{"_id":"59c559684f1c1b7d688b60f0","slug":"91506105704-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इलाज के खर्च को लेकर असमंजस में अरुण के परिजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इलाज के खर्च को लेकर असमंजस में अरुण के परिजन
Updated Sat, 23 Sep 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कोमा के मरीज अरुण के इलाज पर होने वाले खर्च को लेकर परिजन असमंजस में है। उन्हें इलाज के खर्च की फिक्र सता रही है। इसी लिए वह मदद के लिए अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं। शुक्रवार को भी अरुण की पत्नी और बेटी आर्थिक मदद की गुहार लगाने कलक्ट्रेट पहुंची थी।
गंगोह के गांव अलीपुरा निवासी अरुण आठ अगस्त 2016 को सड़क हादसे की वजह से कोमा में चला गया था। तब से परिजन उसके इलाज करा रहे हैं। चंडीगढ़ पीजीआई में इलाज के बाद भी जब अरुण को आराम नहीं मिला तो परिजन उसे घर ले आए। इलाज पर करीब छह लाख रुपये खर्च करने के बाद परिजनों के हाथ खाली हो गए। आर्थिक तंगी की वजह से अरुण के परिवार के सामने पेट भरने तक का संकट खड़ा हो गया। पिछले दिनों अरुण की बेटी इशु का एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने पिता के इलाज कराने की गुहार लगा रही है। इशु का यह फोटो सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा। सीएम कार्यालय ने तुरंत जिला प्रशासन को अरुण के इलाज की व्यवस्था करने को कहा। सीएम के संज्ञान लेने से पहले परिजन ग्रामीणों की मदद से अरुण को यहां आवास विकास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा चुके थे। मगर सीएम कार्यालय के आदेश के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। कमिश्नर दीपक अग्रवाल और डीएम पीके पांडेय ने अस्पताल जाकर अरुण का हाल जाना। साथ ही चिकित्सक डॉ. राजीव तिवारी को अरुण के परिजनों से किसी तरह का कोई खर्च न लेने को कहा। डीएम ने आश्वासन दिया था कि अरुण का इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी। शासन से अभी तक इलाज का खर्च डॉक्टर तक न पहुंचने की वजह से अरुण के परिजनों को चिंता सताने लगी है और वह अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
----------------------------------
अरुण के इलाज का खर्च मुख्यमंत्री राहत कोष से दिया जाएगा। इसके लिए हमने शासन को पत्र भी लिखा हुआ है। साथ ही डॉक्टर से भी किसी तरह का शुल्क न लेने को कहा गया है। अरुण के परिजन निश्चिंत होकर अरुण का इलाज कराएं।
विज्ञापन
पीके पांडेय, डीएम।
विज्ञापन
गंगोह के गांव अलीपुरा निवासी अरुण आठ अगस्त 2016 को सड़क हादसे की वजह से कोमा में चला गया था। तब से परिजन उसके इलाज करा रहे हैं। चंडीगढ़ पीजीआई में इलाज के बाद भी जब अरुण को आराम नहीं मिला तो परिजन उसे घर ले आए। इलाज पर करीब छह लाख रुपये खर्च करने के बाद परिजनों के हाथ खाली हो गए। आर्थिक तंगी की वजह से अरुण के परिवार के सामने पेट भरने तक का संकट खड़ा हो गया। पिछले दिनों अरुण की बेटी इशु का एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने पिता के इलाज कराने की गुहार लगा रही है। इशु का यह फोटो सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा। सीएम कार्यालय ने तुरंत जिला प्रशासन को अरुण के इलाज की व्यवस्था करने को कहा। सीएम के संज्ञान लेने से पहले परिजन ग्रामीणों की मदद से अरुण को यहां आवास विकास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा चुके थे। मगर सीएम कार्यालय के आदेश के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। कमिश्नर दीपक अग्रवाल और डीएम पीके पांडेय ने अस्पताल जाकर अरुण का हाल जाना। साथ ही चिकित्सक डॉ. राजीव तिवारी को अरुण के परिजनों से किसी तरह का कोई खर्च न लेने को कहा। डीएम ने आश्वासन दिया था कि अरुण का इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी। शासन से अभी तक इलाज का खर्च डॉक्टर तक न पहुंचने की वजह से अरुण के परिजनों को चिंता सताने लगी है और वह अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
विज्ञापन
----------------------------------
अरुण के इलाज का खर्च मुख्यमंत्री राहत कोष से दिया जाएगा। इसके लिए हमने शासन को पत्र भी लिखा हुआ है। साथ ही डॉक्टर से भी किसी तरह का शुल्क न लेने को कहा गया है। अरुण के परिजन निश्चिंत होकर अरुण का इलाज कराएं।
विज्ञापन
पीके पांडेय, डीएम।