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स्पोर्ट्स कालेज का निर्माण हो, खेलों में बढ़ें सुविधाएं
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स्पोर्ट्स कालेज का निर्माण हो, खेलों में बढ़ें सुविधाएं
सहारनपुर। चुनावी माहौल है, सभी दलों के प्रत्याशी जनता के बीच जाकर विकास कराने के वादे कर रहे हैं। इन सबके बीच खिलाड़ी वर्ग ऐसा है, जो हर सरकार में खुद को ठगा महसूस कर रहा है। बात सहारनपुर की करें तो खिलाड़ियों की नाराजगी वाजिब भी लगती है। गौरतलब है कि तीन दलों की सरकारों में स्पोर्ट्स कॉलेज अनदेखी का शिकार रहा है। अमर उजाला की टीम ने रविवार को खिलाड़ियों से बात कर चुनाव पर उनकी राय और मुद्दे जानने का प्रयास किया। खिलाड़ियों ने अपनी पीड़ा को खुलकर रखा।
अंतरराष्ट्रीय एथलीट रामशरण का कहना है कि बाहर खेलने के लिए जाने वाले ज्यादातर खिलाड़ियों के पास पैसा नहीं होता है। ऐसे में वह उधार पैसा लेकर खेलने जाते हैं। उनकी मांग है कि खेल विभाग की ओर से खेलने के लिए बाहर जाने वाले खिलाड़ियों को टीए डीए दिया जाए। इसके अलावा स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण रुका होने पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जो दल या नेता स्पोर्ट्स कालेज शुरू कराएगा उनका वोट उसी को जाएगा।
जूडो के राष्ट्रीय खिलाड़ी आकाश यादव का कहना है कि जनपद में जूडो के साथ ही अन्य खेलों के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद बेरोजगार भटक रहे हैं। हमारे जनप्रतिनिधियों को सरकारी नौकरियों में स्पोर्ट्स कोटा बढ़ाने का मामला संसद में उठाना चाहिए। आकाश का कहना है कि जो प्रत्याशी खिलाड़ियों के रोजगार के बारे में सोचेगा और काम करेगा खिलाड़ी उसी को वोट करेंगे।
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जूडो ही के राष्ट्रीय खिलाड़ी पिंटू सैनी का कहना है कि किसी भी दल की सरकारों ने खेलों पर कभी खास ध्यान नहीं दिया है। उनकी पीड़ा है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की ईनाम राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। उन्हें ही कई प्रतियोगिताओं की ईनाम राशि नहीं मिली है। उनकी मांग है कि खिलाड़ियों को जिम की सुविधा दी जाए तथा डाइट में बढ़ोत्तरी हो। जो खिलाड़ियों के हक की बात करेगा वोट उसी को जाएगा।
राष्ट्रीय एथलीट प्रिंस का कहना है कि जनपद में स्कूल और कालेज स्तर पर खेल भावना को पैदा करना चाहिए। ज्यादातर स्कूल और कालेजों के पास मैदान ही नहीं हैं। जहां मैदान हैं वहां उनका इस्तेमाल नहीं होता है। खानापूर्ति के लिए साल में एक बार प्रतियोगिता करा दी जाती है। यदि स्कूल और कालेज स्तर पर खेलों पर ध्यान दिया जाए तो खेलों के क्षेत्र में बेहतर परिणाम आ सकते हैं। स्टेडियम के मैदान को भी और बेहतर बनाने की मांग की। उनका कहना है कि जो प्रत्याशी ऐसा करने की बात कहेगा वोट उसी को देंगे।
राष्ट्रीय एथलीट पोपिन कुमार का कहना है कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए नेहरू युवा केंद्र और युवा कल्याण विभाग की ओर से स्थानीय खेलों को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं शुरू की गई हैं। मगर ये विभाग खेलों के क्षेत्र में जनपद में केवल औपचारिकताएं निभा रहे हैं। स्टेडियम में ही विभिन्न खेलों के प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से खिलाड़ियों को पलायन करना पड़ता है जो प्रत्याशी खेल सुविधा बढ़वाने की बात करेगा, उसी को वोट देंगे।
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सहारनपुर। चुनावी माहौल है, सभी दलों के प्रत्याशी जनता के बीच जाकर विकास कराने के वादे कर रहे हैं। इन सबके बीच खिलाड़ी वर्ग ऐसा है, जो हर सरकार में खुद को ठगा महसूस कर रहा है। बात सहारनपुर की करें तो खिलाड़ियों की नाराजगी वाजिब भी लगती है। गौरतलब है कि तीन दलों की सरकारों में स्पोर्ट्स कॉलेज अनदेखी का शिकार रहा है। अमर उजाला की टीम ने रविवार को खिलाड़ियों से बात कर चुनाव पर उनकी राय और मुद्दे जानने का प्रयास किया। खिलाड़ियों ने अपनी पीड़ा को खुलकर रखा।
अंतरराष्ट्रीय एथलीट रामशरण का कहना है कि बाहर खेलने के लिए जाने वाले ज्यादातर खिलाड़ियों के पास पैसा नहीं होता है। ऐसे में वह उधार पैसा लेकर खेलने जाते हैं। उनकी मांग है कि खेल विभाग की ओर से खेलने के लिए बाहर जाने वाले खिलाड़ियों को टीए डीए दिया जाए। इसके अलावा स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण रुका होने पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जो दल या नेता स्पोर्ट्स कालेज शुरू कराएगा उनका वोट उसी को जाएगा।
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जूडो के राष्ट्रीय खिलाड़ी आकाश यादव का कहना है कि जनपद में जूडो के साथ ही अन्य खेलों के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद बेरोजगार भटक रहे हैं। हमारे जनप्रतिनिधियों को सरकारी नौकरियों में स्पोर्ट्स कोटा बढ़ाने का मामला संसद में उठाना चाहिए। आकाश का कहना है कि जो प्रत्याशी खिलाड़ियों के रोजगार के बारे में सोचेगा और काम करेगा खिलाड़ी उसी को वोट करेंगे।
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जूडो ही के राष्ट्रीय खिलाड़ी पिंटू सैनी का कहना है कि किसी भी दल की सरकारों ने खेलों पर कभी खास ध्यान नहीं दिया है। उनकी पीड़ा है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की ईनाम राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। उन्हें ही कई प्रतियोगिताओं की ईनाम राशि नहीं मिली है। उनकी मांग है कि खिलाड़ियों को जिम की सुविधा दी जाए तथा डाइट में बढ़ोत्तरी हो। जो खिलाड़ियों के हक की बात करेगा वोट उसी को जाएगा।
राष्ट्रीय एथलीट प्रिंस का कहना है कि जनपद में स्कूल और कालेज स्तर पर खेल भावना को पैदा करना चाहिए। ज्यादातर स्कूल और कालेजों के पास मैदान ही नहीं हैं। जहां मैदान हैं वहां उनका इस्तेमाल नहीं होता है। खानापूर्ति के लिए साल में एक बार प्रतियोगिता करा दी जाती है। यदि स्कूल और कालेज स्तर पर खेलों पर ध्यान दिया जाए तो खेलों के क्षेत्र में बेहतर परिणाम आ सकते हैं। स्टेडियम के मैदान को भी और बेहतर बनाने की मांग की। उनका कहना है कि जो प्रत्याशी ऐसा करने की बात कहेगा वोट उसी को देंगे।
राष्ट्रीय एथलीट पोपिन कुमार का कहना है कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए नेहरू युवा केंद्र और युवा कल्याण विभाग की ओर से स्थानीय खेलों को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं शुरू की गई हैं। मगर ये विभाग खेलों के क्षेत्र में जनपद में केवल औपचारिकताएं निभा रहे हैं। स्टेडियम में ही विभिन्न खेलों के प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से खिलाड़ियों को पलायन करना पड़ता है जो प्रत्याशी खेल सुविधा बढ़वाने की बात करेगा, उसी को वोट देंगे।