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पश्चिम का सियासी तापमान भांपने आज आएंगे अखिलेश
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 10 Oct 2017 12:25 AM IST
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अखिलेश यादव।
- फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर में विधानसभा में करारी शिकस्त झेल चुकी समाजवादी पार्टी एक बार फिर अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने की कोशिश में जुट गई है। आगरा सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद अखिलेश यादव मंगलवार को पहली जनसभा को संबोधित करेंगे।
ऐसे में माना जा रहा है कि अखिलेश इस रैली के जरिए जनता का मूड भी भांपना चाहेंगे। इसके अलावा अखिलेश अपने परंपरागत मतों को पार्टी के साथ बांधे रखने की पुुरजोर कोशिश करेंगे।
पूर्व मंत्री और पश्चिम के कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय चौधरी यशपाल के जन्मदिन पर तीतरो कस्बे के इंटर कालेज में आयोजित जनसभा में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष पहली रैली के पीछे कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।
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राजनीतिक गलियारे में तमाम चर्चाएं है। माना जा रहा है कि अखिलेश इस रैली के जरिए पश्चिमी यूपी के अपने परंपरागत मतदाताओं को साधने की कोशिश करेंगे।
यहां उनके आने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि पूरे प्रदेश में गठबंधन का फार्मूला बहुत सफल नहीं रहा हो, मगर सहारनपुर में यह काफी हद तक कामयाब रहा। यही कारण है कि यहां से फिर अपने चुनावी शंखनाद को लेकर पार्टी कमर कसना चाहेगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि गंगोह विधानसभा गठबंधन के चलते कांग्रेस के पाले में जाने के बाद भी चौधरी यशपाल के बेटे इंद्रसेन साइकिल सिंबल पर ही चुनावी मैदान में डटे रहे थे। हालांकि उस वक्त उन्हें पार्टी से निलंबित किया था।
मगर चुनाव बाद उनकी वापसी के जरिए गुर्जर मतदाताओं को अपनेपन का संदेश दिया। ऐसे में अब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक बार फिर अपनी जमीन मजबूत करने उतरेंगे।
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ऐसे में माना जा रहा है कि अखिलेश इस रैली के जरिए जनता का मूड भी भांपना चाहेंगे। इसके अलावा अखिलेश अपने परंपरागत मतों को पार्टी के साथ बांधे रखने की पुुरजोर कोशिश करेंगे।
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पूर्व मंत्री और पश्चिम के कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय चौधरी यशपाल के जन्मदिन पर तीतरो कस्बे के इंटर कालेज में आयोजित जनसभा में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष पहली रैली के पीछे कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।
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राजनीतिक गलियारे में तमाम चर्चाएं है। माना जा रहा है कि अखिलेश इस रैली के जरिए पश्चिमी यूपी के अपने परंपरागत मतदाताओं को साधने की कोशिश करेंगे।
यहां उनके आने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि पूरे प्रदेश में गठबंधन का फार्मूला बहुत सफल नहीं रहा हो, मगर सहारनपुर में यह काफी हद तक कामयाब रहा। यही कारण है कि यहां से फिर अपने चुनावी शंखनाद को लेकर पार्टी कमर कसना चाहेगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि गंगोह विधानसभा गठबंधन के चलते कांग्रेस के पाले में जाने के बाद भी चौधरी यशपाल के बेटे इंद्रसेन साइकिल सिंबल पर ही चुनावी मैदान में डटे रहे थे। हालांकि उस वक्त उन्हें पार्टी से निलंबित किया था।
मगर चुनाव बाद उनकी वापसी के जरिए गुर्जर मतदाताओं को अपनेपन का संदेश दिया। ऐसे में अब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक बार फिर अपनी जमीन मजबूत करने उतरेंगे।