{"_id":"5ae37df94f1c1b5c098b6de8","slug":"81524858361-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसडी कन्या इंटर कालेज में कुर्सी की जंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसडी कन्या इंटर कालेज में कुर्सी की जंग
Updated Sat, 28 Apr 2018 01:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एसडी कन्या इंटर कालेज में कुर्सी की जंग
सहारनपुर। एसडी कन्या इंटर कालेज में निलंबित और कार्यवाहक प्रधानाचार्या के बीच कुर्सी की जंग को लेकर शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। दोनों ने प्रधानाचार्य के दफ्तर पर अपने-अपने ताले जड़ दिए हैं। हंगामे के दौरान कालेज की छात्राएं भी प्रधानाचार्यों के बीच चले आरोप-प्रत्यारोप का तमाशा देखती रहीं। ऐसे माहौल से परेशान होने के बावजूद छात्राएं खुलकर तो सामने नहीं आ रही हैं। लेकिन उनका कहना है कि यह विवाद खत्म न हुआ तो उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
बता दें कि एसडी कन्या इंटर कालेज में छात्राओं से गलत तरीके से फीस वसूली करने के आरोप में कालेज प्रबंधन ने विभागीय अफसराें के निर्देश पर सरिता शर्मा को प्रधानाचार्या पद से
कॉलेज मैनजर ने विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर सरिता शर्मा को प्रधानाचार्या पद से निलंबित कर दिया था। उनके स्थान पर चंद्रा सिंह को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाया था। तब से यह विवाद गरमाया हुआ है। चंद्रा सिंह का आरोप है कि मैनेजमेंट की ओर से 23 अप्रैल को सरिता शर्मा का निलंबन हुआ। इसके बाद सरिता शर्मा ने कार्यालय पर ताले जड़ दिए। तब से वह बाहर बैठकर काम निपटा रही हैं। उधर, सरिता शर्मा का आरोप है कि ताले चंद्रा द्वारा लगाए गए हैं।
विज्ञापन
----
मैंने कोई अवैध वसूली नहीं की: सरिता शर्मा
- निलंबित चल रही प्रधानाचार्य सरिता शर्मा ने खुद को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने व्यवस्था के अनुरूप छात्राओं से निर्धारित मदों में शुल्क लिया है जो नियमानुसार शुल्क निधियों में जमा कराया जाता रहा है। बताया कि अनुसूचित जाति और सामान्य जाति की छात्राओं से अलग-अलग शुल्क का कोई प्रावधान नहीं है और उनके पास इस तरह का शासन का कोई आदेश भी नहीं है। ऐसे में वह पूरी तरह निर्दोष हैं।
-------
डीआईओएस के पत्र ने उलझन में डाला
जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय का पत्र उलझन में डालने वाला है। एक तरफ डीडीआर की जांच में प्रधानाचार्य दोषी पाई जाती हैं, जिनके निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय मुझे दोषी प्रधानाचार्य के विरुद्घ कार्रवाई करने के निर्देश देते हैं। अब 26 अप्रैल को एक और पत्र जिला विद्यालय निरीक्षक का मुझे मिला है, जिसमें उन्होंने अपने 18 अप्रैल के आदेश को स्थगित करने की बात कही गई है। यह पत्र उलझन में डालने वाला है।
-- सर्वेश्वरनाथ भास्कर, मैनेजर, एसडी कन्या इंटर कॉलेज।
-------------------------------------
मैंने 26 अप्रैल को जो पत्र लिखा है उसमें दोषी प्रधानाचार्य की बहाली की कोई बात नहीं कही गई है। मैंने केवल अपने 18 अप्रैल के आदेश को स्थगित करने की बात कही है।
- रवि दत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय।
------------
विज्ञापन
सहारनपुर। एसडी कन्या इंटर कालेज में निलंबित और कार्यवाहक प्रधानाचार्या के बीच कुर्सी की जंग को लेकर शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। दोनों ने प्रधानाचार्य के दफ्तर पर अपने-अपने ताले जड़ दिए हैं। हंगामे के दौरान कालेज की छात्राएं भी प्रधानाचार्यों के बीच चले आरोप-प्रत्यारोप का तमाशा देखती रहीं। ऐसे माहौल से परेशान होने के बावजूद छात्राएं खुलकर तो सामने नहीं आ रही हैं। लेकिन उनका कहना है कि यह विवाद खत्म न हुआ तो उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
बता दें कि एसडी कन्या इंटर कालेज में छात्राओं से गलत तरीके से फीस वसूली करने के आरोप में कालेज प्रबंधन ने विभागीय अफसराें के निर्देश पर सरिता शर्मा को प्रधानाचार्या पद से
विज्ञापन
कॉलेज मैनजर ने विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर सरिता शर्मा को प्रधानाचार्या पद से निलंबित कर दिया था। उनके स्थान पर चंद्रा सिंह को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाया था। तब से यह विवाद गरमाया हुआ है। चंद्रा सिंह का आरोप है कि मैनेजमेंट की ओर से 23 अप्रैल को सरिता शर्मा का निलंबन हुआ। इसके बाद सरिता शर्मा ने कार्यालय पर ताले जड़ दिए। तब से वह बाहर बैठकर काम निपटा रही हैं। उधर, सरिता शर्मा का आरोप है कि ताले चंद्रा द्वारा लगाए गए हैं।
विज्ञापन
----
मैंने कोई अवैध वसूली नहीं की: सरिता शर्मा
- निलंबित चल रही प्रधानाचार्य सरिता शर्मा ने खुद को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने व्यवस्था के अनुरूप छात्राओं से निर्धारित मदों में शुल्क लिया है जो नियमानुसार शुल्क निधियों में जमा कराया जाता रहा है। बताया कि अनुसूचित जाति और सामान्य जाति की छात्राओं से अलग-अलग शुल्क का कोई प्रावधान नहीं है और उनके पास इस तरह का शासन का कोई आदेश भी नहीं है। ऐसे में वह पूरी तरह निर्दोष हैं।
-------
डीआईओएस के पत्र ने उलझन में डाला
जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय का पत्र उलझन में डालने वाला है। एक तरफ डीडीआर की जांच में प्रधानाचार्य दोषी पाई जाती हैं, जिनके निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय मुझे दोषी प्रधानाचार्य के विरुद्घ कार्रवाई करने के निर्देश देते हैं। अब 26 अप्रैल को एक और पत्र जिला विद्यालय निरीक्षक का मुझे मिला है, जिसमें उन्होंने अपने 18 अप्रैल के आदेश को स्थगित करने की बात कही गई है। यह पत्र उलझन में डालने वाला है।
-- सर्वेश्वरनाथ भास्कर, मैनेजर, एसडी कन्या इंटर कॉलेज।
-------------------------------------
मैंने 26 अप्रैल को जो पत्र लिखा है उसमें दोषी प्रधानाचार्य की बहाली की कोई बात नहीं कही गई है। मैंने केवल अपने 18 अप्रैल के आदेश को स्थगित करने की बात कही है।
- रवि दत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय।
------------