सरसावा के गेस्ट हाउस में ले जाकर नजरबंद कर दिया था। अस्थायी जेल में अटल बिहारी वाजपेयी अपने 14 साथियों के साथ 5 नवंबर 1990 तक बंद रहे। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। वाजपेयी के साथ बसंत राय, भाजपा सांसद रहे गुमानमल लोढ़ा, उस समय के विहिप अध्यक्ष विष्णु हरि डालमिया, जगद्गुरु शंकराचार्य भानुपुरा पीठ स्वामी दिव्यानंद तीर्थ, विहिप उपाध्यक्ष बीपी तोषनीवाल, केदारनाथ साहनी, उस समय के विहिप कोषाध्यक्ष पुल्लारेड्डी, तिलक राज गुप्ता, अंजलि बहन, विहिप के पदाधिकारी रहे आरके गोयल, राम निवास डंडारिया, जगद्गुरु के शिष्य शिव कुमार, आरके गुप्ता शामिल थे।
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