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कचरा प्रबंधन के लिए फाइनल नहीं हो पा रही जमीन
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कचरा प्रबंधन के लिए फाइनल नहीं हो पा रही जमीन
सहारनपुर। कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए आवेदन आने के बावजूद जमीन फाइनल नहीं हो पा रही है, जबकि शहर में प्रतिदिन निकलने वाला 125 मीट्रिक टन कचरे का प्रबंधन करने में निगम की फजीहत हो रही है। जमीन फाइनल न होने को लेकर निगम में तमाम तरह की चर्चाएं हैं। लेकिन महापौर और निगम के अफसरों का कहना है कि नियमों के अनुसार ही जमीन फाइनल की जाएगी।
नगर निगम ने कुछ समय पहले कचरा प्रबंधन के लिए जमीन बेचने के इच्छुक किसानों से आवेदन मांगे थे। जमीन के लिए बेहट रोड, जनता रोड, टपरी रोड, मल्हीपुर रोड और दिल्ली रोड को चिह्नित किया गया था। न्यूनतम चार हेक्टेयर भूमि की जरूरत बताई गई थी। संबंधित मार्गों के 11 किसानों ने आवेदन किया। जमीन के भौतिक सत्यापन के लिए अधिकारियों की एक समिति भी गठित की गई। समिति द्वारा सभी जमीनों का सत्यापन किया गया। जिसके आधार पर जमीनों का हेक्टेयर अनुसार सर्किल रेट तय किया गया। नियमानुसार सबसे कम कीमत की जमीन खरीदी जानी चाहिए, मगर फिर भी जमीन फाइनल नहीं हो पा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जमीन फाइनल करने में जब इतनी देरी हो रही है, तो फिर कचरा निस्तारण प्लांट कब शुरू होगा।
-------- इन जगहों से मिले आवेदन
-- जगह -------------- जमीन का क्षेत्रफल
शेखपुरा कदीम --------- 3.245 हेक्टेयर
मनानी ----------------- 4.80 हेक्टेयर
मल्हीपुर --------------- 7.0288 हेक्टेयर
मनानी ----------------- 4.79 हेक्टेयर
घुन्ना माहेश्वरी ---------- 8.926 हेक्टेयर
हलालपुर --------------- 4.359 हेक्टेयर
देवली ------------------- 5.029 हेक्टेयर
शेखपुरा कदीम ---------- 4.750 हेक्टेयर
बेहड़ेकी अहतमाल ------ 3.396 हेक्टेयर
हलगोया ---------------- 4.80 हेक्टेयर
शकलापुरी -------------- 6.2090 हेक्टेयर
-----------
शर्तों को पूरा नहीं कर रही कुछ जमीन
नगर निगम को प्राप्त आवेदनों में कई जमीनें ऐसी हैं, जो शतों पर खरा नहीं उतर रही हैं। नगर निगम सूत्रों ने बताया कि कचरा प्रबंधन के लिए जमीन गांव के आसपास न हो, जमीन से 200 मीटर के दायरे में कोई नदी ना बहती हो, कोई अस्पताल या स्कूल जमीन के आसपास न हो। साथ ही जमीन हवाई अड्डे से कम से कम 20 किलोमीटर दूरी पर हो। सूत्रों का कहना है कि कई जमीनें ऐसी हैं, जो सरसावा एयरफोर्स स्टेशन से 15 किलोमीटर दूर भी नहीं हैं।
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लगातार समस्या बन रहा कचरा
कचरा प्रबंधन के लिए जमीन फाइनल नहीं होने से कचरा लगातार समस्या बना हुआ है। शहर से प्रतिदिन करीब 125 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसे ठिकाने लगाने के लिए नगर निगम को पसीने छूट रहे हैं। नगर निगम शहर के कचरे केे बाहरी वार्डों में डालने को मजबूर है। कमेला कालोनी क्षेत्र में कचरा डालने को लेकर विरोध हो चुका है। दो दिन पहले ही शकलापुरी मार्ग पर भी कचरा डालने को लेकर लोगों ने नाराजगी व्यक्त की थी।
कचरा प्रबंधन के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। कई आवेदन भी नगर निगम को मिले हैं। जल्द ही बैठक कर जमीन फाइनल की जाएगी। जमीन फाइनल करने में देरी की मुख्य वजह कई जमीनों का शर्तों पर खरा नहीं उतरना है। हमारी कोशिश कम से कम दाम में अच्छी जमीन तलाशने की है। -- संजीव वालिया, महापौर।
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सहारनपुर। कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए आवेदन आने के बावजूद जमीन फाइनल नहीं हो पा रही है, जबकि शहर में प्रतिदिन निकलने वाला 125 मीट्रिक टन कचरे का प्रबंधन करने में निगम की फजीहत हो रही है। जमीन फाइनल न होने को लेकर निगम में तमाम तरह की चर्चाएं हैं। लेकिन महापौर और निगम के अफसरों का कहना है कि नियमों के अनुसार ही जमीन फाइनल की जाएगी।
नगर निगम ने कुछ समय पहले कचरा प्रबंधन के लिए जमीन बेचने के इच्छुक किसानों से आवेदन मांगे थे। जमीन के लिए बेहट रोड, जनता रोड, टपरी रोड, मल्हीपुर रोड और दिल्ली रोड को चिह्नित किया गया था। न्यूनतम चार हेक्टेयर भूमि की जरूरत बताई गई थी। संबंधित मार्गों के 11 किसानों ने आवेदन किया। जमीन के भौतिक सत्यापन के लिए अधिकारियों की एक समिति भी गठित की गई। समिति द्वारा सभी जमीनों का सत्यापन किया गया। जिसके आधार पर जमीनों का हेक्टेयर अनुसार सर्किल रेट तय किया गया। नियमानुसार सबसे कम कीमत की जमीन खरीदी जानी चाहिए, मगर फिर भी जमीन फाइनल नहीं हो पा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जमीन फाइनल करने में जब इतनी देरी हो रही है, तो फिर कचरा निस्तारण प्लांट कब शुरू होगा।
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-------- इन जगहों से मिले आवेदन
-- जगह -------------- जमीन का क्षेत्रफल
शेखपुरा कदीम --------- 3.245 हेक्टेयर
मनानी ----------------- 4.80 हेक्टेयर
मल्हीपुर --------------- 7.0288 हेक्टेयर
मनानी ----------------- 4.79 हेक्टेयर
घुन्ना माहेश्वरी ---------- 8.926 हेक्टेयर
हलालपुर --------------- 4.359 हेक्टेयर
देवली ------------------- 5.029 हेक्टेयर
शेखपुरा कदीम ---------- 4.750 हेक्टेयर
बेहड़ेकी अहतमाल ------ 3.396 हेक्टेयर
हलगोया ---------------- 4.80 हेक्टेयर
शकलापुरी -------------- 6.2090 हेक्टेयर
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शर्तों को पूरा नहीं कर रही कुछ जमीन
नगर निगम को प्राप्त आवेदनों में कई जमीनें ऐसी हैं, जो शतों पर खरा नहीं उतर रही हैं। नगर निगम सूत्रों ने बताया कि कचरा प्रबंधन के लिए जमीन गांव के आसपास न हो, जमीन से 200 मीटर के दायरे में कोई नदी ना बहती हो, कोई अस्पताल या स्कूल जमीन के आसपास न हो। साथ ही जमीन हवाई अड्डे से कम से कम 20 किलोमीटर दूरी पर हो। सूत्रों का कहना है कि कई जमीनें ऐसी हैं, जो सरसावा एयरफोर्स स्टेशन से 15 किलोमीटर दूर भी नहीं हैं।
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लगातार समस्या बन रहा कचरा
कचरा प्रबंधन के लिए जमीन फाइनल नहीं होने से कचरा लगातार समस्या बना हुआ है। शहर से प्रतिदिन करीब 125 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसे ठिकाने लगाने के लिए नगर निगम को पसीने छूट रहे हैं। नगर निगम शहर के कचरे केे बाहरी वार्डों में डालने को मजबूर है। कमेला कालोनी क्षेत्र में कचरा डालने को लेकर विरोध हो चुका है। दो दिन पहले ही शकलापुरी मार्ग पर भी कचरा डालने को लेकर लोगों ने नाराजगी व्यक्त की थी।
कचरा प्रबंधन के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। कई आवेदन भी नगर निगम को मिले हैं। जल्द ही बैठक कर जमीन फाइनल की जाएगी। जमीन फाइनल करने में देरी की मुख्य वजह कई जमीनों का शर्तों पर खरा नहीं उतरना है। हमारी कोशिश कम से कम दाम में अच्छी जमीन तलाशने की है। -- संजीव वालिया, महापौर।