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Saharanpur News: विस चुनाव में बेंच नहीं तो वोट नहीं के नारे पर जताई सहमति
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सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया। दीवानी कचहरी परिसर स्थित सभागार में हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बैठक हुई। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं की ओर से बेंच नहीं तो वोट नहीं के नारे को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई।
संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज कुमार शर्मा और संयोजक परवेज आलम ने बताया कि बैठक में अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना तथा रजिस्ट्रार जनरल, हाईकोर्ट इलाहाबाद की ओर से प्रदेश के बार संघों को भेजे गए पत्र पर चर्च की गई।
वक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आम जनता को सुलभ एवं त्वरित न्याय दिलाने के लिए क्षेत्र में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना आवश्यक है। मांग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करीब 50 वर्षों से आंदोलन चल रहा है।
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बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जनपदों और तहसील बार एसोसिएशनों में प्रत्येक शुक्रवार को न्यायिक कार्य से विरत रहकर आंदोलन किया जाएगा। साथ ही अधिवक्ताओं से संबंधित गतिविधियों के लिए समिति के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अधिक प्रभावी बनाने पर भी सहमति बनी।
मांग करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश में अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू हो। 14 अक्तूबर को मेरठ से न्याय यात्रा का शुभारंभ करेंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अधिवक्ताओं को इससे जोड़ते हुए यात्रा को आगे बढ़ाया जाएगा। इसका समापन दो दिसंबर को प्रस्तावित जनआंदोलन के साथ होगा।
इसके अलावा दो दिसंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जनपदों और तहसील बार एसोसिएशनों के अधिवक्ता हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग को लेकर पैदल मार्च, धरना-प्रदर्शन और अन्य कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
बैठक में सहारनपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल त्यागी, महासचिव पालम राणा समेत मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बुलंदशहर, कानपुर आदि बार एसोसिएशनों के पदाधिकारी और अधिवक्ता मौजूद रहे।
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संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज कुमार शर्मा और संयोजक परवेज आलम ने बताया कि बैठक में अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना तथा रजिस्ट्रार जनरल, हाईकोर्ट इलाहाबाद की ओर से प्रदेश के बार संघों को भेजे गए पत्र पर चर्च की गई।
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वक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आम जनता को सुलभ एवं त्वरित न्याय दिलाने के लिए क्षेत्र में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना आवश्यक है। मांग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करीब 50 वर्षों से आंदोलन चल रहा है।
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बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जनपदों और तहसील बार एसोसिएशनों में प्रत्येक शुक्रवार को न्यायिक कार्य से विरत रहकर आंदोलन किया जाएगा। साथ ही अधिवक्ताओं से संबंधित गतिविधियों के लिए समिति के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अधिक प्रभावी बनाने पर भी सहमति बनी।
मांग करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश में अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू हो। 14 अक्तूबर को मेरठ से न्याय यात्रा का शुभारंभ करेंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अधिवक्ताओं को इससे जोड़ते हुए यात्रा को आगे बढ़ाया जाएगा। इसका समापन दो दिसंबर को प्रस्तावित जनआंदोलन के साथ होगा।
इसके अलावा दो दिसंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जनपदों और तहसील बार एसोसिएशनों के अधिवक्ता हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग को लेकर पैदल मार्च, धरना-प्रदर्शन और अन्य कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
बैठक में सहारनपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल त्यागी, महासचिव पालम राणा समेत मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बुलंदशहर, कानपुर आदि बार एसोसिएशनों के पदाधिकारी और अधिवक्ता मौजूद रहे।