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आज हड़ताल पर रहेंगे प्राइवेट चिकित्सक
Updated Sat, 28 Jul 2018 12:33 AM IST
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सहारनपुर। आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) से जुड़े तमाम प्राइवेट चिकित्सक आज हड़ताल पर रहेंगे। यह निर्णय नेशनल मेडिकल कमीशन को लेकर शुक्रवार को हुई आईएमए की बैठक में लिया गया। आईएमए पदाधिकारियों ने कमीशन को अलोकतांत्रिक, गरीब, संघीय और ओबीसी विरोधी करार दिया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मोहन पांडेय ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन केवल अमीरों को फायदा पहुंचाने वाला है। इस बिल के माध्यम से भारत सरकार के सभी अधिकारों को केंद्रीयकृत करने का इरादा स्पष्ट नजर आ रहा है। लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए एमसीआई को समाप्त कर राष्ट्र चिकित्सा आयोग का गठन पूरी तरह आलोकतांत्रिक है। इससे राज्य चिकित्सा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसमें तीन की जगह दस सदस्य हैं, जिसमें राज्य का प्रतिनिधित्व दस साल की अवधि के लिए अप्रतिनिधित रहेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्नातकोत्तर नीट परीक्षा में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। एग्जिट टेस्ट के रूप में अंतिम एमबीबीएस परीक्षा का उपयोग विभिन्न कारणों से गरीब और पिछड़े समुदायों के छात्रों के लिए नुकसानदायक होगा। इसकी वजह से संबंधित राज्य चिकित्सा परिषदों के साथ पंजीकृत नहीं हो पाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिल लागू होता है तो आईएमए देशव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होगी। उन्होंने 28 जुलाई को धिक्कार दिवस के रूप में मनाने की बात कही। इस दिन सभी चिकित्सक सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक हड़ताल पर रहेंगे।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मोहन पांडेय ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन केवल अमीरों को फायदा पहुंचाने वाला है। इस बिल के माध्यम से भारत सरकार के सभी अधिकारों को केंद्रीयकृत करने का इरादा स्पष्ट नजर आ रहा है। लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए एमसीआई को समाप्त कर राष्ट्र चिकित्सा आयोग का गठन पूरी तरह आलोकतांत्रिक है। इससे राज्य चिकित्सा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसमें तीन की जगह दस सदस्य हैं, जिसमें राज्य का प्रतिनिधित्व दस साल की अवधि के लिए अप्रतिनिधित रहेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्नातकोत्तर नीट परीक्षा में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। एग्जिट टेस्ट के रूप में अंतिम एमबीबीएस परीक्षा का उपयोग विभिन्न कारणों से गरीब और पिछड़े समुदायों के छात्रों के लिए नुकसानदायक होगा। इसकी वजह से संबंधित राज्य चिकित्सा परिषदों के साथ पंजीकृत नहीं हो पाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिल लागू होता है तो आईएमए देशव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होगी। उन्होंने 28 जुलाई को धिक्कार दिवस के रूप में मनाने की बात कही। इस दिन सभी चिकित्सक सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक हड़ताल पर रहेंगे।
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