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सात दिन बाद भी नहीं खुला किताबों का राज
Saharanpur
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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सहारनपुर। दिवाली के एक दिन पहले सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में निशुल्क बंटने वाली पुरानी और नई किताबों के पकड़े जाने के मामले का सच अभी सामने नहीं आ पाया है। इस मामले में एक बुक सेलर और गाड़ी चालक को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने भी अब तक कोई राज नहीं खोल पाई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने तो किताबों की गिनती तक नहीं करवाई।
मटिया महल में प्रदीप बुक डिपो के संचालक के यहां से दर्पण टाकिज के पास कबाड़ी के यहां ले जाने वाली किताबों की रद्दी को बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने ही छापा मारकर पकड़ा था। बोरों में बंद ये किताबें वर्ष 2005 से 2012-13 तक की हैं। उसके बाद न तो पुलिस की ओर से उन कबाड़ियों के नेटवर्क को खोजने की कोशिश की गई जिन तक पुस्तकें पहुंच रही हैं और न ही बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से यह पता लगाया गया कि ये किताबें आखिर बाजार तक आई कैसे। विभाग यही तर्क दे रहा है कि स्टाफ और टीचर तो किताबाें की गिनती के लिए भेजे जा रहे हैं, लेकिन एसओ की मौजूदगी न हो पाने के कारण परेशानी हो रही है। दूसरी ओर, थाना पुलिस का कहना है कि इन दिनों छात्र संघ के चुनाव की ड्यूटी में उलझने के कारण इसमें देरी हुई है।
शिक्षकों से गिनवाएंगे किताबें
किताबों की गिनती में देरी तो हुई है, लेकिन इसकी तैयारी कर ली गई है। कमेटी गठित हो चुकी है। किताबों को गिनवाने के लिए कुछ शिक्षकों को लगवाया जाएगा। शिक्षकों की टीम थाने भेजी जाएगी। गिनती में किताबों का वर्ष, विषय, कक्षा और आवंटन की सीरीज पहचानने की कोशिश की जाएगी।
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-सुशील कुमार, बीएसए।
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मटिया महल में प्रदीप बुक डिपो के संचालक के यहां से दर्पण टाकिज के पास कबाड़ी के यहां ले जाने वाली किताबों की रद्दी को बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने ही छापा मारकर पकड़ा था। बोरों में बंद ये किताबें वर्ष 2005 से 2012-13 तक की हैं। उसके बाद न तो पुलिस की ओर से उन कबाड़ियों के नेटवर्क को खोजने की कोशिश की गई जिन तक पुस्तकें पहुंच रही हैं और न ही बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से यह पता लगाया गया कि ये किताबें आखिर बाजार तक आई कैसे। विभाग यही तर्क दे रहा है कि स्टाफ और टीचर तो किताबाें की गिनती के लिए भेजे जा रहे हैं, लेकिन एसओ की मौजूदगी न हो पाने के कारण परेशानी हो रही है। दूसरी ओर, थाना पुलिस का कहना है कि इन दिनों छात्र संघ के चुनाव की ड्यूटी में उलझने के कारण इसमें देरी हुई है।
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शिक्षकों से गिनवाएंगे किताबें
किताबों की गिनती में देरी तो हुई है, लेकिन इसकी तैयारी कर ली गई है। कमेटी गठित हो चुकी है। किताबों को गिनवाने के लिए कुछ शिक्षकों को लगवाया जाएगा। शिक्षकों की टीम थाने भेजी जाएगी। गिनती में किताबों का वर्ष, विषय, कक्षा और आवंटन की सीरीज पहचानने की कोशिश की जाएगी।
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-सुशील कुमार, बीएसए।